सिटी रिपोर्टर| औरंगाबाद ग्रामीण
शहर के शाहपुर मुहल्ला स्थित प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय (टीचर ट्रेनिंग कॉलेज) के नए भवन का निर्माण बेहद धीमी गति से हो रहा है। लगभग 10 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा भवन का निर्माण अब तक अधूरा पड़ा हुआ है, जबकि इस भवन का निर्माण पूर्ण करते हुए अप्रैल 2018 में ही हैंडओवर करना था। लेकिन जिस गति से भवन का निर्माण हो रहा है, उससे इस साल के अंत तक भवन का निर्माण पूरा होने की संभावना नहीं है। यह शिक्षा विभाग के बिहार राज्य आधारभूत संरचना भवन द्वारा बनाया जा रहा है। कॉलेज के प्राचार्य सुरेश प्रसाद ने बताया कि नया भवन नहीं बनने के कारण प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षुओं को काफी परेशानी हो रही है और उन्हें पुराने व जर्जर भवन में ही विवश होकर उन्हें प्रशिक्षण प्राप्त करना पड़ रहा है। वहीं ट्रेनिंग लेने वाले प्रशिक्षु भवन नहीं रहने के कारण यहां रह भी नहीं पाते हैं, जबकि यह आवासीय प्रशिक्षण कॉलेज है। इस संबंध में प्राचार्य ने कई बार पत्र लिखकर विभाग को नया भवन का निर्माण नहीं होने की बात से अवगत कराया है। इसके बावजूद अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। उन्होंने बताया कि दाउदनगर अनुमंडल में विभाग के द्वारा भवन निर्माण शुरू किया गया था। जो जनवरी 2018 में ही तैयार कर हैंडओवर कर दिया गया।
जर्जर व पुराने भवन में चल रहा टीचर ट्रेनिंग कॉलेज
11 में से 9 पद शिक्षकों के खाली हैं गेस्ट टीचर के भरोसे हो रही पढ़ाई
टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में कुल 11 पद हैं। जिसमें से दो पदों को छोड़कर शेष नौ पद खाली ही हैं। जिन पर अतिथि शिक्षकों को बहाल कर उनके माध्यम से छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दो पदों पर एक प्राचार्य सुरेश प्रसाद व एक शिक्षक रेणु कुमारी शामिल हैं। प्राचार्य ने बताया कि ये अतिथि शिक्षक तीन-तीन की संख्या में एक सप्ताह में दो दिन आकर प्रशिक्षण देते हैं। वहीं सप्ताह के शनिवार व रविवार को टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में प्रशिक्षुओं की भीड़ काफी बढ़ जाती है। क्योंकि इन दोनों दिन नामांकित छात्र-छात्राओं के अलावा अन्य दूसरे निजी विद्यालयों के भी शिक्षक डीएलएड का कोर्स करने आते हैं। जिससे जगह की कमी के कारण काफी परेशानी होती है।
छात्र व छात्राओं के लिए है अलग-अलग भवन
टीचर ट्रेनिंग कॉलेज के प्राचार्य सुरेश प्रसाद ने बताया कि नया भवन बनने के बाद प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्र व छात्राओं के लिए अलग-अलग रहने की व्यवस्था होगी। इसके लिए तीन मंजिला गर्ल्स व ब्वॉय हॉस्टल का निर्माण किया जा रहा है। वहीं प्राचार्य का अलग आवास व शैक्षणिक भवन भी बनाया जा रहा है। पूरे भवन की चहारदीवारी कराई जाएगी और उसमें एक पार्क का भी निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी इस कॉलेज में 300 छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन जब नया भवन बनकर तैयार हो जाएगा, तब 400 छात्र-छात्राएं एक साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही साथ भवन में कई अत्याधुनिक उपकरण भी लगाए गए हैं। ताकि छात्रों को किसी भी तरह की कोई परेशानी का सामना करना ना पड़े। भवन तीन मंजीला होगा। इसमें लड़के व लड़कियों के लिए अलग अलग व्यवस्था की जाएगी।
इंटर पास छात्र-छात्राओं के लिए दो वर्षों का होता है डीएलएड कोर्स
डीएलएड कोर्स दो वर्षो का होता है, जिसमें इंटर पास छात्र-छात्राएं आवेदन कर सकते हैं। यही कोर्स इस टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में कराया जाता है। इस कोर्स को करने के बाद प्रशिक्षणार्थियों किसी भी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के पद पर बहाल हो सकते है। वहीं सरकार ने भी अब सभी सरकारी व निजी विद्यालयों में डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके शिक्षकों की बहाली करने का आदेश दिया है।
अधूरा पड़ा शाहपुर मुहल्ला स्थित टीचर ट्रेनिंग कॉलेज का नया भवन, व जर्जर टीचर ट्रेनिंग कॉलेज का पुराना भवन।