मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित हैं आदर्श पंचायत केकरगढ़ के लोग
पांकी प्रखंड मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर दूर आदर्श पंचायत केकरगढ़ बरसात के दिनों में 3 माह तक टापू बन जाता है इसका मुख्य कारण सड़कें व पुल का निर्माण न होना। पांकी प्रखंड मुख्यालय से आदर्श पंचायत केकरगढ़ जाने वाली मुख्य सड़क पांकी बालूमाथ मुख्य पथ स्थित ग्राम सोरठ से पूर्व दिशा की ओर उलगाड़ा ग्राम होते कई छोटी नदी नाले व दुर्गम रास्ते होते हुए केकरगढ़ पंचायत जाती है।
केकरगढ़ पंचायत निवासी महावीर यादव व प्रसादी यादव ने बताया कि बरसात के दिनों में उन्हें 3 माह तक काफी परेशानी होती है क्योंकि मुख्यालय जाने की कोई पक्की सड़क नहीं है और कहीं भी पुल पुलिया नहीं है जिसके कारण उन्हें 8 से 10 किलोमीटर पैदल भी चलना पड़ता है व प्रखंड मुख्यालय पहुंचने में उन्हें लगभग डेढ़ घंटे का समय लगता हैl साथ ही मौके पर उपस्थित पंचायत के दर्जनों ग्रामीणों बताया कि अमानत नदी पर पुल का निर्माण नहीं होने से पंचायत के 8 गांव द्वारिका, मतनाग, जोलहबिगहा, जसपुर गढ़ीहारा,हेड़ुम, राणादह, व केकरगढ़ जैसे गांव की स्थिति 3 महीने तक टापू जैसी हो जाती है, जिसके कारण इस गांव की लगभग 5000 की आबादी काफी प्रभावित होती है कहने को तो इस पंचायत को आदर्श पंचायत का दर्जा मिला हुआ है लेकिन विकास के नाम पर आज तक कोई भी कार्य धरातल पर नजर नहीं आयाl
पंचायत के मुखिया शकुंती देवी ने बताया कि जब तक पुल-पुलिया व पक्की सड़कें का निर्माण नहीं हो जाता तब तक केकरगढ़ पंचायत के ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
केकरगढ़ पंचायत निवासी समाजसेवी राजेंद्र यादव ने बताया की देश के आजादी के पहले व देश के आजादी के बाद आज तक ना पहले कभी पुल बना था और ना ही अभी तक पुल बना है नदी तक जाने वाली सड़क भी बिचौलिया गिरी के हत्थे चढ़ गया। बीच में सरकार के योजनाओं द्वारा सड़क का निर्माण कराया गया था लेकिन सिर्फ मोरम मिट्टी छिड़ककर पूरे पैसे की निकासी कर ली गई थी। हाल यह है कि सड़क पर पैदल चलने में भी घुटने भर कीचड़ रहता है।
बताते चलें कि केकरगढ़ पंचायत सांसद आदर्श पंचायत है लेकिन सिर्फ कहने को आदर्श पंचायत है यहां के लोग अपनी मूलभूत सुविधाओं से अभी भी वंचित हैं आदर्श पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने के कारण पंचायत के लोग अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सिर्फ झोलाछाप डॉक्टरों पर निर्भर रहते है । विषम परिस्थिति में उनके पास जान देने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं होता है । यहां तक की कुछ दुकानदार लोग मजदूर किस्म के व्यक्तियों से सर पर समान रखवा कर नदी को पार करवाते हैं जिससे बरसात के दिनों में लोगों को जरूरतमंद कुछ सामान उपलब्ध हो पाती है।