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मनुष्य के जीवन में अच्छे, बुरे दिन प्रभु की कृपा से ही आते हैं

3 वर्ष पहले
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मनुष्य के जीवन में अच्छे व बुरे दिन प्रभू की कृपा से ही आते हैं। उन्होंने कहा कि जिस समय भगवान कृष्ण का जन्म हुआ जेल के ताले टूट गए, पहरेदार सो गए, वसुदेव देवकी बंधनमुक्त हो गए, प्रभू की कृपा से कु छ भी असंभव नहीं है। कृपा न होने पर प्रभु मनुष्य को सभी सुखों से वंचित कर देता है।

यह बातें शनिवार को महालक्ष्मी महिला मंडल के तत्वाधान में धीरज-धाम में चल रही भागवत कथा महापुराण के चौथे दिन पंडित डॉ. दीपेश पाठक ने कहीं। इस अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। कृष्ण जन्म होते ही भक्तगण जमकर नाचे झूमे। इस अवसर पर परीक्षित सुरेश दुबे, जिला जनपद पंचायत अध्यक्ष उर्मिला मरेठा, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा ललित नागौरी, तहसीलदार पुष्पेंद्र निगम, मंडी सचिव किशोर महेश्वरी, प्रेमनारायण गोस्वामी, रामेश्वर खंडेलवाल, महेश चंदा राजू जायसवाल, धीरज धारवां, संतोष साहू, रीतू खंडेलवाल, अनिल सोनी, राजेश कटारिया, सुदर्शन व्यास, रुद्र व्यास, समर्थ मुंदडा आदि उपस्थित थे।

भागवत कथा

श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु, पंडित दीपेश पाठक ने श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई, दिए प्रवचन

महालक्ष्मी महिला मंडल ने किया भागवत कथा का आयोजन।

सुबह हो रही नित्य पूजा और अभिषेक

भागवत कथा के पूर्व प्रतिदिन सुबह आराध्य देव की पूजा अर्चना की जा रही है। आचार्य पंडित मनीष पाठक के मार्गदर्शन में ठाकु रजी का अभिषेक श्रृंगार व आरती का वैदिक कार्य संपन्न किया जा रहा है। इस दौरान सुबह के समय श्रद्धालु पूजन के लिए उपस्थित होते हैं।

कन्हैया के जन्मते ही छाई खुशियां

आष्टा|
द्वापर युग में राजा कंस मथुरा पर राज करते थे। कंस बड़ा ही दुष्ट और अहंकारी राजा था। कंस ने अपनी बहन देवकी का विवाह वासुदेवजी से करवाया। जब राजा कंस अपनी बहन को ससुराल छोडऩे जा रहा था, तभी रास्ते में आकाशवाणी हुई कि राजा जिस बहन और जमाई को तू बड़ी खुशी से विदाई दे रहा है, उसी बहन की आठवीं संतान से तुझे मृत्यु प्राप्त होगी। यह बातें पगारिया हाट में चल रही श्रीमद भागवत कथा में कथावाचक जगदीश शर्मा ने कहीं। इसके बाद कंस ने दोनों को कारागृह में बंद कर दिया। बाद में भगवान विष्णु नारायण ने आठवीं संतान के रूप में माता देवकी व वासुदेव के यहां जन्म लिया। बालक कन्हैया के जन्म लेते ही पूरी सृष्टि में खुशियां छा गईं।

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