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दो साल से फर्जी खाता खोलकर आयकर की कर रहे थे चोरी, सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

3 वर्ष पहले
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पोपलीन नगरी के नाम से देश में अपना वर्चस्व स्थापित कर चुके बालोतरा के वस्त्र कारोबार से सरकार को सालाना करोड़ों रुपए का राजस्व प्राप्त हो रहा है। इसमें उद्यमियों के अपनी फर्म से होने वाले ट्रांजेक्शन व कमाई का कर िन यमानुसार सरकार के खाते में जमा करवाते आ रहे है, लेकिन इनमें कई उद्यमी ऐसे भी है, जो कम आय बताकर लंबे समय से कर की चोरी कर रहे हैं। आयकर विभाग की नजरों से बचने के लिए उन्होंने अपने परिवार सदस्यों के साथ कारखानों में काम करने वाले विश्वसनीय स्टाफ के बैंक खातों से ट्रांजेक्शन करते आ रहे है, लेकिन अब जीएसटी लागू होने, स्टाफ व उद्यमियों के बीच आपसी विवाद के बाद मामले थाने तक पहुंच रहे हैं। हालांकि पुलिस जांच में परिवादी के पहले सहमति से खाता खुलवाने व बाद में आपसी अनबन होने से मामले दर्ज करवाना सामने आया है, लेकिन इस बीच उद्यमियों के कर चोरी करने के लिए अपनाए जा रहे तरीकों का भी खुलासा होने लगा है। उल्लेखनीय है कि पांच दशक से अधिक समय से बालोतरा, जसोल व बिठूजा में रंगाई-धुपाई-छपाई का कामकाज चल रहा है। वर्तमान में 700 से अधिक इकाइयों में वस्त्र कारोबार हो रहा है। पोपलीन कपड़े के लिए देश में विख्यात औद्योगिक नगरी में सालाना 10 हजार करोड़ रुपए का टर्न ओवर होता है। इससे करोड़ों रुपए सरकार को राजस्व के रूप में प्राप्त हो रहे है, लेकिन कई उद्यमी अपनी पूरी आय उजागर नहीं कर कम इनकम बता कर चोरी करते आ रहे हैं।

मेसर्स जे.एम. टैक्सटाइल पर कर्मचारियों के नाम फर्जी खाता खोलने का आरोप

खेतेश्वर नगर, आसोतरा फांटा निवासी महेंद्र तीके पुत्र प्रेमाराम माली ने जरिये इस्तगासा पुलिस में मामला दर्ज करवाया कि शाखा प्रबंधक, पीएनबी बैंक गोर का चौक बालोतरा, भरत जिंदल आयकर एजेंट, विनोद भंसाली निवासी चारण मार्केट के पीछे बालोतरा, अजरूदीन निवासी शास्त्री चौक, नाथूराम पुत्र मोहनलाल माली रेगरपुरा, संजय कुमावत पुत्र सुरेश कुमावत, मैसर्स जे.एम. टैक्सटाइल बालोतरा के खिलाफ करीब दो साल पूर्व उसके नाम से फर्जी खाता खुलवाने व करोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन करने का आरोप लगाया।

टैक्सी चोरी को लेकर अपना रहे थे हथकंडे

जीएसटी लागू होने से पूर्व कई उद्यमियों ने कर बचाने के लिए अपने परिवार सदस्यों सहित इकाइयों में काम करने वाले स्टाफ के नाम से खाते खुलवा रखे थे। उनके खाते में फर्म का लेन-देन होता रहता था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद दूसरे खातों से ट्रांजेक्शन को लेकर दिक्कतें आ रही है। इस बीच स्टाफ व उद्यमी के बीच छोटा-मोटा विवाद पैदा हो रहे है। औद्योगिक नगरी में कई उद्यमी इस तरह से आयकर चोरी के हथकंडे अपना रहे है, लेकिन आपसी तालमेल के चलते बहुत कम मामले उजागर होते हैं।

पूर्व में भी दर्ज हुआ था मामला, आपसी सहमति बनने के बाद वापस लिया मामला

3 अप्रेल 2018 को पारलू निवासी हनुमानदास पुत्र बाबूदास संत ने शाखा प्रबंधक, पीएनबी गौर का चौक बालोतरा, भरत जिंदल आयकर एजेंट बालोतरा, रोहित फेब्रिक्स, डिंपल टेक्सटाइल, समता ट्रेडर्स, मुंबई प्रोडक्ट, नाकोड़ा ट्रेडर्स, दिव्या फेब्रिक्स, माजीसा फर्म, युवराज इंटरप्राईजेज, शीतल ग्वार गम, विनोद कुमार, दिव्यांशी इंटरप्राईजेज, शंखेश्वर ग्वार गम, अजरुदीन, राजूराम, विनोद भंसाली, स्वास्तिक ग्वार गम, वर्धमान टैक्सटाइल प्रिंट, राजेश कुमार, भंसाली व सरस्वती प्रोसेसिंग के खिलाफ बैंक में उसके नाम से फर्जी खाता खुलवाकर करोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन करवाने का मामला दर्ज करवाया था। सूत्रों के अनुसार दर्ज मामले में परिवादी व मुलजिम पक्ष के बीच समझौता होने से मामले आगे चलाने से मना कर दिया, इस पर पुलिस ने एफआर पेश की।

पुलिस के सामने आती है परेशानी

दो जनों के बीच आपसी विवाद के बाद पुलिस में दर्ज होने वाले मामलों में की जांच में पुलिस को भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है। दर्ज मामले में अनुसंधान अधिकारी मामले की तह तक पहुंचते हैं, तब तक दोनों पक्ष आपस में बैठकर मामला सुलझा देते है, इस पर पुलिस को एफआर लगानी पड़ती है। ऐसे में इंवेस्टिेगेशन में लगने वाले पुलिस का समय ऐसे ही बर्बाद हो जाता है। हालांकि पुलिस में गलत रिपोर्ट पेश करने पर परिवादी के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने का भी प्रावधान है, लेकिन अभी तक ऐसा काेई मामला सामने नहीं आया है।

मामला दर्ज हुआ है, जांच शुरू की है

एक माह पहले भी ऐसा मामला सामने आया था। इसमें जांच चल रही थी, लेकिन बाद में दोनों पाों के आपसी समझौते के चलते परिवादी ने कार्रवाई करवाने से मना कर दिया। इस पर एफआर लगानी पड़ी। इस्तगासा के जरिए फर्जी तरीके से खाता खुलवाने व ट्रांजेक्शन का मामला आया है, इसे दर्ज कर जांच की जा रही है। -भंवरलाल सिरवी, थानाधिकारी बालोतरा

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