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कुएं में गिरे मनरेगा मजदूर की मौत, बिना पोस्टमार्टम के ही कर दिया अंतिम संस्कार

3 वर्ष पहले
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बेंगबाद थाना क्षेत्र के जरुअाडीह पंचायत के हरिलवाटांड़ में कूप खोदने के दौरान बुधवार की रात आदिवासी मजदूर की मौत कुएं में गिरकर हो गई। कूप वहीं के खोसल राणा के नाम पर मनरेगा से बनाया जा रहा है और मरने वाला व्यक्ति रामा टुडू (45) भी उसी गांव का है। काम रात में चल रहा था और घटना भी रात की है। बताया जाता है कि कुएं की खुदाई के दौरान विस्फोट किया गया। िवस्फोट के बाद टुकड़े हुए पत्थरों को मजदूर उठा रहा था, इसी दौरन यह हादसा हुआ। यही कारण है कि मामले की लीपापोती की जा रही है। मजदूर की मौत के बाद आनन-फानन में शव का अंतिम संस्कार कर दिया। शव गाड़ा गया या जलाया गया यह पता नहीं चल पाया। बिचौलियों ने मीडिया कर्मियों को उसके घर तक जाने नहीं दिया। वहीं मृतक की प|ी से एक हस्ताक्षर करवा कर नजरबंद कर दिया गया है। पुलिस ने भी मामले की छानबीन में रुचि नहीं दिखलाते हुए मृतक की प|ी के नाम एक आवेदन लेकर अपना काम पूरा कर लिया। बीडीओ तो इसे मनरेगा कूप बताने से ही इंकार कर रहे हैं। जबकि मनरेगा के क्रम संख्या 101 में इस कूप का नाम चढ़ा है, जो खोसल राणा की जमीन पर है। मुखिया सामने नहीं आईं, उनके पति राजेद्र पंडित ने बताया कि मजदूर शराब पीता था। अत्यधिक शराब के सेवन से उसकी मौत हो गई है।

4 साल पहले भी इस कूप के नाम पर निकल चुकी है राशी

विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि यह मनरेगा कूप 4 वर्ष पूर्व ही मनरेगा से खोसल राणा के नाम से स्वीकृत हुआ था। पुनः इसी कुआं को नवीनीकरण के तौर पर 2018 में भी खोसल राणा के नाम से ही 101 क्रम संख्या में स्वीकृति कर दिया गया। जिसमें मेटेरियल और मजदूरी के नाम पर दो लाख की निकासी भी कर ली गई है। पूर्व में 15 से 20 फीट तक खुदाई हो चुकी थी जिसका काम बंद कर दिया गया था। लेकिन ना जाने किसके आदेश से पुनः इस कूप का कार्य प्रारंभ किया गया। मनरेगा मजदूर रामा टुडू का पंजीयन संख्या 48 है।

जांच के बाद होगी कार्रवाई: बीडीओ

बेंगाबाद बीडीओ कुमार अभिषेक सिंह ने कहा कि रामा टुडू मजदूर की मौत कुआं में गिर जाने से हुई। जिसकी जानकारी उन्हें है लेकिन यह कुआं मनरेगा के तहत नहीं बनाया जा रहा था। यह एक जांच का विषय है। जांचोपरांत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

खोदा जा रहा कुआं।

समझौता हो गया होगा इसलिए मृतक की प|ी ने मुकदमा नहीं किया : थाना प्रभारी

बेंगबाद थाना प्रभारी पृथवीसेन दास ने बताया कि सुबह में उन्हें सूचना मिली थी। पुलिस अफसर वहां गए तो लोगों ने कहा कि इसमें मृतक की प|ी मुकदमा नहीं लड़ना नहीं चाहती है। यह कह कर मृतक की प|ी ने एक आवेदन दिया जिसमें लिखा था कि उसके पति को कम दिखता था, इसलिए कुएं में गिर कर मर गया। इसके साथ ही यह भी कहा कि वह ंकाफी गरीब है और मुकदमा नहीं लड़ना चाहती है। मृतक की प|ी तैयार ही नहीं थी तो पुलिस इसमें क्या कर सकती है। उन्हें लगता है कि आपसी समझौता हो गया था। मृतक की प|ी को कुछ मिल गया होगा। मृतक की प|ी से एक आवेदन पर हस्ताक्षर करवा लिया गया कि रामा टुडू की मौत अपने आप हो गई है। तो फिर वह रात में कुएं क्या करने गया था। काम रात में क्यों चल रहा था। कुएं में ब्लास्ट हुआ है या नहीं यह तो देखा जा सकता था, लेकिन यह देखने अधिकारी क्यों नहीं गए। पुलिस ने महज एक आवेदन लेकर कर क्यों अपना काम पूरा कर लिया। प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस की कार्यशैली से यह शंका होती है कि कहीं ना कहीं इसमें बिचौलिए और लाभुक को बचाने का प्रयास किया गया है।

आन फानन में किया अंतिम संस्कार

मजदूर की मौत कुएं में दब कर या गिरने से हुई है। जिसमें उसके शरीर पर चोट का निशान होगा या फिर शव देखने से पता चल जाता। पोस्टमार्टम में साफ हो जाता कि मौत का क्या कारण है। इसलिए शव का अंतिम संस्कार जल्दबाजी में कर दिया गया।

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