बिना नक्शा और परमिशन के बन रहे मकान,परिषद को लाखाें रुपए की चपत
नगरीय निकाय क्षेत्र में नियम-कायदों को ताक पर रखकर सैकडों आवासीय एवं व्यावसायिक भवन निर्माण कार्य बिना परमिशन व नक्शा स्वीकृत कराए धड़ल्ले से हो रहा है। जिससे जहां एक तरफ नपा प्रशासन को हर साल लाखों रुपए का राजस्व का घाटा उठाना पड रहा है, वहीं दूसरी तरफ अनियोजित बसाहट के कारण कस्बे की सूरत बिगड़ने के साथ ही आमजन की परेशानियां बढ़ती जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी खुद स्थिति से वाकिफ होने के बावजूद साल में एक बार मुनादी कराकर कर्तव्य से पल्ला झाड़ लेते हैं। पिछले कई साल से ऐसा ही चल रहा है।
खुद का मकान हर व्यक्ति का सपना होता है। मकान बनाने से पहले काफी तैयारी करता है। वह प्राइवेट इंजीनियर से नक्शा भी बनवाता है। नियमानुसार नक्शे को नगर परिषद से स्वीकृत कराना अनिवार्य होता है। लेकिन पैसे बचाने के लालच में लोग बनवाए गए नक्शे को पास नहीं करवाते हैं। बिना परमिशन मनमर्जी से भवन निर्माण कराते हैं। जो लोग नक्शा पास करवाते हैं तो नक्शे के अनुसार काम नहीं करवाते हैं। स्वीकृत नक्शे के बजाय निर्माण का दायरा बढ़ाकर सड़क व आसपास की खाली जमीन पर भी मकान खड़े किए जा रहे हैं। ऐसे में नक्शा पास कराना और नहीं कराना बराबर हो जाता है।
तहसील बनने के बाद बड़ौदा कस्बे का विस्तार तेजी से हो रहा है। बीते १५ साल में कस्बा करीब ढाई किलोमीटर दायरे में बस गया है। वर्तमान में कस्बे का विस्तार श्योपुर रोड पर ऊंडाखाड़ नाले से आगे बढ़ता जा रहा है। जबकि कुहांजापुर रोड प र कृषि विज्ञान केंद्र तथा रतोदन रोड पर चंबल मुख्य नहर तक फैल गया है। सारसल्ली रोड तथा इंद्रपुरा रोड पर भी भवन निर्माण कार्य जोरों पर चल रहे हैं। कस्बे में हर साल सैकडों की संख्या में नए मकान और व्यावसायिक परिसर बन रहे हैं। मकान बनाने से पूर्व नियमानुसार नगर परिषद से अनुमति और नक्शा पास कराना जरूरी है। लेकिन कस्बे में ६५ फीसदी से भी ज्यादातर लोग भवन निर्माण से पहले नगर परिषद से परमिशन और नक्शा पास नहीं करवाते हैं। दरअसल अनुमति शुल्क जमा कराने के बाद भवन पंजीकृत हो जाता है। जिससे संपत्तिकर की वसूली होने लगती है। यही वजह है कि नक्शा पास कराने की शुल्क और संपत्तिकर को बचाने के चक्कर में ज्यादातर बिना परमिशन मनमाफिक तरीके से मकान निर्माण करा लेते हैं।
वहीं बड़ौदा कस्बे में 65 प्रतिशत भवन बिना अनुमति के बनाए जा रहे हैं। लोग नपा से नक्शा पास कराना ही जरूर नहीं समझते हैं। नपा क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी नगर परिषद के सब इंजीनियरों की है। लेकिन सब इंजीनियर इस दिशा में सक्रिय रवैया नहीं अपनाते हैं। इस वजह से हर साल नपा को लाखों रूपए का राजस्व घाटा उठाना पडता है। वहीं भवन निर्माण करा रहे लोगों का कहना है कि नगर परिषद से मकान की परमिशन आसानी से नहीं मिलती है। आवेदकों को अधिकारी -कर्मचारी कार्यालय के कई चक्कर कटवाते हैं। इसी झंझट के चलते लोग भवन बनाने से पहले अनुमति लेने से बचते हैं। यह भी शिकायत है कि बिना परमिशन भवन निर्माण के मामलों में कार्रवाई के नाम पर संबंधित कर्मचारी सुविधा शुल्क लेकर खामोश हो जाते हैं।
बड़ौदा कस्बे में बिना परमिशन बन गए सैकड़ों मकान।
परमिशन शर्तों का पालन नहीं करते जिम्मेदार
35 प्रतिशत भवन बनाने से पूर्व लोग नक्शा पास कराने की अनिवार्यता को देखते हुए नक्शा पास तो करा लेते हैं, लेकिन नगर परिषद द्वारा परमिशन के लिए लगाई गई शर्तों का पालन कराने पर जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। वहीं आमतौर पर भवन निर्माता को भी इस बात से कोई सरोकार नहीं होता है कि मकान बनाते समय कहां कितनी जगह छोडना जरूरी है, पानी का निकास कहां से करना है,छत का पानी कहां गिरना चाहिए। लोगों की कोशिश रहती है कि उनकी एक इंच भी जगह भी नहीं छूटना चाहिए और सरकारी जगह को भी अपने हिस्से में लिया जाए। इस लालच में भवनों के हिस्से सडक तक आ जाते हैं,जिससे दूसरे लोगों के लिए कई समस्याएं पैदा होती है।
परिषद को संपत्तिकर में लाखों का घाटा
नगर परिषद की परमिशन और नक्शा स्वीकृत कराए बिना मकान-दुकान बनाने का सीधा नुकसान नगर परिषद को राजस्व घाटे के रूप में उठाना पड़ता है। जब नक्शा स्वीकृत नहीं होगा,तो न तो परमिशन शुल्क मिलेगा और न ही आगे चलकर संपत्तिकर की राशि मिलेगी। इससे नगरीय निकाय को हर साल लाखों रुपए के राजस्व की चपत लग रही है।
बिना परमिशन भवन निर्माण कराने पर दे रहे नोटिस
कस्बे में बिना परमिशन भवन निर्माण के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए हमने कस्बे में मुनादी कराई है।लोगों से परमिशन लेकर स्वीकृत नक्शे के अनुसार ही भवन निर्माण कराने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही बिना नक्शा पास कराए मकान बनाने वालों को नोटिस दिए जा रहे हैं। ज्यादा सख्ती बरतने पर राजनीति होने लगती है, इसलिए कस्बे में अनियोजित बसाहट की स्थिति बनी है। संतोष शर्मा, सीएमओ, नगर परिषद बड़ौदा।