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1982 के बाद से मेढ़ा नदी में नहीं आया पानी, अस्तित्व पर खतरा

3 वर्ष पहले
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कस्बे सहित सैकड़ों गांवों में पानी के लिए वरदान साबित होने वाली मीण्डा की मेंढा नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। 36 वर्ष से पानी की आवक नहीं होने से नदी सूख गई है। इसके साथ ही रास्ते में कई जगह एनीकट बना दिए जाने से नदी के बहने में रुकावट आई है। वर्ष 1982 के बाद आज तक कभी नदीं में पानी नहीं आया है। वर्ष 2001 में दो दिन तक नदी क्षेत्र से गुजरी थी। करीब 150 किलोमीटर दूरी तय करने वाली मीण्डा की एकमात्र मेढ़ा नदी के नहीं बहने से कुओं का जलस्तर गहरा गया है। वर्ष 1982 से पहले यही नदी हर साल बहती थी। नदी के बहने से नदी क्षेत्र के आस-पास के गांवों व कस्बों में पानी की कोई समस्या नहीं थी, लेकिन जलस्तर गहराने से यहां का पानी भी खारा हो चुका है। अब तो लोगों को पेयजल के लिए भी दूर-दराज भटकना पड़ रहा है।

इन क्षेत्रों से गुजरती थी मेढ़ा नदी

नीम का थाना के पास झाड़ली सुरागों के पहाड़ों में नदी का उद्गम होने के बाद वहां से सामोद, हस्तेड़ा, बाघावास, लालासर, बड़ी डूंगरी, किशनगढ़-रेनवाल, मीण्डा, देवली, शिम्भूपूरा, बावड़ी, सोलाया, बरजन, डाबसी व जाब्दीनगर होती हुई 150 किलोमीटर का सफर तय कर सांभर झील में जाकर मिलती थी।

कहां-कहां रोका है रास्ता

मेढ़ा नदी को रास्ते में ही रोक देने के लिए कहीं जगह एनीकट बना दिए हैं। हस्तेड़ा, लालासर, बड़ी डूंगरी, बावड़ी बरजन व ठिकरिया कलां सहित आधा दर्जन से अधिक जगहों पर एनीकट बने हुए हैं। इस कारण नदी थोड़ी दूर चलती है तो भी एनीकटों को पार नहीं कर पाती।

नदियों को जोड़ने का प्रयास

राज्य सरकार नदियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। सरकार को प्रस्ताव भेजकर मेढ़ा नदी काे भी यमुना नदी से जुड़वाने का प्रयास किया जाएगा। -विजयसिंह चौधरी, नांवा विधायक

हल निकालने की कोशिश

पाक्षिक बैठक में प्रस्ताव लेकर समस्या का हल निकलवाने की कोशिश की जाएगी। -कमलेश कंवर, सरपंच मींडा

मंडाभीमसिंह. मीण्डा की मेढ़ा नदी से सांभर झील को जाने वाला रास्ता।

भास्कर न्यूज | मंडाभीमसिंह

कस्बे सहित सैकड़ों गांवों में पानी के लिए वरदान साबित होने वाली मीण्डा की मेंढा नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। 36 वर्ष से पानी की आवक नहीं होने से नदी सूख गई है। इसके साथ ही रास्ते में कई जगह एनीकट बना दिए जाने से नदी के बहने में रुकावट आई है। वर्ष 1982 के बाद आज तक कभी नदीं में पानी नहीं आया है। वर्ष 2001 में दो दिन तक नदी क्षेत्र से गुजरी थी। करीब 150 किलोमीटर दूरी तय करने वाली मीण्डा की एकमात्र मेढ़ा नदी के नहीं बहने से कुओं का जलस्तर गहरा गया है। वर्ष 1982 से पहले यही नदी हर साल बहती थी। नदी के बहने से नदी क्षेत्र के आस-पास के गांवों व कस्बों में पानी की कोई समस्या नहीं थी, लेकिन जलस्तर गहराने से यहां का पानी भी खारा हो चुका है। अब तो लोगों को पेयजल के लिए भी दूर-दराज भटकना पड़ रहा है।

इन क्षेत्रों से गुजरती थी मेढ़ा नदी

नीम का थाना के पास झाड़ली सुरागों के पहाड़ों में नदी का उद्गम होने के बाद वहां से सामोद, हस्तेड़ा, बाघावास, लालासर, बड़ी डूंगरी, किशनगढ़-रेनवाल, मीण्डा, देवली, शिम्भूपूरा, बावड़ी, सोलाया, बरजन, डाबसी व जाब्दीनगर होती हुई 150 किलोमीटर का सफर तय कर सांभर झील में जाकर मिलती थी।

कहां-कहां रोका है रास्ता

मेढ़ा नदी को रास्ते में ही रोक देने के लिए कहीं जगह एनीकट बना दिए हैं। हस्तेड़ा, लालासर, बड़ी डूंगरी, बावड़ी बरजन व ठिकरिया कलां सहित आधा दर्जन से अधिक जगहों पर एनीकट बने हुए हैं। इस कारण नदी थोड़ी दूर चलती है तो भी एनीकटों को पार नहीं कर पाती।

नदियों को जोड़ने का प्रयास

राज्य सरकार नदियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। सरकार को प्रस्ताव भेजकर मेढ़ा नदी काे भी यमुना नदी से जुड़वाने का प्रयास किया जाएगा। -विजयसिंह चौधरी, नांवा विधायक

हल निकालने की कोशिश

पाक्षिक बैठक में प्रस्ताव लेकर समस्या का हल निकलवाने की कोशिश की जाएगी। -कमलेश कंवर, सरपंच मींडा

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