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कलेक्टोरेट के पास ही चल रहे अवैध ईंट भट्‌ठे, िफर भी जिले के अफसर अनजान

3 वर्ष पहले
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जिला मुख्यालय में 10 किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत फूलपुर सहित छिंदडांड स्थित कलेक्टोरेट एक से डेढ़ किमी. के दायरे में नेशनल हाईवे किनारे बिना अनुमति के अवैर्ध ईंट बनाने के काम किया जा रहा है। इससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि राजस्व की भी हानि हो रही है। या यूं कहे कि अवैध ईंट भट्ठे के संचालन की कमाई सीधे अधिकारियों की जेब में जा रही है। जबकि हर दिन इसी सड़क से जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी व संबंधित के विभागीय अधिकारी आना जाना करते है।

बैकुंठपुर-नागपुर नेशनल हाईवे में जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी पर सड़क किनारे बड़े पैमाने पर ईंट भट्ठे का संचालन किया जा रहा है। यहां लगे सैकड़ों हरे भरे पेेड़ों के चारों ओर से ईंट बनाने पेड़ के चारों ओर से मिट्टी की खोदाई कर पेड़ों को सुखाया जा रहा है। बाद में ईंट पकाने, इन्हीं पेड़ों को जलाने के उपयोग में भी लिया जाता है। जिससे जंगल खत्म हो रहा है। गौरतलब है कि एक ओर वैध ईंट भट्ठा लगाने पर्यावरण विभाग से एनओसी लेने का प्रावधान है दूसरी और अवैध ईंट भटठे के संचालन में किसी प्रकार की अनुमति लिए बिना नियमों को ताक पर रखकर जंगल को खत्म किया जा रहा है

अफसरों का तर्क है कि ग्रामीण अपने उपयोग के लिए ईंटें बना रहे हैं

कलेक्टोरेट के आसपास ही हरे पेड़ों को काटकर उसकी लकड़ी से ईंटों को पकाया जा रहा है।

अवैध ईंट भट्ठों से पर्यावरण को लगातार नुकसान हो रहा है, फिर भी ध्यान नहीं

कलेक्टोरेट के आसपास ही आधा दर्जन अवैध ईंट भट्ठे संचालित हंै। इसी रास्ते से जिला अधिकारियों का आवागमन होता है और जिला प्रशासन के द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है। एक ओर पर्यावरण को बचाने के लिए पौधारोपण किया जाता है दूसरी ओर हरे-भरे पौधों के चारों ओर से मिट्टी निकाल कर ईंट बनाया जा रहा है। यह खेल एक दशक से इसी तरह चल रहा है। खनिज विभाग और पर्यावरण विभाग खमोश है। अधिकारी इस बात का हवाला देकर कार्रवाई नहीं करते है कि ग्रामीण अपने उपयोग के लिए ईंट बनाते है। जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में अपना स्वयं का घर बनाने के लिए ग्रामीण ईंट बना सकते हैं इसके लिए उन्हें छूट दी गई है लेकिन व्यवसाय करने की अनुमति नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में अपना घर बनाने के नाम पर भूमि से लगातार मिट्टी की खुदाई कर साल भर ईंट निर्माण करते हैं। इसके साथ ही ईंटों को पकाने के लिए जंगल के हरे-भरे पेड़ों को बड़ी ही होशियारी के साथ सुखाकर ईंट भट्ठों में ईंट पकाने के काम में उपयोग कर लेते हैं। इससे ईंट बनाने वालों की तो मोटी कमाई हो जाती है, लेकिन पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन इसके बाद भी खनिज विभाग और राजस्व विभाग के जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। कई वर्षों से अवैध भट्‌ठों पर कार्रवाई नहीं हुई।

अभियान चलाकर करेंगे कार्रवाई

कलेक्टर नरेंद्र दुग्गा ने अवैध ईंट बनाने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही परिणाम सामने दिखाई देने लगेगा। ईंट पकाने हरे-भरें पेड़ो को सुखाना तो गंभीर अपराध है।

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