नक्सल प्रभावित चुनचुना पंुदाग तक सड़क बनाने का मुश्किल टास्क अगले साल तक पूरा होगा
झारखंड की सीमा से लगे जिले के नक्सल प्रभावित चुनचुना पंुदाग इलाके मेंे पहली बार बनाई जा रही सड़क इलाके के लोगों के लिए लाइफ-लाइन साबित होगी पर इसके लिए उन्हें सालभर और इंतजार करना होगा। घाट व पहाड़ काटकर 25 किमी लंबी सड़क निर्माण में 15 करोड़ खर्च होंगे। नक्सल प्रभावित क्षेत्र के लोगों को यह सड़क सीधे मुख्यालय तक जोड़ देगी।
जिले के सामरी इलाके में आजादी के बाद से अभी तक चुनचुना पंुदाग से लेकर पीपरढाबा तक सड़क नहीं बन पाई थी। इलाके के लोग खतरनाक पहाड़ी व घाट को पार कर किसी तरह सबाग पहंुचते थे पर बारिश में यह भी बंद हो जाता था। इस दौरान इलाके के लोगों के लिए झारखंड का बरगढ़ व भंडरिया का इलाका सहारा हाेता था। यहां सबसे पहले 2001-02 में सड़क बनाने सर्वे का काम शुरू किया पर नक्सल प्रभावित इलाका होने से यह काम नहीं हो पाया। सिर्फ कुसमी से चांदो के बीच किसी तरह सड़क बन पाई। फिर 2016 मेंे तत्कालीन कलेक्टर अलेक्स पाल मेनन ने सड़क का सर्वे करा िरपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी। मंजूरी मिलने पर पीएमजीएसवाई को काम का जिम्मा सौंपा। करीब 25 किमी सड़क बनाने 15 करोड़ 60 लाख की मंजूरी मिली।
करीब 25 किमी सड़क बनाने के लिए 15 करोड़ 60 लाख रुपए की मिली मंजूरी
पहाड़ों को काटकर बनाई जा रही सड़क निर्माण का जायजा लेते अधिकारी।
अगले साल तक तैयार हो जाएगी सड़क: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता ओपी सिंह के मुताबिक कुल पच्चीस किमी लंबी सड़क में चार किमी तक टायरिंग का काम पूरा हो चुका है। 15 किमी तक डब्ल्यूबीएम का काम हो गया है। करीब दस किमी के बाकी हिस्से का काम अगले साल तक पूरा कर लिया जाएगा। इसमें कुछ नदियों पर पुल भी बनाए जाएंगे।
घाट-पहाड़ के कारण यहां आना होता था मुश्किल
सबाग से चुनचुना पंुदाग के बीच के रास्ते मेंे करीब 13 किमी का हिस्सा काफी दुर्गम था। घाट-पहाड़ के बीच किसी तरह रास्ता तलाशना पड़ता था। इसके कारण यहां तक पहंुचना काफी मुश्किल था। सड़क बनाने में इन घाट-पहाड़ों को काटकर सीधा व समतल किया गया है। इसमें डब्ल्यूबीएम सड़क बनाने का काम तेजी से चल रहा है। अब लोग छोटे वाहनों से आना-जाना करने लगे हैं।
राशन के लिए लोगांे को होती थी दिक्कत
चुनचुना पुंदाग तक लोगों को राशन के लिए सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। आज भी यहां के लोगोंे को सबाग तक राशन लेने आना पड़ता था। सड़क बनने के बाद लोगों को राहत मिलेगी। आज भी यहां के लोगों की खरीददारी झारखंड के इलाके से ही होती है। सामरी या चांदो जाने की जगह लोग बरगढ़ या भंडरिया जाना पसंद करते हैं क्योंकि यहां तक आने-जाने की बेहतर सुविधा है।