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सुहागिनों ने दिन भर उपवास रखकर की पति के स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए कामना

3 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर| औरंगाबाद ग्रामीण/अम्बा

जिलेभर में मंगलवार को सुहागिनों ने धूमधाम से वट सावित्री व्रत मनाया और उपवास रखकर अपने पति की लंबी उम्र के लिए कामना की। सुबह से ही विवाहित महिलाओं की भीड़ वट (बरगद) वृक्षों के नीचे उमड़ने लगी थी जो दोपहर तक देखी गई। यह व्रत ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत का खास महत्व है। इस दिन सभी विवाहित स्त्रियां वट वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा आैर वृक्ष की परिक्रमा करते हुए उसमें कच्चा सूत बांधती हैं। इसके बाद वे सत्यवान व सावित्री की कथा सुनती हैं। पंडित चन्द्रनरेश पांडेय ने बताया कि इसी दिन सावित्री ने अपने कठिन तप के बल से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राणों का रक्षा की थी। शहर के ब्लॉक मोड़ निवासी गीता देवी, हीरा देवी, कंचन देवी, किरण कुमारी, सोनी कुमारी, मीरा देवी, रूबी देवी ने बताया कि वे कई वर्षों से इस व्रत को करती आ रही हैं। वे अपने पतियों की लंबी उम्र और स्वास्थ्य की दुअा मांगती हैं। शहर के शाहपुर मुहल्ला स्थित देवी मंदिर, शहीद नगर, योद्धा नगर, रामडीहा, न्यू एरिया देवी स्थान, ब्लॉक कॉलोनी, श्रीकृष्ण नगर अहरी, सहित अन्य जगहों पर वट वृक्षों की पूजा की गई।

अम्बा के वट वृक्ष के समीप लगी महिलाओं की भीड़।

कुटुंबा के विभिन्न गांवों में की गई वट सावित्री पूजा

कुटुंबा प्रखंड में मंगलवार को सूर्योदय पूर्व से ही विवाहित महिलाएं वट वृक्ष के नीचे पूजा करने के लिए पहुंच गई। सैकड़ों की संख्या में महिलाएं हाथ में पंखा लिए वट वृक्ष की परिक्रमा की। प्रखंड के अम्बा, रिसियप, संडा सहित अन्य जगहों पर श्रद्धा के साथ पूजा की गई। पंडित प्रो ब्रजनंदन पाठक ने बताया कि वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं अपने पति को पंखा झलकर प्रेम प्रकट करती है और उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं। पूजा अर्चना कर महिलाएं मां सतबहिनी मंदिर पहुंची, जहां मां की भी पूजा-अर्चना की। इधर नवीनगर नगर पंचायत के पंजाब नेशनल बैंक के समीप स्थित वट वृक्ष की भी विवाहित महिलाओं ने पूजा की और अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा।

वट वृक्ष की परिक्रमा करती सुहागिन महिलाएं।

दूर-दूर से आकर महिलाओं ने की वट वृक्ष की पूजा

जिले के सभी गांवों में वट की वृक्ष नहीं होने से महिलाओं को पूजा करने के लिए कई किमी दूर दूसरे गांव में जाना पड़ा। जिससे काफी परेशानियां हुईं। इससे यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोग अब वृक्ष लगाने के प्रति जागरूक नहीं हैं। तभी तो आज गांव में एक वट का वृक्ष भी नहीं है।

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