दंतेवाड़ा| दक्षिण बस्तर में रेलवे लाइन दोहरीकरण कार्य को सुरक्षा देने के लिए अब रेलवे की फोर्स आरपीएफ मैदान में उतरेगी। आरपीएफ की 6 सशस्त्र कंपनियां बचेली से दंतेवाड़ा तक तैनात की जाएंगी। हरेक कंपनी में औसतन 100 से 120 जवान रहेंगे। रेलवे लाइन के दोहरीकरण कार्य में लगी मशीनों व वाहनों में आगजनी की लगातार नक्सली वारदातों के बाद यह निर्णय लिया गया है।
नक्सली वारदातों के चलते दंतेवाड़ा स्टेशन से किरंदुल के बीच 45 किमी लंबी रेललाइन का दोहरीकरण कार्य लंबे समय से ठप है। वन क्षेत्र होने के चलते इस हिस्से में पटरी उखाड़कर ट्रेन गिराने की दर्जनों वारदातें हो चुकी हैं। बीते 3 साल के भीतर कुपेर, तुड़पारास, कमालूर में रेल्वे लाइन दोहरीकरण में लगी मशीनों और वाहनों को आग लगाने की 6 वारदातों को नक्सली अंजाम दे चुके हैं। इसके बाद ठेकेदारों ने इस इलाके में काम करने से कतराना शुरू कर दिया है। आरपीएफ की तैनाती से जिला पुलिस बल, सीआरपीएफ व केंद्रीय बलों का भार हल्का हो जाएगा।
अब तक डंडों के भरोसे थे
बीते दो दशक से बस्तर में आरपीएफ को शस्त्र विहीन तैनात किया गया था। केवल डंडों के भरोसे इसके जवान चुनिंदा स्टेशनों पर तैनात थे। इसकी वजह से रेलवे लाइन की सुरक्षा के लिए अब तक जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ पर निर्भरता थी, लेकिन एंटी नक्सल ऑपरेशन में फोर्स की व्यस्तता के चलते रेलवे लाइन दोहरीकरण कार्य को पूरी सुरक्षा नहीं मिल पा रही।