अब सिंचाई विभाग के अफसर आॅनलाइन बताएंगे किस जगह बेवजह बहता है पानी
बारिश की कमी व सूखे के चलते दिनोंदिन जिले के प्रमुख जलाशयों का जलस्तर घटते क्रम पर है। स्थिति ऐसी भयावह हो गई है कि अब पानी बचाने के लिए शासन, प्रशासन प्लान बना रहा है। अफसर एक-एक जगह जाकर सर्वे करेंगे कि किस जगह पानी व्यर्थ बह रहा है और इसे रोकने क्या उपाय कर सकते हैं। व्यर्थ क्यों बह रहा है, इसे भी बताना होगा। यह सब पानी बचाने को लेकर की जा रही है।
जिले की सिंचाई नहरों, एनीकेट, जलाशय व डायवर्सन का सर्वे होगा। वह भी ऑनलाइन, इसके लिए सीधे फोटो खींचकर सोशल मीडिया के जरिए उच्च अधिकारियों को वस्तु स्थिति की जानकारी दी जाएगी। इसकी प्रतिदिन रिपोर्ट बनेगी। यह आदेश सिंचाई विभाग के सचिव सोनमणी बोरा ने जारी किया है। शासन ने भी माना कि कई जगहों में जलाशयों से पानी छोड़ने के बाद भी पर्याप्त मात्रा में यह टेल तक नहीं पहुंच पाता। लीकेज के चलते कुछ जगहों पर पानी व्यर्थ बह जा रहा है। इसलिए ही सर्वे के तहत कई प्लानिंग करने की योजना है। हालांकि स्थानीय अफसर कह रहे हैं कि पहले भी सर्वे के हिसाब से जानकारी भेजी जाती थी लेकिन इस बार शासन ज्यादा सख्त है, इसलिए आॅनलाइन करने कहा गया है, रायपुर में बैठे उच्च अफसर व मंत्री भी देखेंगे कि कहां क्या स्थिति है। जिले में सर्वे के बाद वाट्सअप के जरिए डॉटा कलेक्ट किया जाएगा। जिससे काम आसान होगा।
नहर, एनीकट, डैम की वास्तविक स्थिति के लिए अब सर्वे होगा
बालोद. शहर के गंगासागर तालाब व शिकारीपारा के तालाब को भरने पानी छोड़ा जा रहा है।
कच्ची नहर और देखरेख के अभाव में हुई पानी की बर्बादी
पिछले छह साल वर्ष में तांदुला व गोंदली जलाशय के माध्यम से खरीफ फसल में सिंचाई व निस्तारी तालाबों के लिए पानी छोड़ा गया। इस दौरान कच्ची नहर से देखरेख के अभाव में 16 फीट पानी बेकार हो गया। यह न्यूनतम आंकड़ा है। एरिगेशन विभाग के अफसर कहते है कि 5 प्रतिशत पानी तो सीपेज करना ही पड़ता है। पानी सीपेज नहीं होगा तो जलाशय तट फूटने की आशंका ज्यादा रहती है। इसके अलावा कच्ची नहर के कारण 5 प्रतिशत पानी व्यर्थ बह जाता है।
एक तरफ पानी बचाने की बातें दूसरी ओर नहीं रुक रही बर्बादी
गोंदली डैम का गेट खुला है। यहां से शहर के तालाबों को भरने पानी छोड़ा जा रहा है। लेकिन गंगासागर व शिकारीपारा तालाब तक पानी पहुंचाने सड़क से होकर नाली में ले जाया जा रहा है। अफसर कह रहे हैं कि जैसे भी हो पानी तालाब तक पहुंचना चाहिए।
किसान नेता बोले- प्लानिंग करें तो पानी व्यर्थ नहीं बहेगा
किसान नेता अर्जुन हिरवानी, प्यारेलाल केसरिया, चंद्रेश हिरवानी, पवन नेमसिंह साहू का कहना है कि गोंदली जलाशय की सिंचाई क्षमता 7 हजार 500 हेक्टेयर व तांदुला जलाशय की सिंचाई क्षमता 37 हजार हेक्टेयर है। जब भी इन जलाशयों से पानी छोड़े गए है, इसका 10 प्रतिशत हिस्सा व्यर्थ बह गया, इसके कई कारण है। लाइनिंग व नियमित देखरेख हो तो पानी व्यर्थ नहीं बहेगा, नहर, नालियों का जीर्णोद्धार हो तो व्यर्थ बहने वाला बहुमूल्य पानी का उपयोग में लाया जा सकता है।
ऐसे समझें पानी का महत्व जलाशयों पर पड़ रहा प्रभाव
पानी व्यर्थ बह जाने से इसका दुष्परिणाम जलाशयों पर हर साल पड़ रहा है। इस साल समस्या ज्यादा गंभीर है, क्योंकि तांदुला में 13प्रतिशत ही पानी ही शेष है। वहीं गोंदली में 30 प्रतिशत। तीन साल में ओवरफ्लो हुआ लेकिन पानी सहेजने उपाय नहीं- तीन साल 2012, 2013, 2014 में दोनों जलाशय ओवरफ्लो हुआ। लेकिन ओवरफ्लो के बाद उलट में पानी व्यर्थ बह गया।
ग्रेडिंग हिसाब से बनेगा प्लान
सर्वे के साथ कार्यों की ग्रेडिंग की जानी है। इसमें ए ग्रेड 80 प्रतिशत से ऊपर, बी ग्रेड 60 से 80, सी ग्रेड 40 से 60 व डी ग्रेड 40के कम तय की गई है। शासन ने आदेश जारी कर एक सीजीडब्लूआरडी सर्वे ग्रुप बनाया गया है। इसके जरिए यह सारी फोटो व जानकारी अपलोड होगी।
अफसरों और कर्मचारियों की लगी ड्यूटी, भेजना होगी रिपोर्ट
सर्वे कार्य करने सिंचाई विभाग में पदस्थ सहायक व उप अभियंताओं की ड्यूटी लगाई है। कार्य क्षेत्र अलग किया गया है। एक को दूसरे व दूसरे को पहले के क्षेत्र में सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 26 मई तक यह सर्वे पूरा किया जाना है। सिंचाई विभाग के एसडीओ सीएम मौरवी का कहना है कि शासन व उच्च अफसरों के आदेश अनुसार पानी बचाने के लिए कई कार्य होंगे। जिसके लिए अभी आॅनलाइन सर्वे कार्य चल रहा है।