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गन्ने का रकबा बढ़ा न मशीन सुधर पाई शकर कारखाना 12 करोड़ के घाटे में

3 वर्ष पहले
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भले ही प्रबंधन दावा कर रहा है कि करकाभाट कारखाना में 9वें सीजन में 68 हजार क्विंटल शकर उत्पादन के बाद घाटे से उबर जाएंगे. लेकिन ऐसा नहीं होगा। दरअसल शकर खरीदने कोई तैयार नहीं हो रहा है। जो खरीदने तैयार है, वे एक क्विंटल शकर के एवज में 2400 से 2700 रुपए देना चाह रहे हैं। इसलिए प्रबंधन इतने कम दाम में बेचना नहीं चाह रहा है।

स्थिति ऐसी है कि 48 करोड़ 50 लाख रुपए खर्च कर तैयार किए कारखाना 12 करोड़ रुपए घाटे में चल रहा है। यह आंकड़ा प्रबंधन के अनुसार है। आलम यह है कि गन्ने बेचने वाले किसानों को प्रबंधन पैसा नहीं दे पा रहे हैं।

किसानों को पैसा देने के लिए अब प्रबंधन तीन करोड़ रुपए कर्ज लेने की तैयारी में है। इसके लिए शासन व बैंकों से संपर्क करने का दौर चल रहा है। जिले के लोगों को बाजार में एक किलो शकर के लिए 34-35 रुपए देना पड़ रहा है। वहीं कारखाना में कोई व्यापारी 28 रु. में भी लेने तैयार नहीं है। प्रबंधन कह रहा जब शकर बिकेगी ही नहीं तो कैसे घाटे से उबर पाएंगे।

बालोद. जिले के दो हजार हेक्टेयर रकबे में हो रही गन्ने की खेती।

कारखाना घाटे में इनके लिए ये जिम्मेदार

1. कारखाना प्रबंधन: मेंटेनेंस पर ध्यान नहीं, मशीनें खराब: हर साल मेंटेनेंस करने के बाद भी मशीनें के पार्ट्स खराब होते हैं। जिसके कारण पेराई प्रभावित होता है। इस स्थिति में गन्ना सूख जाता है और रिकवरी प्रतिशत घटता है। 9 वें सीजन में कारखाने का मोटर जलना, पाइप लीकेज होना आमबात थी। जहां से गन्ने को पांच से छह इंच छोटे टुकड़े में काटकर पेराई मशीन में डाला जाता है, वही खराब हो गया था।

इस बार पहले ले चुके 10 करोड़ कर्ज

कारखाना चलाने के नाम पर प्रबंधन पहले ही शासन से 10 करोड़ रुपए कर्ज ले चुका है। पिछले बार सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानि राशन दुकानों के लिए खुद शासन शकर खरीदी थी लेकिन इस बार शासन से अब तक खरीदने को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई है।

2. कृषि विभाग: किसानों को प्रोत्साहित कर गन्ने का रकबा बढ़ा नहीं पाए: बिना गन्ने के शक्कर कारखाना नहीं चल सकता। ऐसे में कृषि विभाग को जिम्मेदारी दी गई थी कि तीन हजार से अधिक हेक्टेयर रकबा में गन्ने की खेती करने किसानों को प्रोत्साहित करें लेकिन अब तक 2 हजार हेक्टेयर रकबा में ही गन्ना लगा रहे हैं। कृषि विभाग का कहना है कि किसान जब तक जागरूक नहीं होंगे, तब तक हम भी कुछ नहीं कर सकते।

ऐसे समझें शकर के हिसाब को

इस बार 5 हजार क्विंटल शकर बेचा 2815 रुपए में

पिछले साल एक हजार क्विंटल बेचा 3672 रुपए में

करकाभाट शक्कर कारखाने में इस बार 63 हजार क्विंटल शकर अब तक बिक नहीं पाई है। इसके लिए टेंडर प्रोसेस चल रही है।

पहले दूसरे जिले के गन्ने के भरोसे चलता था कारखाना: कृषि उपसंचालक यशवंत केराम का कहना है कि पहले की अपेक्षा अब किसानों में जागरूकता आ रही है, इसी का नतीजा है कि दो हजार से अधिक हेक्टेयर में गन्ना लग रही है। कारखाना भी अब हमारे जिले के किसानों द्वारा उत्पादित गन्ने से ही चल रही है। पहले तो दूसरे जिले के भरोसे थे। प्रयास जारी है, जल्द ही रकबा बढ़ जाएगा।

घाटे से मुनाफे में लाने किसी का ध्यान नहीं

कारखाना जब से संचालित हो रही है तब से घाटे में चल रहा है। बावजूद किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसी का नतीजा है कि साल-दर-साल घाटे की राशि बढ़ती जा रही है और जिम्मेदार सिर्फ कह रहे है कि दो साल में स्थिति सुधर जाएगी।

सीधी बात| पिंताबर ठाकुर, महाप्रबंधक, शक्कर कारखाना

गन्ना ज्यादा आए तो सब ठीक हो जाएगा

कारखाना लगातार घाटे में चल रहा है, बावजूद कुछ नहीं किए?

- हम तो अपने स्तर पर कर रहे हैं, गन्ना ही मांग अनुरुप नहीं आएगा तो क्या कर सकते हैं।

गन्ने ही घाटे का कारण नहीं मशीनों के मेंटेनेंस पर भी ध्यान नहीं है। इस बार तो इसी के चलते डेढ़ माह तक पेराई प्रभावित रही?

- ऐसा नहीं है, मशीनें खराब हो जाती है और फिर ठीक हो जाती है, इससे घाटा नहीं होता।

गन्ने तो सूख जाते हैं, ऐसे में रिकवरी प्रतिशत घटता है?

- थोड़ा ही फर्क पड़ता है। बस गन्ना ज्यादा आए तो सब ठीक हो जाएगा।

शुरुआत में फायदा बाद में घाटा

हर साल शासन से लोन लेकर प्रबंधन कारखाना संचालित कर रहा है। औसतन सालाना 10 से 15 करोड़ का लोन लिया जाता है। एक साल की अवधि में एक करोड़ से ज्यादा ब्याज चुकाना होता है। इस स्थिति में कारखाना घाटे में आ जाता है।

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