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रियासतकालीन पुल 112 साल पुराना, नहीं निकल पाते भारी वाहन, नए की दरकार

3 वर्ष पहले
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बागली-जटाशंकर मार्ग पर कालीसिंध नदी पर रियासतकालीन रणजीत बंद पुल निर्मित है। पुल 112 वर्ष पुराना है। जिसे रियासतकाल में सिंचाई, पेयजल और आवागमन की सुलभता के लिए बनाया गया था। वर्तमान में पुल पुराना होने से हादसे की आशंका भी बनी रहती है। पुल 8 फुट चौड़ा है इससे भारी वाहन व बड़ी यात्री बसें नहीं पाती गुजर हैं। यहां नए पुल की दरकार है।

बागली-जटाशंकर मार्ग डांगरखेड़ा, बोरी, बजरंगगढ़ सहित कांटाफोड़ क्षेत्र को जोड़ता है। साथ ही जटाशंकर महादेव मंदिर तीर्थ पर पहुंचने का भी यह एकमात्र मार्ग है। जहां पर महाशिवरात्रि मेला व यज्ञ सहित श्रावण मास सहित वर्षभर आयोजन चलते रहते है। इसलिए मार्ग पर यातायात का अतिरिक्त दबाव बना रहता है।

जटाशंकर महादेव मंदिर तीर्थ पर पहुंचने का यह एकमात्र मार्ग है

बागली। बागली में कालीसिंध नदी का रियासतकालीन पुल।

1906 में बना था पुल

पुल का निर्माण 1906 में हुआ था। तब कांग्रेस सांसद विवेक तनखा के दादाजी बागली रियासत के दीवान थे। यह पुल कम स्टॉप डेम था। जिसमें पानी रोका जाता था और सिंचाई, पेयजल व उपयोग के लिए अलग-अलग संरचना थी। लेकिन इस पुल से बागली व जिले के दूसरे क्षेत्र सीधे कांटाफोड़ से जुड़ गए थे।

गाद से नदी भी उथली हो गई है

पुल अंग्रेज शासन काल का है। काले पत्थरों से निर्मित है इसकी चौड़ाई 8 फुट है। पुल में पानी रोकने के लिए मोरियां बनी हुई हैं। 15 वर्ष पूर्व तक पानी रोका भी जाता था। लेकिन सिंचाई विभाग पानी रोकना बंद कर दिया। बारिश के पानी के साथ बह कर आई गाद से अब नदी उथली हो गई है।

सांसद ने लिखा पत्र

पुल निर्माण को लेकर क्षेत्रीय सांसद एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान ने सामाजिक कार्यकर्ता जयदीपसिंह उदावत व नप अध्यक्ष अमोल राठौर की मांग पर लोक निर्माण मंत्री रामपालसिंह को एक पत्र लिखा। जिसमें उन्होंने जटाशंकर तीर्थ पर आने वाले श्रद्धालुओं के यातायात के दबाव व अन्य ग्रामों के यातायात की सुलभता के लिए पुल निर्माण स्वीकृत करने के निर्देश की बात कही।

नए पुल के प्रयास जारी हैं

पुल निर्माण के लिए इस्टीमेट बनवाकर लोक निर्माण विभाग को भेजा जाएगा। सांसद ने पत्र लिख दिया है। पुल निर्माण की स्वीकृति के लिए प्रयास जारी है।’ अमोल राठौर, नप अध्यक्ष बागली

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