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दादा का था सपना, मरने से पहले पोते को दूल्हा बनता देख लूं इसलिए कर रहे थे बाल विवाह, विभाग के अफसरों ने रुकवाया
अक्षय तृतीया यानि अक्ती तिहार खासतौर से ग्रामीण क्षेत्र में उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन गुड्डे गुड़ियों की शादी रचाई जाती है। लेकिन इस खेल से भी कई लोग बाल विवाह के लिए दुष्प्रेरित हो जाते हैं। बाल विवाह एक अभिशाप है, इस सामाजिक बुराई को रोकने के लिए सरकार जागरूकता अभियान चला रही है। इसके बाद भी बाल विवाह की शिकायत सामने आ रही है। बाल विवाह का एक और मामला सोमवार को गुरूर ब्लाॅक के ग्राम पेंडरवानी में आया। जहां 17 साल छह महीने के लड़के की शादी धमतरी की 18 साल की लड़की के साथ होने वाली थी। लड़के के दादा की जिद व सपना था कि मरने से पहले अपने पोते को दूल्हा बनता देख ले। इस जिद में उन्होंने अक्षय तृतीया को ही पोते की शादी कराने की तैयारी कर ली थी। ग्रामीणों के जरिए यह खबर महिला बाल विकास विभाग तक पहुंच गई। आनन-फानन में बाल संरक्षण विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे। परिवार के लोगों से मिले। लड़की पक्ष को भी बुलाया गया। दादा को समझाया गया कि लड़के की 21 साल से कम उम्र में शादी कानूनन अपराध है। अपनी इच्छा पूरा करने के लिए पोते की जिंदगी बर्बाद ना करिए। लगभग एक घंटे की समझाइश के बाद दादा ने अपनी सोच बदली और शादी स्थगित की गई। 18 अप्रैल को बारात धमतरी जाने वाली थी। अगर विभाग को कहीं से खबर नहीं मिलती तो शायद बाल विवाह हो गया रहता।
पेंडरवानी में 17 साल 6 महीने के लड़के की शादी धमतरी की 18 साल की लड़की के साथ करने की चल रही थी तैयारी
अाज हर गांव में करेंगे आकस्मिक निरीक्षक
बाल संरक्षण अधिकारी गजानंद साहू ने कहा कि अक्षय तृतीया पर उनकी टीम अलग-अलग गांव में जाकर आकस्मिक निरीक्षण करेगी। पता लगाएगी कि कहीं नाबालिग बच्चों की शादी तो नहीं हो रही है। उनके साथ पुलिस, श्रम विभाग, पंचायत से भी अधिकारी रहेंगे। पहले तो अगर कहीं शिकायत आती है तो उन्हें समझाइश दी जाएगी। इसके बाद भी वे नहीं मानेंगे तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
विभाग ने रुकवाया 15 बाल विवाह
अप्रैल 2015 से अब तक बाल विवाह के 15 मामले सामने आए हैं। यह मामले ऐसे हैं जिनकी सूचना विभाग को मिल गई तो मौके पर जाकर शादी रुकवा दी गई। लेकिन कई मामले ऐसे भी होंगे जिनकी खबर नहीं मिल पाती और शादियां हो जाती है। इसलिए लोगों को बाल विवाह के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है। इस अक्षय तृतीया पर बाल विवाह पर पैनी नजर रहेगी।
जिले के गांवों में महिला कमांडो भी करेगी निगरानी
पद्मश्री शमशाद बेगम ने कहा कि गांव गांव में महिला कमांडो भी बाल विवाह रोकने के लिए निगरानी करेगी। जिन घरों में शादियां हो रही है वहां जाकर पूछताछ करेगी। लड़का लड़की के जन्म तिथि के प्रमाण पत्र चेक करेंगे। अगर किसी का भी निर्धारित उम्र से कम पाया जाता है तो तत्काल शादी रुकवाने के लिए पुलिस और बाल विकास विभाग को खबर करेगी। अधिकारी गजानन साहू ने कहा कि हमारा उद्देश्य कार्रवाई करना नहीं बल्कि बाल विवाह सामाजिक अभिशाप के प्रति जागरूकता लाना है।