बदरवास स्टेशन पर इंटरलॉकिंग की सुविधा शुरू
बदरवास रेलवे स्टेशन को हाईटेक करने की कवायद शुरू हो गई है। स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही और लेटलतीफी में सुधार लाने के मकसद से रेलवे आधुनिक तकनीक तेजी से लागू करने में लग गई है। जिसके चलते करीब 20 दिन पहले स्टेशन पर इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग की सुविधा शुरू हो चुकी है। साथ ही लेटेस्ट तकनीक के इस्तेमाल से सिग्नलिंग को बेहतरीन किया जा रहा है। स्टेशन पर अत्याधुनिक कंप्यूटर आधारित सिग्नल प्रणाली शुरू की गई है। अब कंप्यूटर के माउस की एक क्लिक पर रूट सेटिंग हो जाती है। जबकि पहले ऐसा नहीं था।
बदरवास रेलवे स्टेशन पर आने वाली ट्रेनों को इलेक्ट्रॉनिक सुविधा के जरिए पटरियों पर बदला जा रहा है। इसके लिए स्टेशन पर एक नवीन कम्प्यूटर भवन बनाया गया है। जिसमें 30 मार्च से यह सुविधा इस भवन से संचालित हो रही है क्योंकि इस कम्प्यूटर रूप से ही केबल पटरी तक बिछाई गई हैं। जिसके बाद इस मोटर पोइंट को चालू कर दिया जाता है। इस सुविधा के शुरु होने से गाड़ी की पोइंट पर जो पटरी बदली जाती हैं, उन पटरियों को वहीं रेलवे स्टेशन में बने इस भवन में बैठे बैठे बटन दबाकर बदला जा रहा है।
50 लाख रुपए की लागत से स्टेशन पर पेनल बिल्डिंग तैयार कराई गई है
ये है बिल्डिंग की खासियत
इस पेनल बिल्डिंग में चार रूम हैं, पहला रिले रूम, जिसमें सभी गाड़ी की पटरियों की जानकारी रहती है। दूसरा बैटरी रूम, जिसमें बड़ी बड़ी बैटरी रखी जाती है। इसके अलावा एक रूम आईपीएस के लिए है जो कि बिजली चली जाने पर बिजली वितरित करने का कार्य किया जाता है। इस भवन के बन जाने के बाद एक नयी तकनीकी का प्रयोग कर पटरियों को बदला जा रहा है। पहले जो काम आधे घंटे में होता था, अब वहीं काम भवन में बैठे बैठे बटन के माध्यम से दो मिनिट में हो रहा है।
50 लाख में बनकर तैयार हुई है बिल्डिंग
रेलवे स्टेशन पर 50 लाख की लागत से यह पेनल बिल्डिंग बनाई गई है। जिसमें केवल पोइंट तक डाली गई है और पूरा सिस्टम ऑटोमेटिक है।
स्टेशन पर सुविधा शुरू हो गई है
सहायक स्टेशन मास्टर बदरवास एसके दुबे ने बताया कि स्टेशन पर पटरी बदलने की इलेक्ट्रॉनिक सुविधा शुरू हो गई है। जिससे अब कंप्यूटर रूम में बैठे- बैठे ही ट्रक को बदल दिया जाता है।