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माता-पिता का सम्मान करने से रहती है समृद्धि

3 वर्ष पहले
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बरखेड़ा हाट हनुमान मंदिर समिति द्वारा पुरुषोत्तम मास में मंदिर कलश प्राण -प्रतिष्ठा 33 कुंडीय मारुति महायज्ञ एवं संगीतमय श्रीरामकथा का आयोजन 15 मई से 21 मई तक किया जा रहा है। कथा में आज बालसंत शाश्वत महाराज ने कहा कि जिस घर में माता-पिता और गुरुओं का सम्मान किया जाता है। उस घर में समृद्धि सदैव बनी रहती है। सेवा करने से ही मेवा मिलती है। श्रीराम और लक्ष्मण ने गुरु विश्वामित्र की सेवा की। भरे स्वयंवर में शिव का धनुष तोड़कर सीता स्वयंवर कर रघुवंश का मान बढ़ाया।

महाराज ने कहा कि धनुष अंहकार का प्रतीक है और सीता स्वयंवर में भाग लेने वाले सभी राजा अहंकारी थे। अगर आप राम बनना चाहते हो तो अंहकार को छोड़ दो। मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने अपने जीवन आचरण के बहुत से उदाहरण हमारे सामने रखे हैं, जिन्हें हमें अपनाना चाहिए। श्री राम अंहकार शून्य हैं, जिस कारण उनके हाथों से धनुष टूट जाता है, खंडित हो जाता है। उन्होंने राजा जनक का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जनक जी की प्रतिज्ञा थी कि जो शिव का धनुष तोड़ेगा उससे ही सीता का ब्याह होगा। प्रतिज्ञा अनुरूप धनुष तोड़ते ही ब्याह हो जाना चाहिए था परंतु लोकमत और वेदमत को ध्यान में रखते हुए जनकपुर के दूत बारात का निमंत्रण लेकर अयोध्या आते है और राम की बारात जनकपुर जाती है। कथा समापन पर हवन भंडारे के साथ पूर्णाहुति की जाएगी। ग्रामवासियों ने धर्मप्रेमी जनों से कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की है।

प्राण-प्रतिष्ठा

हनुमान मंदिर कलश प्राण -प्रतिष्ठा और 33 कुंडीय मारुति महायज्ञ में चल रही संगीतमय श्रीरामकथा

बरखेड़ा हाट में चल रही भागवत कथा में प्रवचन देते शाश्वत महाराज।

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