कथा सुनने उमड़ी भक्तों की भीड़
अगर हम देव शास्त्र गुरु का सहारा ले लें तो फिर हमें दुनिया में किसी के सहारे की आवश्यकता नहीं पड़ती। हमें हमेशा देवगुरु और स्वास्थ्य के आगे नतमस्तक होना चाहिए। मनुष्य को अगर आगे बढ़ना है तो सोच को छोटा नहीं बल्कि बड़ा रखना पड़ेगा। भागवत कथा शाम 4 बजे से रात्रि 10 बजे तक होती है। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग सपरिवार पहुंच रहे हैं।
बकस्वाहा। धरमपुरा में चल रही श्रीमद भागवत कथा।