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एचएसआईआईडीसी ने पत्र लिखकर एमआईई के 2500 प्लॉट की कमान 2 दिन में हुडा और नगर परिषद से मांगी

3 वर्ष पहले
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आधुनिक औद्योगिक संपदा यानी एमआईई के पार्ट ए और बी 20 अप्रैल को हरियाणा राज्य औद्योगिक संरचना विकास निगम एचएसआईआईडीसी के हवाले हो जाएंगे। इसके बाद से जितनी फाइलों को हुडा विभाग ने तैयार किया होगा, उन्हें एचएसआईआईडीसी को देने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। 30 अप्रैल के बाद इन दोनों क्षेत्र के विकास कार्यों के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य भी एचएसआईआईडीसी की ओर से ही किए जाएंगे। इसे लेकर एचएसआईआईडीसी ने अपना अंतिम पत्र जारी करके हुडा विभाग को 20 अप्रैल तक हर हाल में 2500 औद्योगिक प्लाॅटों को सौंपने को कहा है, जिससे वे यहां के विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार कर सके।

गत दिनों हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और एचएसआईआईडीसी के उच्च अधिकारियों की बैठक में यह फैसला लिया गया था। अब प्राधिकरण की ओर से इस फैसले का जिक्र करते हुए एचएसआईआईडीसी के एमडी को इस बाबत अंतिम पत्र लिखकर इन दोनों क्षेत्रों को 20 अप्रैल तक टेकओवर करने की प्रक्रिया शुरू करने को समय दिया है। एमआईई के दोनों भागों में करीब 2500 औद्योगिक प्लाॅट हैं।

फैक्ट्री संचालकों में बनी उलझन और परेशानी

1. एमआई क्षेत्र में 2500 प्लॉट हैं, जिनमें से अधिकतर ने 100 फीसदी क्षेत्र को कवर किया हुआ है, जबकि एचएसआईआईडीसी के निर्माण क्षेत्र के नियम तय हैं।

2. काफी फैक्ट्री वालों के पास पहले प्लॉट अलाॅटी के नाम व कागजातों तक की जानकारी तक भी नहीं है। 1968 से बाद से एक प्लाॅट दूसरे व दूसरे से तीसरे को बिकता रहा।

3. 300 रुपए स्क्वेयर मीटर के हिसाब से टैक्स लगेगा व 12 फीसदी ब्याज भी लगेगा।

4. फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि सरकार को नई पॉलिसी तैयार करनी चाहिए, जिससे एमआई क्षेत्र में 40 साल पुरानी फैक्ट्रियों को नए सिरे से एचएसआईआईडीसी में नए नियमों के हिसाब से शामिल किया जा सके।

एमआईई के दोनों पार्ट एचएसआईआईडीसी के हवाले करने के लिए 20 अप्रैल का समय है। इसके लिए प्राधिकरण की ओर से निगम को पत्र लिख दिया गया था। एचएसआईआईडीसी की ओर से दो दिनों के बाद जल्द ही टेकओवर करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अब और समय देने की स्थिति में विभाग नहीं है। - रोहित देशवाल, स्टेट मैनेजर, एचएसआईआईडीसी, बहादुरगढ़

औद्योगिक क्षेत्र में बनी फैक्ट्रियां ।

बीसीसीआई चाहती थी प्रशासनिक कार्य हुडा के पास ही रहें

बहादुरगढ़ चैंबर आॅफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्री बीसीसीआई की ओर से ही दोनों भागों का विकास कराने के लिए एचएसआईआईडीसी को सौंपने की मांग की जा रही थी, लेकिन वे इसे हुडा विभाग से भेजने को राजी नहीं थे। उद्योगपति चाह रहे थे कि विकास कार्य व रखरखाव का कार्य एचएसआईआईडीसी को दिया जाए और प्रशासनिक कार्य हुडा को ही रहने दिए जाएं। मगर सीएम के नेतृत्व में हुई दोनों विभागों के उच्च अधिकारियों की बैठक में बीसीसीआई की इस मांग को खारिज करने के बाद अब इसे एचएसआईआईडीसी को सौंप दिया है। अब विकास कार्य, रखरखाव व प्रशासनिक समेत हर तरह के काम एचएसआईआईडीसी की ओर से ही किए जाएंगे। इससे दोनों भागों के उद्योगपतियों में खासी नाराजगी है। हुडा में प्रशासनिक कार्य आसानी से हो जाते थे और बाध्यता भी नहीं थी, लेकिन उद्योगपतियों का मानना है कि एचएसआईआईडीसी में प्रशासनिक कार्यों में दिक्कत आएगी।

उद्योगपति शुरू से ही सिर्फ विकास कार्य एचएसआईआईडीसी से करवाना चाहते थे। अगर सरकार ने प्रशासनिक कार्य भी एचएसआईआईडीसी को दिया है तो इससे नए उद्योगपतियों को भारी नुकसान हो सकता है। इस बारे में सरकार को पुरानी फैक्ट्रियों की संरचना को देखते हुए नए सिरे से स्टेट्स तैयार करेंगे।

नप व हुडा दोनों के हाथ

से बाहर होंगी फैक्ट्रियां

फिलहाल दोनों क्षेत्रों के विकास कार्यों व रखरखाव का जिम्मा नगर परिषद के पास था और प्रशासनिक कार्य हुडा की ओर से ही किए जा रहे थे। हालांकि दोनों क्षेत्रों की सड़क, सीवर व पेयजल के कार्याें का करीब 38 करोड़ का टेंडर एचएसआईआईडीसी की ओर से ही लगाया गया है। इस पर बहुत जल्द ही काम शुरू होने वाला है।

हुडा के कार्यकारी अभियंता की ओर से पत्र नप कार्यालय में आया हुआ है। अब तक नप की ओर से रखरखाव का कार्य किया जा रहा है। अब इसे भी एचएसआईआईडीसी को सौंपने के निर्देश पत्र में मिले हैं। इस बारे में अधिकारी कागजी कार्रवाई कर रहे हैं। जल्द ही सभी कागजात एचएसआईआईडीसी को सौंप दिए जाएंगे। - शीला राठी, चेयरपर्सन, नप।

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