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रिकार्ड में घोषित हो चुके 11 जर्जर स्कूलों के भवन में लगाई जा रहीं क्लास, हादसे की बनी रहती आशंका
जिले में शिक्षा व्यवस्था में लगातर उन्नयन के बात की जाती रही है, लेकिन इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में 15 हायर सेकंडरी व 8 हाई स्कूल और 3 प्राथमिक शालाएं आज भी भवन विहीन हैं। बिना भवन के इन स्कूलों का संचालन किस प्रकार किया जाता होगा इसका आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है।
जिले में बैकुण्ठपुर, खडगवां, मनेन्द्रगढ़, सोनहत व भरतपुर मिलाकर कुल 68 हायर सेकंडरी स्कूल हैं। इनमें से 15 हायर सेकंडरी स्कूल भवन विहीन हैं। वहीं 7 हायर सेकंडरी स्कूलों में आज तक विद्युत नहीं पहंुची। स्कूलों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वाॅल भी बनाई जाती है, लेकिन 68 में से 18 स्कूलों में बाउंड्री वाॅल नहीं होने से छात्रों को कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। वहीं इन 68 स्कूलों में से 36 स्कूल आज भी ऐसे हैं, जहां रैंप नहीं हैं, जिससे दिव्यांग छात्रों को होने वाली परेशानी का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।
18 स्कूलों में बाउंड्री वाॅल नहीं होने से छात्रों में रहती असुरक्षा की भावना
विद्यालय के भवन के बाहर बाउंड्रीवाॅल नहीं बने होने से परिसर में घुसे मवेशी और फैली गंदगी।
13 स्कूलों में नहीं बनवाई गई है बाउंड्रीवाॅल, परिसर में गंदगी फैलाते हैं मवेशी
कोरिया जिले में कुल 69 शासकीय हाईस्कूल संचालित हैं जिनमें से 6 स्कूल भवन विहीन है वहीं 13 स्कूलों में आज तक लाइट नहीं लग पाई। इसी प्रकार इन 69 स्कूलों में से 13 स्कूलों में बाउंड्री वाॅल नहीं होने से मवेशी खेल मैदान में घूमते रहते हैं। जिससे छात्रों को हमेशा भय बना रहता है। इस बारे में कई बार छात्रों व अभिभावकों ने जिले के अफसरों को अवगत कराया लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। हाई स्कूल सरडी, हाई स्कूल चनवारीडांड, हाई स्कूल झगराखांड, हाई स्कूल बडगांवखुर्द, हाई स्कूल बदनपुर, हाई स्कूल तोलगा, हाई स्कूल महाई, हाई स्कूल बरकेला।
इन स्कूलों में हैं यह हालात
जिले के पांचों विकासखंडों में 956 प्राथमिक शालाएं संचालित हैं। इनमें से 3 स्कूल भवन विहीन है जबकि 11 स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हैं। वहीं 956 स्कूलों में से 327 स्कूलों में बिजली नहीं है। इसके अलावा 53 स्कूलों में रैम्प नहीं हैं। सबकुछ जानते हुए भी जर्जर भवन में प्राथमिक शालाओं में क्लास लगाई जा रही हैं। इससे इन कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों की जानमाल का खतरा बना रहता है। उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भखार, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डुमरिया, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आंजो खुर्द, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरदर, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तामडांड, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैमा, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अमका, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोड़, उमा विद्यालय जरौधा, उमा विद्यालय जिली बांध, उमा विद्यालय कछौड़, उमा विद्यालय बिहारपुर, उमा विद्यालय कुंवारपुर, उमा विद्यालय देवगढ़, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कर्मजी।