तांदुला नदी पर 10 करोड़ के पुल का काम शुरू
तांदुला नदी पर सुंदरा और देवी नवागांव के बीच 10 करोड़ की लागत से बन रहे पुल का काम लगभग 8 महीने के बाद अब फिर से शुरू हो गया है। मामला किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलने का था। सुंदरा के 2 किसान जमीन देने के लिए राजी नहीं हो रहे थे। वे सहमत हो गए हैं।
90% काम पूरा हो चुका है। अनिवार्य क्रय अधिनियम के तहत राजस्व विभाग ने किसानों की जमीन खरीदने आदेश जारी किया। किसान गंगदेव सुकतेल 151000 व नारायण देशमुख को एक लाख 8000 रुपए मुआवजा दिया गया। लोगों के हित को देखते हुए ये सहमत हो गए।
बारिश के पहले काम पूरा करने का लक्ष्य, 20 गांव के लोगों को पुल बनने से मिलेगा लाभ
337.50 मीटर लंबे पुल का होना है निर्माण
10.91
करोड़ रुपए उच्च स्तरीय पुल की लागत
बालोद. मुआवजे के बाद किसानों की जमीन पर पुल बनाने का काम शुरू हुआ है।
मांगी थी सिवनी में जमीन: दरअसल, किसान मुआवजे से संतुष्ट नहीं थे तो अफसरों ने दूसरी जगह जमीन का प्रसतव रखा। किसान कलेक्ट्रेट सिवनी तरफ जमीन मांग रहे थे। यह राजस्व विभाग के बस की बात नहीं थी।
16
माह का है काम पूर्ण करने समय व डेड लाइन
2015
में मिली थी पुल निर्माण के लिए स्वीकृति
20
गांव की 40 हजार आबादी को मिलेगा लाभ
जनवरी 2018 तक पूरा हो जाना था निर्माण का काम
इस पुल निर्माण की अंतिम अवधि जनवरी 2018 तक थी। किसान राजी नहीं होने के कारण सितंबर से काम बंद था। दोनों किसान की 10 से 15 डिसमिल जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पाया था। इस वजह से जनवरी तक काम पूरा नहीं हो पाया। किसानों ने जनदर्शन, लोक सुराज अभियान में भी अर्जी लगाई थी कि हमें शासन के पूर्व नियमानुसार पांच लाख दिया जाए। लेकिन नियम बदलने के कारण राजस्व विभाग के अधिकारी भी कुछ नहीं कर पाए। किसान अपनी बात पर अड़े रहे। ऐसे-तैसे 7 महीने बीत गए।
बारिश के पहले बनाने की तैयारी: निर्माण एजेंसी व सेतु निगम के अफसरों का दावा है कि बारिश के पहले बचे हुए काम को पूरा कर देंगे। किसानों के जमीन देने के बाद 2 महीने के भीतर बचे हुए 10% को काम को पूरा कर देंगे। इंजीनियर बीके साहू ने कहा कि आने वाले बरसात में पुल से आना जाना चालू हो जाएगा।
बाढ़ में बंद नहीं होगा रास्ता: अगर बरसात के पहले पुल का काम पूरा हो जाता है तो इस बार तांदुला नदी में बाढ़ आने पर भी रास्ता बंद नहीं होगा। शासन ने पूर्व में लगभग नौ करोड़ खर्च कर एनिकट कम रपटा बनाया है। जुलाई अगस्त में ज्यादा पानी से रास्ता बंद हो जाता है। लाटाबोड़-दुर्ग-बालोद मुख्य मार्ग से सीधा संपर्क टूट जाता है।