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श्रद्धा की बात धर्म के पास है, विज्ञान के पास नहीं

3 वर्ष पहले
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महावीर वाटिका में मंगलवार को जीवन परिवर्तन प्रवचन माला में पद्मभूषण र|सुंदरसूरीश्वरजी ने चर्म चक्षु, विचार चक्षु, विवेक चक्षु एवं श्रद्धा चक्षु पर 1 घंटे तक प्रवचन दिए।

उन्होंने कहा विज्ञान चर्म, विचार एवं विवेक चक्षु पर पहुंचता है, लेकिन श्रद्धा की बात धर्म के पास है, विज्ञान के पास नहीं है। विज्ञान में बदलाव आता रहता है पर महावीर की वाणी आज भी ज्यो की त्यो है। आचार्य ने कहा जीवन में सामग्री, संयोग, दर्शन, मन एवं दृष्टि एक समान होने बावजूद किसी का जीवन उत्थान की ओर, किसी का पतन की ओर जा रहा है। आपने चर्म चक्षु को निर्णायक आंख बताया इसमें हाॅ-ना दोनों है। रावण ने सीता को देखकर जीवन खतरों में डाल दिया। किसी भी कार्य में अच्छा-बुरा का निर्णय चर्म चक्षु से होता है। विचार चक्षु के संदर्भ में कहा आंखों ने दिखाने के बाद सोचने विचारने को मजबूर किया। विचार चक्षु से निर्णय बदल सकते है। रावण को विभीषण एवं मंदोदरी ने विचार करने का मौका दिया। चर्म चक्षु में आकर्षण है, विचार चक्षु में सोच विचार है, चेतावनी है। विवेक चक्षु पर जैनाचार्य कहते है सही-गलत की पहचान विवेक चक्षु से होती है। विवेक चक्षु से सही मार्ग पर जा सकते है व गलत को छोड़ने की ताकत है। मनुष्य जीवन तो दुर्लभ है ही पर उसे समझना और भी दुर्लभ है। आपने श्रद्धा चक्षु पर कहा कि यहां कदम-कदम पर श्रद्धा होनी चाहिए। मैंने श्रद्धा चक्षु से ही दीक्षा को स्वीकारा है, मैंने आत्मा को देखा नहीं पर आत्मा का कल्याण चाहता हूं। श्रद्धा चक्षु से ही धर्म मार्ग पर पहुंचाते है। भगवान महावीर का मार्ग श्रद्धा का मार्ग है।

आचार्यश्री ने कहा बचत की सबसे बड़ी ताकत हिंदुस्तान के पास है। विपरीत परिस्थिति में बचत का सहारा मिलता है। सेविंग करना भी इनकम है। कभी संतोषी नहीं बने इससे प्रगति रूक जाती है। आपने तंबाखू उत्पाद बंद करने की भी बात रखी। कहा मात्र चेतावनी छापना पर्याप्त नहीं है असली कसौटी प्रवचन नहीं, प्रवचन से जीवन में सुधार आना चाहिए। इस अवसर पर नगर के द् विद्यांजलि इंटरनेशनल स्कूल के 250 विद्यार्थियों ने प्रवचन का लाभ लिया तथा आचार्य श्री के आशीर्वचन सुने।

महावीर वाटिका में प्रवचन सुनाते आचार्यरी एवं सुनते श्रद्धालुजन।

क्रोध त्याग के साथ संकल्प

जैनाचार्य ने क्रोध छोड़ने के लिए उपस्थितजनों से सात संकल्प की बात कहकर सात नियम दिलाएं। घर से बाहर क्रोध करके नहीं निकलेंगे, जब घर में प्रवेश करे तो क्रोध नहीं करें, भोजन क्रोध के साथ न करें, घर में क्रोध पूर्वक बात नहीं करें, धर्म स्थान पर क्रोध नहीं करें, सोने के लिए जाओ तो क्रोध नहीं करें, जो दिखाई नहीं दे रहे उन पर भी क्रोध नहीं करें। अर्थात मोबाइल पर भी क्रोध से चर्चा न करें। आचार्यश्री ने समस्त उपस्थितजनों से कहा मेरा काम साइन बोर्ड का है, आप उक्त सात नियम का पालन करें, निश्चित ही जीवन में परिवर्तन आएगा।

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