जो स्ट्रीट लाइट सुबह 6 बजे बंद हो जाया करती है। वह शुक्रवार को शहर में दोपहर तीन बजे यानि नौ घंटे तक जलती रही। बिजली सप्लाई के नाम पर शहर के कुंदरूपारा, शिकारीपारा, गौरवपथ, सिचाई कालोनी इलाके में अंधेरगर्दी देखने को मिली। दोपहर दो बजे तक किसी को इस बात की खबर ही नहीं थी कि सौ से ज्यादा पोल पर दिन में लाइट जल रहें हैं। भास्कर की सूचना के बाद नपा व बिजली कंपनी के कर्मचारी फाल्ट ढूंढने निकले। आंधी तूफान व बारिश के कारण कहीं पर तार जुड़ने व टाइमर में शार्ट सर्किट होने के कारण ऐसा हुआ था। जिसे सुधार कर तीन बजे लाइट बंद की गई। इसके पहले तो दोनों विभाग के अफसर एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे थे। जेई हितेंद्र यादव ने कहा लाइट चालू बंद करने का काम नपा का है। उन लोगों ने इसके लिए टाइमर लगाया है। नपा के बिजली प्रभारी प्रमोद शर्मा ने कहा फाल्ट सुधारने का काम कंपनी का है।
बालोद. कुंदरूपारा में जलती स्ट्रीट लाइट।
यह वही पालिका जो बिजली बिल नहीं चुका पाई थी तो शासन ने 51 लाख रुपए जमा किया था
पिछले साल जिलेभर के नगरीय निकायों के लगभग एक करोड़ 14 लाख 4 हजार रुपए बकाया बिजली बिल का भुगतान नगरीय प्रशासन व विकास विभाग की ओर से छत्तीसगढ़ राज्य बिजली कंपनी को हस्तांतरण किया गया था। नगर पालिका परिषद बालोद में 51 लाख 67 हजार रुपए, दल्लीराजहरा में 28 लाख 46 हजार, नगर पंचायत डौंडी में 8 लाख 50 हजार रुपए, डौंडीलोहारा में 6 लाख 50 हजार,चिखलाकसा में 5 लाख 5 हजार, गुरुर में 6 लाख 86 हजार, गुंडरदेही में 7 लाख रुपए बिजली बिल बकाया था। जिसे शासन ने पटाया। इसके बाद भी बिजली बचाने कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।