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एसी कोच वाली पहली ट्रेन चलाने पर विधायक बोले- सिंधिया जी की सौगात है तो वे जनरल, महिला और निशक्तों की बोगियां भी लगवाएं

3 वर्ष पहले
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क्षेत्र में अब तक की सबसे आधुनिक सुविधा सम्पन्न ट्रेन मंगलवार तड़के शुरू हो गई।

भगत की कोठी (जोधपुरी) से चली यह हमसफर ट्रेन सुबह करीब 3 बजे गुना स्टेशन पहुंची और 10 मिनट के स्टापेज के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे हरी झंडी दिखाई और खुद भी इसमें बैठकर अशोकनगर तक गए। इस मौके पर स्टेशन पर बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता भी मौजूद रहे। वहीं गुना के भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने अपने खास अंदाज में इस पर टिप्पणी भी कर दी। एक कार्यक्रम के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या यह ट्रेन सांसद के प्रयासों का नतीजा है? विधायक ने जवाब दिया कि अगर सिंधिया जी ने यह ट्रेन चलवाई है तो वे इसमें जनरल, महिलाओं व निशक्तों के लिए बोगियां लगवाएं। गौरतलब है कि हमसफर श्रेणी की ट्रेनों में सिर्फ थर्ड एसी बोगियां होती हैं। जाहिर है कि यह आम लोगों की पहुंच से बहुत दूर है।

यह सुविधाएं

हैं ट्रेन में

इसमें सिर्फ एसी स्लीपर कोच हैं

ट्रेन में सीसी टीवी कैमरे लगे हैं और मॉनिटर भी है।

हर बर्थ के साथ अलग मोबाइल चार्जर है। साथ ही अलग-अलग लाइट भी लगी है।

यह एकमात्र ट्रेन है, जिसके टॉयलेट में यूरिनल भी लगा है

ट्रेन का नियमित संचालन 18 मई से : इस ट्रेन का नियमित संचालन 18 मई से शुरू होगा। जब यह चेन्नई से चलकर गुना पहुंचेगी। वहीं भगत की कोठी से यह ट्रेन 23 मई को चलकर 24 को गुना आएगी। यह ट्रेन गुना सुबह 5.15 पर गुना आएगी और 5.25 पर चलेगी। सुबह 11 बजे यह भोपाल पहुंचेगी। इस दौरान इसका सिर्फ बीना में ही स्टापेज रहेगा।चेन्नई से चलकर यह ट्रेन हर शनिवार रात 10.25 पर भोपाल आने के बाद 10.35 पर चलकर रविवार अल सुबह 3.30 पर गुना पहुंचेगी।

सीटों की उपलब्धता के आधार पर तय होगा किराया

इस ट्रेन का किराया सीटों की उपलब्धता के आधार पर तय होगा। यानि कम सीटें होंगे तो ज्यादा और अगर ज्यादा सीट बची हैं तो कम रेट पर ही टिकट मिल जाएगा। इसे डायनेमिक फेयर कहते हैं। फिर भी इसमें भोपाल तक के सफर पर औसतन 600 रुपए खर्च करने पड़ेंगे। यह एसी बस से ढाई गुना से भी ज्यादा है। जबकि आम ट्रेन से यह कम से कम 6 गुना ज्यादा बैठेगा।

इंटरसिटी में एसी चेयरकार भी सफल नहीं रही थी

ग्वालियर-भोपाल इंटरसिटी जब चली थी तब उसमें एसी चेयर कार लगाई गई थी। भोपाल के लिए उसका किराया300 रुपए था। तब भी यह सफल नहीं हो पाई थी। एक माह के भीतर ही इसे हटाना पड़ा था। कारण यह है कि ट्रेन ज्यादा किराया लेकर भी भोपाल पहुंचाने में 5 से 6 घंटे का समय लेती हैं। जबकि बस 4 घंटे में ही पहुंच जाती है।

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