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मालगाड़ी के 30 डिब्बों में भरी थी 1050 किलो एलपीजी, एक वॉल लीक होने पर भी रोहतक से 45 किमी तक खींच लाए

3 वर्ष पहले
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रोहतक से दिल्ली के घेवरा स्थित एचपी प्लांट जा रही मालगाड़ी के एक डिब्बे से वाॅल लीक की घटना के बाद रेलवे के इंतजामों पर सवाल खड़े हो गए। लीकेज ठीक करने में मालगाड़ी को 45 किलोमीटर तक रेल की पटरी पर दौड़ाकर बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर लाया गया। रोहतक-बहादुरगढ़ मार्ग के बीच में कहीं भी रेलवे के पास रेल को रोककर एलपीजी गैस लीकेज को बंद करने की कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं है। यदि एक के बाद दूसरा वाॅल भी लीक हो जाता तो बहादुरगढ़ जैसी भरी आबादी के क्षेत्र में मालगाड़ी को रोकने पर भारी नुकसान हो सकता था। ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचते ही वहां से यात्रियों को खाली करवा दिया गया। गनीमत यह रही कि इस दौरान यात्री गाड़ियों का समय नहीं होने के कारण ज्यादा भीड़ नहीं होती। कैंटीन भी बंद करवा दी गई। पार्क में से लोगों को हटाया गया। करीब 50 मिनट तक सुरक्षा कार्य चला। गाड़ी के एक डिब्बे में 35 हजार किलो एलपीजी गैस थी और ऐसे 30 डिब्बे थे यानी 1050 किलो एलपीजी गैस।

बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन को खाली करवा 50 मिनट में ठीक किया
बहादुरगढ़. मालगाड़ी के एक डिब्बे से लीक होती गैस।

जाम नगर से दिल्ली घेवरा जा रही एलपीजी गैस की मालगाड़ी में रोहतक के निकट डिब्बे का वाॅल लीक हो गया। दूसरा वाॅल बंद होने से पूरी गैस लीक नहीं हो पाई व बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर पहले से सुरक्षा इंतजामों के चलते उसे यहां ठीक कर दिया गया।-मंजीत सिंह, थाना प्रभारी, रेलवे पुलिस बहादुरगढ़

प्लेटफार्म नंबर दो पर नहीं पहुंच सकती फायर ब्रिगेड
फायर ब्रिगेड के वाहनों को रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर जाने के लिए लाइनपार क्षेत्र से रेलवे स्टेशन की तरफ आना पड़ता है। वहां कालोनियों की गलियों की चौड़ाई 15 से 20 फीट से अधिक नहीं होने के कारण फायर ब्रिगेड के वाहन वहां से नहीं पहुंच सकते। इसी कारण ऐसी किसी भी हालत में प्लेटफार्म नंबर एक की तरफ से फायर सेवा की पाइपों को प्लेटफार्म नंबर दो पर भेजा जा सकता है। यदि किसी हालत में प्लेटफार्म नंबर एक पर रेलगाड़ी खड़ी है तो फायर सेवा में बाधा पड़ सकती है।

गैस लीकेज को चैक करते रेलवे के अधिकारी।

स्टेशन के पास आते ही ओएचई सप्लाई रोकी
शनिवार दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर गैस लीक होने की सूचना आई। सूचना मिलने के साथ ही स्टेशन स्टाफ में हड़कंप मच गया। आनन फानन में आसपास के सभी स्टेशनों में सूचना भेजी गई व रेलगाड़ियों को बहादुरगढ़ ट्रैक पर भेजने से रोका गया। इस बीच ओएचई की सप्लाई काे रोकने के लिए रेल कर्मचारी प्रमोद ने मोर्चा संभाल लिया व जैसे ही मालगाड़ी बहादुरगढ़ स्टेशन के निकट पहुंची तो ओएचई की सप्लाई को बंद कर दिया, जिससे मालगाड़ी धीरे-धीरे प्लेटफार्म तक पहुंच जाए। एक तरफ जहां रेल अधिकारी रेल को रोकने की तैयारी में थे, वहीं घेवरा से इंडियन आयल कारपोरेशन के अधिकारियों की टीम बहादुरगढ़ पहुंच गई। दूसरी तरफ रेलवे पुलिस थाना प्रभारी मंजीत व उसकी टीम ने प्लेटफार्म को खाली करवा दिया। वहीं महाबीर, राजेश उर्मिला, यशवीर व दयासिंह ने प्लेटफार्म नंबर एक व दो के साथ रेल पटरी के पास पार्क में से लोगों को हटाया। इसके बाद इंजीनियरों ने दोपहर 3.10 मिनट तक इस वॉल को ठीक कर दिया व रेल को घेवरा भेज दिया गया। यहां एचपी गैस प्लांट में सबसे पहले इसी डिब्बे नंबर 420898 को खाली किया गया।

दो वॉल होते हैं डिब्बे में, दूसरा ठीक होने पर लीकेज हुई कम: इंडियन आयल कारपोरेशन के इंजीनियर ब्रिजेश चौधरी ने बताया कि गैस के डिब्बे में दो वाॅल होते हैं। एक वाॅल लीक होने के बाद भी दूसरे वाॅल के कारण गैस को बाहर जाने से बचाया जा सकता है। इसी कारण गैस पूरी स्पीड से बाहर नहीं आ पाई। वैसे भी इस गैस से अचानक ब्लास्ट होने की भी कोई संभावना नहीं होती। इस गैस को प्लांट में पहुंचाने के बाद उसे कई कैटगरी में बदलने के बाद ही वह एलपीजी गैस सिलेंडर में भरी जाती है।

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