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भगवान के दर्शन से चित्त और चिंतन निर्मल होकर बदल जाता है : नरेंद्रकृष्ण

3 वर्ष पहले
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भगवान के दर्शनों का बड़ा महत्व है क्योंकि जब हम किसी भी मंदिर परिसर में पहुंचते हैं तो मन में शांति आने लगती है और भगवान के दर्शन से चित्त और चिंतन निर्मल होकर बदल जाता है। उक्त विचार खेरखेड़ी हाटपिपल्या के नरेंद्रकृष्णजी महाराज ने शनिवार को प्रकट किए। उन्होंने यह भी कहा की ईश्वर भक्ति के साथ-साथ मनुष्य को देश की सेवा के लिए भी हरदम तैयार रहना चाहिए।

नरेंद्रकृष्णजी ने कहा कि स्वच्छता एक अभियान नहीं प्रत्येक देशवासी को अपने जीवन में लाने वाली एक अनिवार्य आदत है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी यमुना माता में छलांग लगाकर कालिया सर्प से नदी को मुक्त कर स्वच्छ किया था। इसी प्रकार हमें भी अपने घर, मोहल्ले और नगर को स्वच्छ रखने में सहायता कर स्वच्छ भारत के निर्माण में सहयोग करना चाहिए।

शनिवार को कथा पांडाल में होली उत्सव मनाया गया। साथ ही गोवर्धन पर्वत का पूजन और परिक्रमा की गई। कथा के दौरान सतगुरु जोत से जोत जलाओ, ललना की सुनकर आई यशोदा मैया दे दो बधाई, मीठे रस से भरी राधा रानी लागे व गोपाला मेरी नौकरी पक्की करा दे आदि भजनों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य किया। प्रसादी का वितरण कैलाश यादव की ओर से हुआ। हरजीत ग्रेवाल, नप उपाध्यक्ष लक्ष्मी ग्रेवाल, ठाकुर तंवर, रेखा कारपेंटर का सहयोग रहा।

बागली। कथा के दौरान उपस्थित महिलाओं को नरेंद्रकृष्णजी महाराज ने भगवान के दर्शन का महत्व विस्तार से समझाया।

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