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पहाड़ी के बीच बसे बाड़ी घाटी गांव में रास्ता नहीं, बीमार को चारपाई पर उठाकर डेढ़ किमी चट्टानें पार कर अस्पताल ले जाते हैं ग्रामीण

3 वर्ष पहले
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हिम्मत नहीं हारते लोग...12 किमी दूर है अस्पताल, पहाड़ी के दूसरी तरफ रखी बाइक से मरीज को अस्पताल पहुंचाते

शक्तिसिंह पवार | बदनौर

माेगर पंचायत का बाड़ी घाटी गांव पहाडिय़ों के बीच बसा है। इस गांव में आने-जाने के लिए कोई रास्ता भी नहीं है। गांव में कोई बीमार हो जाता है तो लोगों की मुसीबत बढ़ जाती है।

गांव में एंबुलेंस आने की बात तो दूर बाइक पर भी बीमार को नहीं ले जा सकते हैं, क्योंकि यहां सिर्फ पथरीले रास्ते और पगडंडियां हैं। गांव से बदनौर सीएचसी करीब 12 किमी दूर है। यहां तक पहुंचने के लिए लोगों को पहले डेढ़ किलोमीटर पहाड़ी की चट्टानों को पार करना पड़ता है। फिर बाड़िया भारडाई गांव जाकर बाइक पर बीमार को बदनौर सीएचसी ले जाते हैं। इसी कारण 20 घरों की बस्ती वाले इस गांव में कोई डॉक्टर व अन्य विभागों के अधिकारी नहीं आते हैं। गांव में कोई बीमार हो जाता है तो उसे परिवार के लोग चारपाई पर बदनौर अस्पताल जाते हैं। बुधवार को गांव की नेत्रहीन 84 वर्षीय सलीमा बीमार हो गई। परिवार के महिला व पुरुष सलीमा को चारपाई पर उठाकर चट्टानें पार करते हुए बाड़िया भारडाई गांव पहुंचे। यहां से बाइक पर वृद्धा को बदनौर अस्पताल ले गए।

बदनौर. रास्ता नहीं होने से नेत्रहीन बुजुर्ग महिला को चारपाई पर लेकर चट्टानों पर चढ़कर ऐसे अस्पताल ले जाते परिजन।

शक्तिसिंह पवार | बदनौर

माेगर पंचायत का बाड़ी घाटी गांव पहाडिय़ों के बीच बसा है। इस गांव में आने-जाने के लिए कोई रास्ता भी नहीं है। गांव में कोई बीमार हो जाता है तो लोगों की मुसीबत बढ़ जाती है।

गांव में एंबुलेंस आने की बात तो दूर बाइक पर भी बीमार को नहीं ले जा सकते हैं, क्योंकि यहां सिर्फ पथरीले रास्ते और पगडंडियां हैं। गांव से बदनौर सीएचसी करीब 12 किमी दूर है। यहां तक पहुंचने के लिए लोगों को पहले डेढ़ किलोमीटर पहाड़ी की चट्टानों को पार करना पड़ता है। फिर बाड़िया भारडाई गांव जाकर बाइक पर बीमार को बदनौर सीएचसी ले जाते हैं। इसी कारण 20 घरों की बस्ती वाले इस गांव में कोई डॉक्टर व अन्य विभागों के अधिकारी नहीं आते हैं। गांव में कोई बीमार हो जाता है तो उसे परिवार के लोग चारपाई पर बदनौर अस्पताल जाते हैं। बुधवार को गांव की नेत्रहीन 84 वर्षीय सलीमा बीमार हो गई। परिवार के महिला व पुरुष सलीमा को चारपाई पर उठाकर चट्टानें पार करते हुए बाड़िया भारडाई गांव पहुंचे। यहां से बाइक पर वृद्धा को बदनौर अस्पताल ले गए।

रास्ता नहीं होने से ग्रामीण दूसरे गांव में रखते हैं अपनी बाइक | गांव से अन्य कस्बों व शहरों में जाने के लिए लोगों को इसी तरह पहाड़ी पर चढ़कर जाना पड़ता है। पहाड़ी पार कर दूसरी तरफ बसे गांवों में जाने के लिए लोगों ने खेतों के पास कच्चे रास्ते बना रखे हैं। बाड़ी घाटी गांव से बाड़िया भारडाई गांव की दूरी डेढ़ किमी है। यहां तक पहुंचने के लिए चट्टानों को पार करने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है। इस कारण इस गांव के लोग अपने पास चार पहिया व दुपहिया वाहन नहीं रखते हैं। इस गांव के लोगों के वाहन पास के दूसरे गांव में रहते हैं।

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