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अधिक मास में बालाजी के महंत रोज कर रहे बालिकाओं को दान

3 वर्ष पहले
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मेहंदीपुर बालाजी। श्री बालाजी महाराज घाटा मेंहदीपुर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत श्री किशोरपुरी जी महाराज ने पुरूषोस्टम मास को पूरी तरह परोपकार के लिए समर्पित कर दिया है। महंत महाराज ने पूरे अधिक मास में प्रतिदिन जरूरतमंद बालिकाओं को दान - पुर्‍य देकर देवी स्वरूप पूजा करने का निर्णय लिया है। रविवार को महंत निवास में सैकड़ों बालिकाओं को वस्त्र, प्रसादी व नकद दक्षिणा दी। इस दौरान अनेकों बालिकाओं की देवी स्वरूपमान कर पूजा की व आशीर्वाद लिया। मंदिर ट्रस्ट द्वारा अनेकों धार्मिक अनुष्ठान मलमास के शुरू होते ही चालू हो गए थे। वहीं बालाजी मंदिर के समीप व अखण्ड हनुमंत यज्ञ शाला पर मोदक की प्रसादी प्रतिदिन श्रद्धालुओं में निरंतर वितरण की जा रही है। वहीं मीठे जल की प्याऊ पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। अधिक मास पर प्रकाश डालते हुए महंत श्री किशोरपुरी जी महाराज ने कहा कि पुरूषोत्तम मास में दान - पुन्य व धार्मिक अनुष्ठान करने से मनुष्य के कुण्डली दोषों का भी निराकरण होता है। महंत महाराज ने कहा कि इस मास को अधिक मास व मल मास के नाम से भी जाना जाता है।

हन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में अधिकमास के दौरान सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि इस मास के अतिरिक्त होने के कारण यह मास मलिन होता है। ऐसे में इसे मल मास भी कहा जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में आधिकतर लोग इसे मल मास के नाम से ही जानते हैं। इस मास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृहप्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी आदि आमतौर पर नहीं किए जाते हैं। मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मल मास पड़ गया है।

धर्म कर्म से पुरूष को उत्तम बनाता है अधिक मास

अधिकमास को पुरूषोत्तम मास कहे जाने का अर्थ यह भी माना जाता है कि यह मास हर व्यक्ति विशेष के लिए तन-मन से पवित्र होने का समय होता है। इस दौरानश्रद्धालु जन व्रत, उपवास, ध्यान, योग और भजन- कीर्तन- मनन में संलग्न रहते हैं और अपने आपको भगवान के प्रति समर्पित कर देते हैं। इस तरह यह समय सामान्य पुरूष से उत्तम बनने का होता है।

अधिकमास में ये काम हैं फलदायी

महंत श्री किशोरपुरी जी महाराज ने बताया कि आमतौर पर अधिकमास में हिंदू श्रद्धालु व्रत- उपवास, पूजा- पाठ, ध्यान, भजन, कीर्तन, मनन को अपनी जीवनचर्या बनाते हैं। पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ- हवन के अलावा श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है। अधिकमास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं। इसीलिए इस पूरे समय में विष्णु मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को भगवान विष्णु स्वयं आशीर्वाद देते हैं।

मेहंदीपुर बालाजी. बालिकाओं को वस्त्र दान करते महंत किशोर पुरी महाराज।

मेहंदीपुर बालाजी। श्री बालाजी महाराज घाटा मेंहदीपुर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत श्री किशोरपुरी जी महाराज ने पुरूषोस्टम मास को पूरी तरह परोपकार के लिए समर्पित कर दिया है। महंत महाराज ने पूरे अधिक मास में प्रतिदिन जरूरतमंद बालिकाओं को दान - पुर्‍य देकर देवी स्वरूप पूजा करने का निर्णय लिया है। रविवार को महंत निवास में सैकड़ों बालिकाओं को वस्त्र, प्रसादी व नकद दक्षिणा दी। इस दौरान अनेकों बालिकाओं की देवी स्वरूपमान कर पूजा की व आशीर्वाद लिया। मंदिर ट्रस्ट द्वारा अनेकों धार्मिक अनुष्ठान मलमास के शुरू होते ही चालू हो गए थे। वहीं बालाजी मंदिर के समीप व अखण्ड हनुमंत यज्ञ शाला पर मोदक की प्रसादी प्रतिदिन श्रद्धालुओं में निरंतर वितरण की जा रही है। वहीं मीठे जल की प्याऊ पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। अधिक मास पर प्रकाश डालते हुए महंत श्री किशोरपुरी जी महाराज ने कहा कि पुरूषोत्तम मास में दान - पुन्य व धार्मिक अनुष्ठान करने से मनुष्य के कुण्डली दोषों का भी निराकरण होता है। महंत महाराज ने कहा कि इस मास को अधिक मास व मल मास के नाम से भी जाना जाता है।

हन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में अधिकमास के दौरान सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि इस मास के अतिरिक्त होने के कारण यह मास मलिन होता है। ऐसे में इसे मल मास भी कहा जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में आधिकतर लोग इसे मल मास के नाम से ही जानते हैं। इस मास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृहप्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी आदि आमतौर पर नहीं किए जाते हैं। मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मल मास पड़ गया है।

धर्म कर्म से पुरूष को उत्तम बनाता है अधिक मास

अधिकमास को पुरूषोत्तम मास कहे जाने का अर्थ यह भी माना जाता है कि यह मास हर व्यक्ति विशेष के लिए तन-मन से पवित्र होने का समय होता है। इस दौरानश्रद्धालु जन व्रत, उपवास, ध्यान, योग और भजन- कीर्तन- मनन में संलग्न रहते हैं और अपने आपको भगवान के प्रति समर्पित कर देते हैं। इस तरह यह समय सामान्य पुरूष से उत्तम बनने का होता है।

अधिकमास में ये काम हैं फलदायी

महंत श्री किशोरपुरी जी महाराज ने बताया कि आमतौर पर अधिकमास में हिंदू श्रद्धालु व्रत- उपवास, पूजा- पाठ, ध्यान, भजन, कीर्तन, मनन को अपनी जीवनचर्या बनाते हैं। पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ- हवन के अलावा श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है। अधिकमास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं। इसीलिए इस पूरे समय में विष्णु मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को भगवान विष्णु स्वयं आशीर्वाद देते हैं।

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