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नियमितीकरण नीति को रद्द करने के विरोध में प्रदर्शन

3 वर्ष पहले
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नारनौल | सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा की राज्य कार्यकारिणी के आह्वान पर जिला इकाई ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा 31 मई 2018 की नियमितीकरण नीति को रद्द करने के विरोध में शनिवार को शहर के मुख्य मार्गों पर प्रदर्शन कर रोष जताया। इस मौके पर प्रदर्शनकारियों ने विधायकों के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर इस मामले में कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अध्यादेश लाने की इस नीति को बचाने का मांग की।

इस मौके पर पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए जिला प्रधान महेश यादव ने बताया कि वर्ष 2018 में विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने कर्मचारियों को पंजाब के समान वेतनमान देने, अतिथि अध्यापकों को पक्का करने, ठेका प्रथा समाप्त करने, छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने आदि लोक लुभावने वायदे किए थे। परंतु सत्ता पर काबिज होने के बाद भाजपा न केवल अपने भी वायदे भूल गई, बल्कि वायदों के विपरीत ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया है। नाबार्ड योजना के तहत लगे बूस्टर ऑपरेटरों को समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है। पैसे मांगने पर उन्हें हटाने की धमकी दी जा रही है। इससे कर्मचारियों में सरकार के प्रति भारी रोष है। इसलिए सर्व कर्मचारी संघ ने सरकार से अपने चुनावी वायदे पूरे कर कर्मचारी वर्ग व आमजन को राहत पहुंचाने की मांग की है। इसके बाद सभी कर्मचारी पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस से शहर के मुख्य मार्गों पर प्रदर्शन करते हुए सबसे पहले अटेली की विधायक संतोष यादव के निवास पर पहुंचे। जहां उन्हें ज्ञापन सौंपा। इसके बाद नांगल चौधरी के विधायक डाॅ. अभय सिंह व नारनौल के विधायक ओमप्रकाश यादव को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपने वालों में संघ के जिला सचिव किरोड़ीमल सैनी, रमेश कुमार, भूपसिंह, कौशल कुमार, अशोक पालीवाल, फूलचंद, पूर्णचंद जैदिया, अर्जुन सोनी, गुलजारीलाल, राजकुमार, सुनील कुमार, महेंद्र संगेलिया, धर्मपाल शर्मा, कृष्णकांत, कुलदीप, राजेश, जितेंद्र, गोपीचंद व नंदलाल आदि शामिल थे।

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