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नहीं मिली ट्रायसिकल, चौथी बार मायूस होकर लौटा दिव्यांग

3 वर्ष पहले
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डौंडीलोहारा ब्लाॅक के ग्राम बहेराभाठा नाहंदा निवासी दिव्यांग झग्गर राम (30) अपने पड़ोसी के साथ मंगलवार को सुबह 11 बजे कलेक्टोरेट पहुंचे। दिव्यांग कक्ष में बैठकर अधिकारियों के आने का इंतजार कर रहे थे। तभी कुछ लाेगों ने कलेक्टोरेट के उपरी मंजिल स्थिति समाज कल्याण विभाग जाने को कहा।

इसके बाद दिव्यांग झग्गर रैप पर घसीटते हुए कार्यालय तक पहुंचा तो अधिकारियों ने कह दिया कि अभी ट्रायसिकल का स्टाॅक खत्म हो गया है। आने के बाद फोन कर बुलाया जाएगा। इसके बाद वे बिना ट्रायसिकल लिए चला गया।पैर से दिव्यांग झग्गर ने बताया कि बचपन से ही पोलियो हाेने के कारण चल फिर नहीं सकता। जिसके कारण समाज कल्याण विभाग से ट्रायसिकल की मांग कर रहा हूं। इससे पहले तीन बार पड़ोसियों के सहयोग से ट्रायसिकल मांगने आ चुका हूं। लेकिन हर बार कागजात में कमी बताकर वापस भेज दिया जाता है। आज सभी कागजात लेकर कलेक्टोरेट आया था। लेकिन अब विभाग वाले कह रहे है कि ट्रायसिकल खत्म हो गया है।

झग्गर ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। जिसके कारण सात किमी दूर रानीतराई (राजनांदगांव) के साबुन फैक्ट्री में काम करने जाता हू्ं। ट्रायसिकल नहीं होने के कारण वहां तक पहुंचने में दूसरों की मदद लेनी पड़ती है।

बालोद. रैप में घसीटते हुए कलेक्टर के ऊपरी मंजिल स्थित कार्यालय जाते हुए।

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