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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी रैबिज वैक्सिन नहीं

3 वर्ष पहले
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सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में एंटी रैबिज वैक्सिन नहीं होने से मरीजों को धमतरी या बालोद जाना पड़ता है। 13 मार्च को गांव खर्रा के 10 साल के बच्चे बसंत कुमार को एक पालतु कुत्ते ने काट दिया। जिसके बाद परिजन बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे। लेकिन गुरुर के स्वास्थ्य केंद्र में एंटी रैबिज वैक्सिन नहीं होने से पालकों को भटकना पड़ा। इलाज के दौरान बच्चे को 4 बार अलग-अलग दिन एंटी रैबिज वैक्सिन लगाया गया। चार बार के इंजेक्शन का खर्च पालक के स्मार्ट कार्ड से हुआ। लेकिन पांचवीं बार के लिए पैसा खत्म हो जाने पर खुद से खर्च कर एंटी रैबिज का इंजेक्शन लगवाना पड़ा।

बच्चे के साथ पहुंचे परिजन ने बताया कि अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे तो बताया गया कि यहां वैक्सिन उपलब्ध नहीं है। इसके बाद परिजन ने 325 रुपए खर्च कर वैक्सिन खरीदा। तब बच्चे का इलाज हुआ। परिजन ने बताया कि कुछ समय पूर्व ग्राम खर्रा से कुत्ते के काटने का एक और मामला आया था। तब उनका इलाज नि:शुल्क हुआ था। स्मार्ट कार्ड की जरूरत ही नहीं पड़ी थी। जबकि इस बच्चे के इलाज में कभी स्मार्ट कार्ड तो वैक्सिन खरीदना पड़ रहा है। जब अस्पताल मे एंटी रैबिज का वैक्सिन शासन से उपलब्ध होता है तब बिना स्मार्ट कार्ड के मरीज का इलाज निशुल्क होता है। वैक्सिन समाप्त होने पर अस्पताल वैक्सिन खरीदती है। इस आधार पर मरीजों से स्मार्ट कार्ड में निर्धारित पैकेज के आधार पर इलाज होता है।

मांग पत्र लिखा: प्रभारी बीएमओ डाॅ. एनएल बंजारे ने बताया कि अस्पताल में 15 दिनों से एंटी रैबिज वैक्सिन नहीं है। उच्च कार्यालय को वैक्सिन के लिए पत्र लिखा गया है। एंटी स्नेकवेनम सहित अन्य दवाई अस्पताल में उपलब्ध है।

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