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राजस्व दफ्तर में न आरआई मिलते न पटवारी

3 वर्ष पहले
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जिला प्रशासन द्वारा किसानों की सुविधा के लिए लाखों रुपए खर्च कर ग्राम पांडोला में राजस्व कार्यालय भवन बनाया गया है। लेकिन राजस्व अफसराें की अनदेखी के चलते यह कार्यालय अक्सर बंद रहता है। राजस्व संबंधी कामकाज के लिए क्षेत्रभर से आने वाले किसानों को न आरआई मौजूद मिलते हैं और न पटवारी। जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्षेत्रीय किसानाेंं ने कलेक्टर से राजस्व दफ्तर का व्यवस्थित संचालन कराने की मांग की है।

श्योपुर- कुहांजापुर हाईवे पर स्थित ग्राम पांडोला में तालाब के पास करीब पांच साल पूर्व राजस्व कार्यालय भवन का लोकार्पण किया गया था। समारोह में प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने इससे किसानों को बेहतर सुविधाएं मिलने का दावा किया था। लेकिन कार्यालय भवन बदहाली का शिकार हो गया है। यहां कायदे से राजस्व निरीक्षक और पटवारी को उपस्थित रहकर किसानों की राजस्व संबंधी समस्याओं का निपटारा करना चाहिए। लेकिन भवन पर महीने में कभी कभार ताला खुलता है। ग्राम पांडोला में कई लोगों ने बताया कि कई बार अधिकारियों को इस बारे में अवगत करा चुका हैं। लेकिन राजस्व निरीक्षक कार्यालय पर व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं दिखा है।वर्तमान में गांवों में केसीसी के लिए नकलें लेने के साथ ही जमीनों की पैमाइश के लिए भी किसान आवेदन के लिए खसरा खतौनी की नकल आदि राजस्व अभिलेख तैयार कराने की कवायद में लगे हुए हैं।

पांडोला में राजस्व कार्यालय का नहीं हो रहा व्यवस्थित संचालन
बड़ौदा तहसील के ग्राम पांडोला में बंद पड़ा राजस्व कार्यालय कार्यालय भवन।

पटवारी को तलाशते हैं 20 गांव से आने वाले किसान
पांडोला व इस सर्किल से जुड़े 20 गांव के किसान राजस्व संबंधी काम के लिए प्रतिदिन पांडोला आते हैंं, यहां राजस्व कार्यालय बंद रहने के कारण पटवारी की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ता है। जब पटवारी नहीं मिलते तो ग्रामीणों को बड़ौदा तहसील कार्यालय जाने के सिवाए कोई रास्ता नहीं है। किसानों की पीड़ा यह है कि शासन द्वारा पांडोला में कार्यालय स्थापित होने के बाद भी राजस्व विभाग की अनेदखी से ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल पाया है।

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