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मंडी के तौल कांटे पर दो क्विंटल उपज कम बताई, हंगामा करने के बाद किया सील
स्थानीय कृषि उपज मंडी में शुक्रवार को किसानों की उपज इलेक्ट्रानिक तौल कांटे पर कम तौलने की बात को लेकर हंगामा हुआ। इस तौल कांटे पर कम तुलाई होने की शिकायत किसान कई दिनों से कर रहे थे किंतु मंडी प्रशासन द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। शुक्रवार को इस 50 टन क्षमता वाले कांटे पर जब दो क्विंटल कम उपज बताई तो किसानों ने हंगामा किया। किसान को राशि का लालच देकर मामला रफा दफा करने की कोशिश भी की गई। शिकायत पर मंडी कर्मचारियों ने पहुंचकर मामले की पड़ताल की। इसमें गड़बड़ी होने पर कांटे को सील किया।
मंडी समिति में शुक्रवार को 50 से अधिक ट्राॅली व अन्य वाहनों में भरी उपज की नीलामी के बाद 50 टन के तौल कांटे पर तौल का काम जारी था। तभी किसान बनेसिंह दूलेसिंह नि. खंडीगारा की गेहूं से भरी ट्राॅली का वजन शिवम तौल कांटा पर तौल किया गया। जिसका वजन 77.40 क्विंटल बताया। खाली ट्राॅली का तौल करने पर 34.30 क्विंटल की पर्ची दी। इस पर किसान ने आपत्ति लेते हुए ट्राॅली का वजन 2 क्विंटल के लगभग कम आना बताया। इस पर तौल संचालक व किसानों के बीच विवाद होने लगा। विवाद को देखते हुए अनाज लाइसेंसी पुनीत ट्रेडर्स, दीपक टैडिंग कंपनी व एचआर फर्म के संचालक भी तौल कांटा संचालक के पक्ष में आकर किसान को झूठा साबित करने के प्रयास करने लगे। इस पर किसान बनेसिंह ने खाली ट्राॅली का तौल तिरुपति तौल कांटा पर करवाया। जहां ट्राॅली का वजन 36.20 क्विंटल आने पर तौल कांटा संचालक व व्यापारी बगले झांकने लगे। मामला रफा दफा करने के लिए किसान को राशि देने लगे। किंतु किसान अपनी बात पर अडिग रहा। कम तौलने की शिकायत मिलने पर मंडी कर्मचारी पहुंचे और मामले की तहकीकात कर दोनों तौल पर्ची की जांच पड़ताल कर दोपहर 12.30 बजे 50 टन क्षमता का तौल कांटा सील किया।
बाट का वजन ही कम है : तौल कांटा वेरीफिकेशन करने वाले तफजूल बोहरा का कहना मंडी मेें जो तौल कांटा लगा है उसके बाट का वजन ही कम है। 50 टन कांटे पर सही तौल के लिए समय-समय पर केलिब्रेशन करवाना पड़ता है। जब कांटे पर रखे बाट का वजन ही कम है तो सही तौल संभव नहीं है। नापतौल विभाग की लापरवाही के कारण तौल की गड़बड़ी की जाती है। नियमानुसार कांटे की क्षमता का वन थर्ड वजन के बाट रखे जाने से सही तौल होता है। परंतु कांटे पर 20 किलो के मात्र 23 बाट ही रखे पड़े मिले। कम वजन के बाट से भी सही तौल नहीं हो पाता है।
व्यापारियों से सांठ गांठ का आरोप
पीड़ित किसानों ने तौल कांटा संचालक व अनाज व्यापारियों के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया। इसके पीछे तर्क दिया कि मंडी में कम से कम 100 वाहनों का प्रतिदिन आना होता है। एक वाहन में दो क्विंटल की गड़बड़ी के मान से 200 क्विंटल उपज का बड़ा घोटला प्रतिदिन किया जा रहा है। 200 क्विंटल गेहूं व डालर चना की कीमत औसतन 5 लाख रु. प्रतिदिन के हिसाब से औसतन बीस दिन मंडी चलने पर 1 करोड़ रु. प्रतिमाह तौल में गड़बड़ी कर घोटाला कर किसानों के साथ ठगी की जाने का अंदेशा है। मामला उजागर होने के पहले भावांतर योजना में गेहूं से भरे 50 से अधिक वाहनों का तौल किया गया। जिसमें पुनीत ट्रेडर्स ने 19 ट्राॅली, दीपक ट्रैडिंग व एसआर फर्म ने खरीदा गेहूं का तौल हुआ था। तौल कांटे में गड़बड़ी आने पर अनाज व्यवसायी मंडी पहुंचे और सफाई देने लगे। जहां किसानों व व्यापारियों के बीच बहस भी हुई।
बदनावर सील। तौल में गडबडी आने पर सील किया गया तौल कांटा कक्ष।
तौल कांटा सील किया है- नापतौल कांटा प्रभारी
मंडी में नापतौल कांटा प्रभारी महेंद्रसिंह झाला का कहना है कि किसान की शिकायत पर एवं तौल पर्ची के आधार पर पंचनामा बनाकार तौल कांटा सील किया है। नापतौल विभाग को भौतिक सत्यापन के लिए पत्र भेजा है। वैकल्पिक व्यवस्था के लिए सब्जी मंडी में लगे कांटे पर वाहनों के तौल की सुविधा रहेगी।
मंडी के कांटे में आए दिन गड़बड़ी आती है- जिलाधिकारी
नाप तौल विभाग के जिला अधिकारी आनंद मोहन का कहना है कि मंडी में संचालित तौल कांटा मेकेनिकल होकर आए दिन गड़बड़ी आती रहती है। 20 दिन पहले ही इसकी जांच पड़ताल की थी। जिसमें संचालक की और से बड़ी लापरवाही सामने आई थी। रोजाना कांटे का चेक कर रजिस्टर मेंटेन करना था। जिसका भी पालन संचालक नहीं कर रहा। गुणवता को लेकर मंडी सचिव को भी इससे अवगत कराया था। मंडी से पत्र मिलने पर तौल कांटे की जांच कर भौतिक सत्यापन किया जाएगा।