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सफर में घटना होने पर ट्रेन में ही रिपोर्ट दर्ज करा सकेंगे यात्री

3 वर्ष पहले
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अपराधियों की धरपकड़ में तेजी लाने अब रेल सुरक्षा बल चलती ट्रेन में ही एफआईआर की सुविधा यात्रियों के लिए शुरू करने जा रही है। ट्रेनों में सफर के दौरान होने वाले चोरी व अन्य घटनाओं की शिकायत यात्री ट्रेन में ही दर्ज करा सकेंगे। एफआईआर की एक कॉपी तुरंत यात्रियों को दी जाएगी।

कोरिया जिले में कहीं भी आपराधिक घटना होने पर पेंड्रा में रिपोर्ट दर्ज कराने जाना पड़ता है लेकिन रेलवे की इस नई सुविधा से एप के माध्यम से ही एफआईआर दर्ज हो जाएगा। रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार ट्रेनों में आपराधिक मामलों को कम करने के लिए रेल सुरक्षा बल ने पीड़ित यात्रियों को चलती ट्रेन में ही एफआईआर कराने की सुविधा और उसकी कॉपी देने का फैसला किया है। कागजी कार्रवाई पूरी कर तुरंत सुरक्षा बल छानबीन में जुटेगा, जिससे यात्रियों को राहत मिलेगी। इसके लिए रेलवे जीआरपी के साथ तालमेल बनाकर ट्रेनों में सुरक्षा के बेहतर इंतजाम करेगी। अब तक चोरी व दूसरे आपराधिक मामलों में यात्रियों को जीआरपी थाने जाकर अपनी शिकायत लिखानी पड़ती थी। वारदात के बाद एफआईआर की प्रक्रिया पूरी होनेे तक अपराधी आसानी से भाग निकलते थे।

यात्री को तत्काल मिलेगी रिपोर्ट की कॉपी

पीड़ित यात्री को स्टेशन पहुंचने व जीआरपी थाना जाने नहीं पड़ेगी जरूरत।

यात्री एफआईआर की काॅपी जरूर लें

जीआरपी में मामले की शिकायत के बाद प्रार्थी को अपने साथ हुए घटना की शिकायत काॅपी रखना अनिवार्य है। हालांकि लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होने के कारण वे इसकी मांग नहीं करते हैं और उन्हें मामले में उपभोक्ता फोरम में क्लेम करने में दिक्कत होती है। सफर के दौरान इस तरह की आपराधिक घटनाओं के बाद यात्री तुरंत रिपोर्ट नहीं करा सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में यात्रियों को इस सुविधा से राहत मिलेगी। जानकारी के अनुसार अभी टीटीई कोई भी मामला होने पर एफआईआर दर्ज करके जीआरपी को सूचना दी जाती है।

इमरजेंसी के लिए 112 टोल फ्री नंबर की सुविधा उपलब्ध

ट्रेनों में इमरजेंसी पर त्वरित कार्रवाई के लिए टोल फ्री नंबर की शुरु करने की तैयारी चल रही है। हेल्प लाइन नंबर 182 को भी 112 में मर्ज किया जाएगा। लोग इस नंबर के माध्यम से अपराध संबंधी शिकायत व सुझाव के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए राज्य स्तर पर भी पहल की जा रही है। इस तरह के मामलों पर पीड़ित यात्री तुरंत अपनी शिकायत कोच में मौजूद कर्मचारी से करेगा। एफआईआर दर्ज होगी, इसकी तीन कॉपियां बनाई जाएगी। एक कॉपी पीड़ित यात्री को दी जाएगी। वहीं शेष दो एफआईआर की कॉपिया आरपीएफ और जीआरपी को भेजी जाएंगी।

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