पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • सर्वे बंद, 152 हेक्टे. जमीन तो ले ली, अब 17 हेक्टेयर में क्या करें

सर्वे बंद, 152 हेक्टे. जमीन तो ले ली, अब 17 हेक्टेयर में क्या करें

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
तीन जिले की महत्वाकांक्षी व चार अरब रुपए की लागत से प्रस्तावित मोहड़ जलाशय परियोजना को लेकर अभी और देरी होगी, क्योंकि सर्वे का काम फिलहाल बंद कर दिया गया है। मंगलवार को सर्वे करने जब टीम पहुंची तब ग्रामीणों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि 152 हेक्टेयर जमीन को अधिग्रहित कर लिए हो, सिर्फ 17 हेक्टेयर जमीन बच रही है, जिसका कोई औचित्य ही नहीं है, क्योंकि प्रोजेक्ट के तहत जब नहर व नाली निर्माण होंगे, तब 17 हेक्टेयर जमीन का उपयोग न कृषि कार्य के लिए कर पाएंगे और न रहने के लिए।

यह सुनते ही दो टीम के 12 अफसर वापस आ गए और इसकी जानकारी एसडीएम एसके गुप्ता को दे दिया। बहरहाल कब से सर्वे दोबारा शुरू होगा, अफसर कुछ कहना नहीं चाह रहे है। वैसे भी देरी के चलते प्रोजेक्ट अधूरा है। विभागीय लेटलतीफी का ताजा उदाहरण परियोजना से प्रभावित दल्ली गांव है, जहां राजस्व, पीडब्ल्यूडी व सिंचाई विभाग के अफसरों को दोबारा सर्वे करने की नौबत आ गई। एसडीएम गुप्ता ने बताया फिलहाल सर्वे बंद कर दिया गया है।

पहले सर्वे में 169 परिवार का मकान आया था

बालोद. दल्ली (कुदारी) के 169 मकान व जमीन का अधिग्रहण किया जाना है।

आखिर ऐसी नौबत क्यों आई: मुआवजे के लिए पहले शौचालय को शामिल नहीं किया अब कर रहे शामिल

ऐसी नौबत इसलिए आई क्योंकि चार माह पहले जब सर्वे हुआ था, तब शासन की ओर से बनाए गए शौचालय का मूल्यांकन अफसरों ने नहीं किया था। सर्वे में शौचालय को इसलिए मुआवजा में शामिल नहीं किया, क्योंकि इस पर अफसरों का तर्क था कि शौचालय केन्द्र शासन की ओर से मिली राशि से बनाया गया है। जब शिकायत हुई, तब उच्च अफसरों ने कहा कि शौचालय को भी ग्रामीण की संपत्ति माना जाएगा। लिहाजा कलेक्टर व एसडीएम के आदेश पर दो टीम बनाकर सोमवार से अफसर सर्वे कर रहे हैं। वैसे भी 2009 से प्रस्तावित परियोजना में अब तक जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई ही अधूरी है। यूं कहे कि जब मुआवजा देने की बारी आई तो राजस्व व सिंचाई विभाग के अफसरों ने शौचालय व पेड़ को नजरअंदाज किया। जब शिकायत हुई तब सर्वे करने वाले अफसर ही कह रहे शौचालय लोगों के नाम से है, इसलिए इसे भी शामिल किया जाएगा।

एनीकट टेंडर को लेकर आज हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

17 करोड़ 39 लाख रुपए की लागत से एनीकट बनना है। इस पर वर्क आर्डर को लेकर हाईकोर्ट में 18 अप्रैल को सुनवाई तय की गई है। गौरतलब है कि मार्च में टेंडर जारी किया गया था। जिस पर एक एजेंसी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। जिस पर हाईकोर्ट ने निर्णय लिया है कि सुनवाई पूरी होने के पहले वर्क आर्डर जारी न किया जाए। सुनवाई के बाद ही कुछ हो पाएगा।

पहले सर्वे में 169 मकान आया था। जिसके प्रमुखों को मुआवजा देने कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान ग्रामीणों ने सर्वे को अनुचित बताया। दल्ली के प्रभावित पूनम देशमुख, संतराम साहू, विष्णुराम ने बताया कि दोबारा सर्वे करने अफसर कार्रवाई कर रहे है लेकिन व्यवस्थापन को लेकर कोई पहल नहीं कर रहा है।

सीधी बात

एसके गुप्ता, एसडीएम

शौचालय को भी मुआवजा में शामिल किया

दल्ली में आखिर दोबारा सर्वे करने की नौबत क्यों आई?

- पहले सर्वे किया था, तब 169 परिवार का मकान, बाड़ी वगैरह आया था, शासन की ओर से शौचालय बनाया गया है करके उसका मूल्यांकन नहीं किए थे, इसलिए दोबारा सर्वे किया जा रहा है।

शासन के नियमानुसार ही तो सर्वे किए जाते हैं फिर पहले क्यों इसका मूल्यांकन नहीं किया गया?

- शासन के सहयोग से ही शौचालय बना है लेकिन मेहनत व्यक्ति ने की है इसलिए शौचालय को मुआवजा में शामिल किया गया। पेड़ों को भी छोड़ दिए थे, जिसका सर्वे करा रहे हैं।

विभागीय देरी के चलते अब तक योजना पूरी नहीं हो पाई है?

- पहले और अब की स्थिति में काम की गति बढ़ते क्रम पर है।

खबरें और भी हैं...