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माउंटआबू ईको टूरिज्म सर्किट में शामिल, पर्यटकों को मिलेगी सुविधाएं

3 वर्ष पहले
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कृष्णा, बालाजी और हेरिटेज टूरिस्ट सर्किट के बाद प्रदेश में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ईको टूरिज्म यानी नेचर टूरिस्ट सर्किट विकसित किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू समेत सरिस्का, कुंभलगढ़ और झालाना वन्यजीव क्षेत्र में पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएगी। वन और पर्यटन विभाग की ओर से 99 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय को भिजवा दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इस प्रोजेक्ट को केंद्र से ग्रीन सिग्नल मिल जाएगा। इसके तुरंत बाद कार्य भी शुरू करा दिए जाएंगे।

केंद्र सरकार की ओर से 99 करोड़ का बजट स्वीकृत होने की स्थिति में सरिस्का, कुंभलगढ़, माउंट आबू और झालाना वन्यजीव क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके तहत पानी की व्यवस्था, शौचालय, पार्किंग की व्यवस्था, साइनेजेज, ट्रेनिंग के लिए सेंटर, प्रवेश द्वार पर बैठने के लिए बेंच, कुर्सियां, लाइटिंग सहित अन्य व्यवस्थाएं की जाएगी, जिससे आने वाले पर्यटकों को मूलभूत सुविधाएं सुविधाएं दी जा सके। राज्य सरकार की ओर से इसका प्रस्ताव भेजा जा चुका है। केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद उक्त वन्यजीव क्षेत्रों में कार्य शुरू हो जाएगा। प्रदेश में पर्यटन को और अधिक बढ़ाया जा सके। इसको ध्यान में रखकर यह कदम उठाया जा रहा है। खास यह है कि 100 फीसदी फंडिंग केंद्र की ओर से किया जाना है। इसमें राज्य की भागीदारी नहीं है। इससे पहले केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने राज्य के लिए कृष्णा टूरिस्ट सर्किट, बालाजी टूरिस्ट सर्किट और हेरिटेज टूरिस्ट सर्किट के तहत विभिन्न शहरों में सुविधाएं विकसित करने का कार्य पहले से ही किया जा रहा है। ये तीनों ही प्रोजेक्ट केंद्र की ओर से स्वीकृत किए गए है। ऐसे में चौथे प्रोजेक्ट जल्द ही स्वीकृत होने की संभावना जताई जा रही है।

एनीकट से वर्षभर झरना चलता है, सघन वनक्षेत्र में हैं वनस्पतियां

सघन वन क्षेत्र होने के साथ ही यहां बने एनीकट में वर्षभर पानी रहता है और झरना चलता है। ऐसे में हर सीजन में पर्यटकों को यहां रोमांच मिलेगा। सघन वनक्षेत्र में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां और वन्यजीव हैं। यहां कुछ व्यू पॉइंट्स भी हैं। प्रोसेस सेंटर में एलोवेरा जूस, शैंपू, आंवला जूस, अगरबत्ती, सीताफल, पल्प सहित अन्य वन उपज की उत्पाद बनाए जाएंगे। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए प्रोसेस सेंटर में बनाए जाने वाले प्राकृतिक उत्पादों को देखने का अनुभव भी नया और जानकारी वर्धक रहेगा।

इधर, उदयपुर-आबूरोड रोड पर घाटा नाडी के पास ईको-टूरिस्ट डेस्टिनेशन कानन कुटीर हुआ तैयार

इधर, उदयपुर से 50 किलोमीटर दूर इस मानसून में पर्यटकों के लिए घाटा नाड़ी स्थित कानन कुटीर एडवेंचर टूरिज्म के तहत खास आकर्षण होगा। आबूरोड जाने वाले पर्यटक यहां रुककर न सिर्फ सघन वनक्षेत्र में ट्रैकिंग का आनंद ले सकेंगे, बल्कि यहां नवनिर्मित रेस्ट हाउस और टैंट लगाकर कैंप भी कर सकेंगे। वन विभाग के उत्तर मंडल ने इस ईको-एडवेंचर टूरिज्म साइट को मानसून से पहले पूरी तरह विकसित कर दिया है। डीएफओ ओपी शर्मा ने बताया कि उदयपुर-आबूरोड पर उदयपुर से 50 किलोमीटर दूर झाड़ोली से आगे घाटा नाड़ी में रेस्ट हाउस और प्रोसेस सेंटर का निर्माण किया गया है। अगले सप्ताह इस रेस्ट हाउस और कैंपिंग साइट का उद्घाटन करवाया जाएगा। टूर ऑपरेटर से भी संपर्क किया है। ऐसे में अब यहां पर्यटक रेस्ट हाउस में रुक सकेंगे और चाहें तो टूर ऑपरेटर से प्रतिदिन 200 रुपए के अनुसार टैंट किराए पर भी ले सकेंगे।

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