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ज्ञान की कमी से आयुष चिकित्सक अंग्रेजी दवा लिखकर कर रहे औपचारिकता पूरी

3 वर्ष पहले
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आयुष चिकित्सा मरीजों को अंग्रेजी दवा लिख रहे हैं। दिक्कत यह भी है कि आयुष चिकित्सक अनुभव की कमी और एलॉपैथिक पद्धति का पूरा ज्ञान नहीं होने के कारण गिनती के कुछ अंग्रेजी दवाईयां लिख इलाज की औपचारिकता ही पूरी करते हैं। सौर बाजार पीएचसी मात्र दो आयुष चिकित्सक के भरोसे चल रहा है।

30 बेड के प्रखंड स्तरीय बड़े अस्पताल में 6 एमबीबीएस डाक्टरों का भी पद है लेकिन एक चिकित्सा प्रभारी के अलावा यहां काेई एमबीबीएस डाक्टर पदस्थापित नहीं है। करीब ढ़ाई लाख की आबादी वाले सौर बाजार प्रखंड की 17 पंचायतों के लोगों के लिए यह स्वास्थ्य केन्द्र काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लेकिन दो आयुष के भरोसे चल रहे इस अस्पताल में आने वाले मरीज का इलाज भगवान भरोसे ही चल रहा है। एमबीबीएस के 6 पद में केवल एक पीएचसी प्रभारी डा. रविन्द्र कुमार हैं जो अक्सर कार्यालय संबंधी कार्यों एवं जिले और प्रखंड में होने वाली बैठको में हीं व्यस्त रहते हैं।

सौर बाजार प्रखंड मुख्यालय स्थित पीएचसी, बाहर खड़ी खराब एम्बुलेंस।

कागज पर चल रहा रौता खेम और गम्हरिया उप स्वास्थ्य केन्द्र

प्रखंड में कागज पर संचालित दो उप स्वास्थ केन्द्र रौता खेम और गम्हरिया पंचायत में पदस्थापित आयुष चिकित्सक दोनों पंचायतों में उप स्वास्थ केन्द्र का भवन एवं अन्य सुविधा नहीं रहने के कारण सौर बाजार पीएचसी में ही रहकर लोगों को स्वास्थ संबंधी परामर्श देते हैं। दोनों आयुष चिकित्सक डा. के बी चौरसिया और मो. फिरोज अख्तर के भरोसे इन पीएचसी की व्यवस्था भी चल रही है। जबकि इन दोनों आयुष चिकित्सक का पदस्थापना जहां किया गया है अर्थात रौता खेम और गम्हरिया पंचायत में उस स्थल पर उप स्वास्थ केन्द्र है हीं नहीं, केवल कागज पर ही दोनों उप स्वास्थ्य केन्द्र चल रहा है।

सालों से खराब पड़ी है एंबुलेंस

सौर बाजार सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र में सिर्फ डाक्टरों की कमी नहीं है, बल्कि यहां दवा, पेयजल, एम्बुलेंस सहित अन्य जरूरी सुविधाओं का भी घोर अभाव है। यहां मरीजों के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। मरीजों को पीने दूसरी जगह के चापानल या फिर खरीदकर बोतलबंद पानी लाना पड़ता है। पीएचसी में एक चापाकल है जो खराब पड़ा है। एक एम्बुलेंस भी महीनों से खराब है। जरूरत पड़ने पर मरीजों को अपनी व्यवस्था से ले जाना पड़ता है। पीएचसी में जांच घर और एक्सरे की सुविधा नहीं रहने के कारण मरीजों को बाहर से जांच और एक्सरे करवाना पड़ता है।

डॉक्टर की कमी को लेकर कई बार लिखा गया है

वरीय पदाधिकारी से डाॅक्टर की कमी के संबंध में कई बार लिखा गया है। इसके बाद दो डाॅक्टर एक सप्ताह पूर्व योगदान लिया था लेकिन यहां के मरीजों का व्यवहार एवं अन्य सुविधा नहीं रहने के कारण वे भी यहां से अपना तबादला करवा लिए हैं। फिलहाल दो आयुष चिकित्सक की मदद से काम चल रहा है। डाॅ. रविन्द्र कुमार, पीएचसी प्रभारी

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