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8 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे जसवंत की हालत नाजुक

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता| बंगा सिटी

शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह व उनके साथियों को शहीद का दर्जा दिलाने व उनके शहीदी दिवस पर देशभर में छुट्टी की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे जबर विरोधी संघर्ष कमेटी के कनवीनर जसवंत सिंह भारटा का आठ दिनों में सात किलो वजन कम हो गया है।

शुक्रवार को स्वास्थ्य खराब होने के बाद शनिवार से डॉक्टर उनकी नियमित जांच भी करने लगे हैं। रविवार को जसवंत सिंह भारटा को समर्थन देने के लिए अपणा पंजाब पार्टी के प्रधान सुच्चा सिंह छोटेपुर भी विशेष रूप से पहुंचे। उन्होंने भारटा के संघर्ष को सही बताते हुए सरकार से भगत सिंह व उनके साथियों को शहीद का दर्जा देने की मांग की। बता दें कि जसवंत सिंह ने इसी मुद्दे पर 18 दिन पहले भी संघर्ष किया था। लगातार दस दिन तक वे धरने पर रहे तथा उसके बाद उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। इस मौके पर प्रितपाल सिंह, जसविंद सिंह काहमा, हरबंस अडिक़ा, निर्मल सिंह भूतां, बाबा जंग सिंह, रजिंदर सिंह, कश्मीर सिंह, सेवा सिंह, सोहन सिंह, जसवंत सिंह, प्रवेश खोसला, मोहन सिंह, गुरमुख सिंह, बलदेव, परिंदर मेनका, गुरप्रीत सोढी आदि भी उपस्थित थे।

आंदोलन

भगत सिंह व साथियों को शहीद का दर्जा दिलाने के लिए भूख हड़ताल जारी, छोटेपुर भी पहुंचे

भूख हड़ताल पर बैठे जसवंत भारटा से बातचीत करते सुच्चा सिंह छोटेपुर।

पंजाब सरकार के रूख से लगा धक्का: भारटा

पंजाब सरकार की ओर से शहीद भगत सिंह को शहीद का दर्जा दिए जाने से इनकार करने पर जसवंत सिंह भारटा ने हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में जानकर धक्का लगा है। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली की पंजाब सरकार ने एबोलिशन ऑफ टाइटल्स नियम का हवाला देते हुए कहा है कि फौज के अलावा ये दर्जा किसी को नहीं दिया जा सकता। भारटा ने कहा कि डेढ़ साल पहले कांग्रेस अकालियों पर तरह-तरह के दोष मढ़ रही थी और अब कांग्रेस भी उन्हीं की राह पर चल पड़ी है। यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

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