पहली बार नगरी निकाय प्रशासन शहर के एक-एक तालाब को प्रदूषण से बचाने के लिए प्राकृतिक फिल्टर प्लांट की स्थापना करेगा। इसकी तैयारी के लिए शासन ने सभी नगरी निकाय से तालाबों की सूची मंगाई थी। जो तालाब ज्यादा प्रदूषित हैं उनकी जानकारी भेजी गई थी। जिसके आधार पर बालोद के 16 तालाबों की में से आमा तालाब और दशेला तालाब को प्लांट स्थापना के लिए चिन्हित किया गया है।
सीएमओ रोहित साहू ने बताया कि अभी इसकी जानकारी नहीं दी गई है कि तालाब की किस तरह से सफाई की जाएगी। रायपुर में नगरी निकाय प्रशासन व सूडा ने एक तालाब का डेढ़ साल तक सर्वे किया था कि हर महीने तालाब में किस तरह से और किन कारणों से प्रदूषण हो रहा है। उस दौरान कैसे प्रदूषण को रोका जा सकता है। सर्वे के बाद ही नगरी निकाय मंत्री अमर अग्रवाल ने पिछले दिनों प्रशिक्षण आयोजित कर सभी तालाबों की जानकारी मांगी थी। बताया गया कि हर शहर में तालाबों के प्रदूषण के कारण अलग-अलग सामने आते हैं। उस हिसाब से प्रदूषण से बचाने के लिए ही कम खर्च में देशी तकनीक अपनाकर फिल्टर प्लांट लगाया जाएगा।
संजय नगर के इस दशेला तालाब में बनेगा प्राकृतिक फिल्टर प्लांट।
प्लांट लगाने रायपुर से आएंगे अफसर
प्राकृतिक फिल्टर प्लांट से तालाबों को बचाने के लिए काम किया जाएगा। शहर में रायपुर से ही अफसरों की टीम आकर काम करेगी। प्रदेश के तालाबों में जाने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए प्राकृतिक फिल्टर प्लांट लगाए जाएंगे। जल संकट से निपटने के लिए ऐसा किया जा रहा है। प्रदेश के लगभग सभी गांव में तालाबों की संख्या काफी अधिक है। लेकिन इनमें से ज्यादातर तालाबों का पानी उपयोग करने लायक नहीं है। इसलिए ऐसे तालाबों के पानी को शुद्ध करने के लिए शुद्धिकरण यंत्र लगाने की प्लानिंग की गई है। इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी निकायों को पत्र जारी कर गंदे पानी वाले तालाबों, जिनमें गंदा पानी जा रहा है ऐसे तालाबों आैर जिन तालाबों में गंदा पानी जाने से रोका जा रहा है ऐसे सभी तालाबों की जानकारी मांगी है।
पहली बार योजना लागूू: पहली बार यह योजना लागू की जा रही है। इसलिए सूडा के अफसरों ने अभी पूरी जानकारी नगरी निकायों से साझा नहीं किया है। सिर्फ हमें सूची मंगाकर तालाबों को चिन्हित किया जा रहा है। इसमें बालोद के दो तालाब आमापारा व दशेला शामिल किया गया है।
अभी इन कारणों से दूषित हो रहा है तालाबों का पानी
शहर में तालाबों के प्रदूषण का प्रमुख कारण पॉलीथिन, कचरा और नालियों का गंदा पानी है। अधिकतर तालाबों में शहर से बहने वाले गंदा पानी जमा हो जाता है। इसके अलावा वार्डवासी भी तालाब में ही कचरा फेंक देते हैं। स्वच्छता के प्रति जागरूकता नहीं है। जिसके कारण शहर के कई तालाब गंदगी से भरा पड़ा है। नगर पालिका गंदा पानी को तालाब में जाने से रोकने के लिए नाली बना रही है।
नहीं लगेगी मशीन: तालाबों के फिल्टर प्लांट में किसी तरह का मशीन नहीं होगी। तालाबों की सफाई नहीं होने के कारण पानी दूषित होने लगा है। इससे बचाने के लिए अब यह पहल की जा रही है।
एनआईटी ने बनाया फिल्टर प्लांट का डिजाइन
प्राकृतिक फिल्टर प्लांट का मॉडल एनआईटी रायपुर ने डिजाइन किया है। इसे किसी भी तालाब में आसानी से लगाया जा सकता है। इसके लिए ज्यादा पैसा खर्च करने की जरूरत भी नहीं होगी। सूडा के अफसरों के मुताबिक यह प्राकृतिक फिल्टर प्लांट पूरी तरह से देशी तकनीक पर आधारित है।