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गांव के सरकारी स्कूलों के हाल बेहाल, शिक्षक आते नहीं, मूलभूत सुविधाओं से भी ग्रामीण वंचित

3 वर्ष पहले
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जिले में बैठे आलाधिकारियों की अनदेखी के चलते सुदूर वनांचल क्षेत्रों में संचालित सरकारी स्कूलों का बुरा हाल है। पहुंच विहीन क्षेत्रों में स्थित ऐसे स्कूलों में न तो बैठने की व्यवस्था है, न तो शिक्षक समय पर आते हैं। इतना कुछ होता तो भी ठीक था लेकिन जिन उद्देश्यों को लेकर ग्रामीण अंचलों के आदिवासी मजदूर किसान अपने बच्चों को स्कूलों में भेजते हैं जब वे ही पूरा नहीं हो रहा तो व्यवस्था पर सवालिया निशान लगना लाजमी है। यहां तक पहुंचने के लिए न तो सड़क की व्यवस्था है। पुल पुलियों के न बनने के कारण बरसात में यहां के लोगों का विकासखंड मुख्यालय से संपर्क कट जाता है। जिले के आलाधिकारी विकास के तमाम दावे करते हैं जिनकी हकीकत इन गांवों में आकर देखी जा सकती है।

जिला मुख्यालय से लगभग 190 किमी दूर ग्राम पंचायत बड़वाही जो भरतपुर विकासखंड से लगभग 40 किमी दूर है। यहां के लोग आज भी आदम जमाने में जीवन यापन करने के लिए विवश हैं। यहां शिक्षा दीक्षा के लिए शासकीय स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। लेकिन उसमें जिस प्रकार अव्यवस्था हावी है उससे यहां पढ़ने आने वाले बच्चों का भविष्य सुरक्षित नजर नहीं आ रहा है।

हर बरसात में बदल जाते हैं रास्ते, मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं ग्रामीण, फिर भी सुनवाई नहीं

गांव में आवाजाही के लिए नहीं हैं सड़कें, बारिश में बंद हो जाते हैं रास्ते।

गांव तक पहुंचने के लिए सड़क भी नहीं, इसलिए अफसर कभी निरीक्षण करने ही यहां नहीं अाते

इस स्कूल का कभी अधिकारियों द्वारा न तो निरीक्षण किया जाता है और न ही स्थानीय स्तर के अधिकारी इस बात में कोई रुचि रखते हैं कि स्कूलों में बच्चों को किस प्रकार की जानकारी दी जा रही है। स्कूल में अव्यवस्था का यह आलम लंबे समय से बना हुआ है। वैसे अधिकारी यहां जांच करने के लिये नहीं आते तो इसमें उनका कोई कसूर नहीं। क्योंकि विकासखंड मुख्यालय भरतपुर से ४० किमी दूर इस दुर्गम वन क्षेत्र में किसी के आने जाने से कोई फर्क भी नहीं पड़ता। क्योंकि न तो यहां आवागमन के लिए कोई सड़क है और न ही कोई पगडंडी। हर बरसात में और फसल कटने के बाद रास्ता बदल जाता है। ऐसे में अधिकारियों की भी कोई गलती नहीं क्योंकि वे घंटों भटकने के बाद भी इस गांव में नहीं पहुंच सकते। इसी का फायदा स्कूलों के शिक्षक उठाते हैंद्ध वे अपनी मर्जी से स्कूल आते हैं और जब मन करता है वहां से चले जाते हैं।

मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होते हैं ग्रामीण।

जिले के जनप्रतिनिधि भी गांव के विकास को लेकर उदासीन, कभी नहीं उठाते मांग

विकासखंड मुख्यालय से बड़वाही जाने वाले रास्ते में कई नदी नाले पड़ते हैं। जिनमें पुल पुलिया बनाए जाने की मांग क्षेत्र के लोग कई वर्षों से कर रहे हैं। लेकिन न उनकी अधिकारी सुनते हैं और न कोई जनप्रतिनिधि। यहां के ग्रामीणों ने कई बार सड़क निर्माण की मांग की, लेकिन जिला मुख्यालय से १९० किमी दूर इन आदिवासी वनवासी ग्रामीणों की आवाज जिले के आलाधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती। जिससे आज भी इस गांव के लोग भारी अव्यवस्थाओं के बीच जीवन यापन करने विवश हैं। गांव के फूलसाय सिंह ने बताया कि अगर यहां कोई बीमार पड़ जाता है तो उसके परिवार जनों के सामने बड़ी समस्या उठ खड़ी होती है। क्योंकि यहां से कोई साधन नहीं मिल पाता कि बीमार व्यक्ति को ४० किमी दूर ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया जा सके। वहीं सरकार द्वारा संचालित १०८ एंबुलेंस का भी यहां कोई फायदा नहीं है। क्योंकि यहां किसी भी कंपनी का कोई मोबाईल नहीं लगता क्योंकि यहां टॉवर पकड़ता ही नहीं। ऐसे में कई बार अस्पताल पहुंचते पहुंचते मरीज रास्ते में ही दम तोड़ चुका होता है।

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