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गाड़ियाें का इस्तेमाल घातक, अब तक 50 से ज्यादा जवान विस्फोट में शहीद

3 वर्ष पहले
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जगदलपुर/ दंतेवाड़ा| नक्सली पूरे बस्तर में जंगलों से लेकर सड़क तक में गुरिल्ला युद्ध कला का इस्तेमाल कर जवानों को निशाना बना रहे हैं। रविवार को भी दंतेवाड़ा के चोलनार में नक्सलियों ने इसी युद्धकला का इस्तेमाल कर जवानों की एक्सयूवी गाड़ी उड़ा दी। पिछले एक दशक में सुरक्षा बलों के जवानों को सबसे ज्यादा नुकसान गुरिल्ला युद्ध के बीच गाड़ियों में गश्त और सफर करने से ही हुआ है। बस्तर में हालात ऐसे हैं कि नक्सली बमों को झेलने के लिए बनाए गए एमपीवी (माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल) को भी बड़ी आसानी से उड़ा दे रहे हैं। चोलनार में विस्फोट में सात जवानों के अलावा अब तक करीब 50 से ज्यादा जवान ब्लास्ट में शहीद हो चुके हैं।

ये है चोलनार में शहीद हुए 7 में से 5 जवानों की तस्वीरें

सालिक राम सिन्हा

जानें, कब-कहां नक्सलियों ने उड़ाईं गाड़ियां

सुकमा के किस्टाराम में हुए ब्लास्ट में एमपीवी में बैठे 9 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे। इससे पहले बीजापुर में एमपीवी को निशाना बनाया गया था, इसमें 7 जवानों की मौत हुई थी। 2013 में बचेली के पास नक्सलियों ने 14 जवानों की एमपीवी को निशाना बनाया था। 2011 में दंतेवाड़ा के गाटम में एमपीवी पर नक्सली हमले में 10 जवान शहीद हो गए थे, इनमें आठ एसपीओ थे।

राजेश सिंह

टीकेश्वर ध्रुव

रामकुमार यादव

रविनाथ पटेल

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