सर्व शिक्षा अभियान के तहत ब्लाॅक भरतपुर में 78 टाॅयलेट मरम्मत कराने और बच्चों को यूनिफार्म बांटने के मामले की रायपुर से अाई 4 टीमों ने जांच की थी। जांच में गड़बड़ी मिलने की बात टीम के सदस्यों ने कही थी। विभागीय जानकारों का कहना है कि भरतपुर की तरह ही जिले के पांचो ब्लॉक में सेम योजना लागू थी। ऐसे में सभी 412 स्कूलों में टाॅयलेट और यूनिफार्म िवतरण की जांच की जाए। इन योजनाओं में 25 प्रतिशत ही राशि खर्च की गई है। जबकि 75 प्रतिशत राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। फिलहाल ऐसा कहा जा रहा है कि अब जिले के सभी स्कूलों की जांच हो सकती है।
बता दें कि टाॅयलेट मरम्मती करण के लिए प्रधान पाठकों के खाते में शासन ने 20-20 हजार रुपए ट्रांसफर किए थे, लेकिन इस राशि पर डीएमसी ने पैनी नजर लगा रखी थी। बैंक अधिकारियों से सांठगांठ कर प्रधान पाठकों के साथ मिली भगत कर उनके खाते से राशि निकाल लिया गया था। विभागीय जानकारों के अनुसार टाॅयलेट और यूनिफार्म वितरण के लिए दी गई राशि में करीब 50 लाख का घोटाला किया गया था। इस संबंध में कुछ प्रधान पाठकों ने शिकायत की थी। इससे संबंधित खबर को दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इन दोनों प्रकरण की जांच दो माह पहले हुई थी। इसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। इसको लेकर शिक्षकों का कहना है कि भ्रष्टाचारियों ने ऊपर भी साठ-गाठ कर ली है।
टाॅयलेट मरम्मती करण के लिए प्रधान पाठकों के खाते में भेजे गए थे 20-20 हजार
2015-16 में सर्वशिक्षा अभियान के तहत कागजों में हुआ था मरम्मत का काम।
जांच में देरी होने से डैमेज कंट्रोल का मिला अवसर
ब्लाॅक भरतपुर एबीओ सुरेंद्र पैंकरा ने बताया कि ब्लाक के 78 स्कूलों में टाॅयलेट मरम्मत कराना था। इसके लिए राशि जारी की गई थी। जांच टीम देर से आई जिससे डीएमसी को डैमेज कंट्रोल करने का मौका मिल गया। हालांकि इसके बाद भी बहुत से स्कूलों में टाॅयलेट की हालत खराब है। एबीओ ने बताया कि जांच टीम टाॅयलेट मरम्मत अौर यूनिफार्म वितरण की जांच करने मार्च में आई थी।
इन विद्यालयों के प्रधान पाठकों ने की थी शिकायत
प्राथमिक शाला उदकी से 20500, बेला से 21000, बरछा से 22000 बैंक से निकाला गया। उदकी में 7600 और बैला में 13500 रुपए उपयोग की गई है। पैकरा ने बताया कि बरछा में राशि उपयोग ही नहीं की गई। बाकी में खानापूर्ति ही की गई। रायपुर उप संचालक जेपी रथ ने बताया कि जांच के लिए चार टीमें पहंुची थी। तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट व प्रधान पाठकों के बयान लिए गए। आगे की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है।
जांच रिपोर्ट आलाधिकारियों के टेबल पर, दोषियों पर अब तक नहीं हुई कार्रवाई
जांच अधिकारियों ने माना कि भरतपुर में टाॅयलेट मरम्मत और बच्चों के यूनिफार्म वितरण में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है यह बात जांच में साफ हो गई है। एक सवाल के जवाब में जेपी रथ ने बताया कि भरतपुर ब्लॉक में 25 फीसदी ही काम हुआ है। मतलब 75 फीसदी घोटाले की बात सामने आई रही है। बता दंे कि स्कूलों में टाॅयलेट मरम्मत में गड़बड़ी का मामला तब सामने आया था, जब तात्कालिक डीईओ कामायनी कश्यप और डीएमसी अशोक सिन्हा के बीच टेंशन चल रहा था। तब मामले की जांच करने भरतपुर ब्लॉक के एबीओ सुरेंद्र पैकरा को दर्जन भर स्कूलों के जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जांच मंे सभी आरोप सही पाए गए थे। जांच प्रतिवेदन के आधार पर उस वक्त थाने में डीएमसी अशोक सिन्हा के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। इसके करीब डेढ़ साल बाद रायपुर से जांच टीम मामले की जांच करने पहंुची थी। गौरतलब है कि टाॅयलेट मरम्मत घोटाला भरतपुर ब्लाॅक से उजागर हुआ था लेकिन गड़बड़ी जिले में पाचांे ब्लाॅक में की गई है। इसलिए जांच भी सभी 412 स्कूलों की होनी चाहिए, लेकिन स्कूलों में जांच किए दो महीना से अिधक हो गया है। जांच रिपोर्ट आलाधिकारियों को सौंप दी थी। उनकी तरफ से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।