जरुआडीह पंचायत के हरिलवाटांड़ में मनरेगा मजदूर रामा टुडू की मौत प्रकरण में दूसरे दिन भी कोई पदाधिकारी सुधि लेने नहीं पहुंचे और ना ही कोई इस मामले में अब तक जांच की गई है। जरुआडीह पंचायत में मुखिया पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य एक ही पंचायत में मौजूद रहने के बावजूद मृतक आदिवासी मजदूर को मनरेगा के तहत लाभ दिए जाने वाला मुआवजा से वंचित रख दिया गया। बिना पोस्टमार्टम किए ही दाह संस्कार करवा दिया। इससे साफ होता है कि साक्ष्य छुपाने में कई लोगों ने भूमिका निभाई। मनरेगा मजदूर रामा टुडू की मौत होने के बाद स्थानीय मुखिया मामले को दबाने के लिए भाग-दौड़ में लगे हुए हैं। बता दें कि जरुआडीह पंचायत में कई अर्धनिर्मित कूप पड़े हुए हैं। जिसमें कभी भी अप्रिय घटना घट सकती है। सामाजिक अंकेक्षण जनसुनवाई कार्यक्रम में भी जांच टीम के सदस्यों ने भ्रष्टाचार की पोल खोलकर रख दी थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई और बिचौलियों का मनोबल बढ़ता गया। हालात यह हुई कि आज मनरेगा मजदूर मरने की बाद दर परत खुल रही है।
ना शेड बना है और ना योजना का बोर्ड
रामा टुडू की मौत हुई है उस कुआं में मनरेगा के तहत ना शेड बनाया गया है और ना ही बोर्ड लगाई गई है। जिससे लोगों को यह पता नहीं चलता है कि 2018 मे भी पुरानी अर्धनिर्मित कुआं को नवनिर्मित में स्वीकृति दे दी गई है। जबकि लिखित तौर पर क्रमांक संख्या 101 में खोसल राणा की जमीन पर सिंचाई कूप का निर्माण का लिस्ट अंकित है और इस योजना से लगभग दो लाख की निकासी भी कर ली गई है। सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर ऐसे कौन नटवरलाल हैं जो पुराने कुआं को नवनिर्मित कुआं की स्वीकृति देकर सरकार का पैसा डकारने का काम कर रहे हैं।
नवीनीकरण के नाम पर 2 लाख निकासी की सूचना
बेंगाबाद बीडीओ कुमार अभिषेक सिंह ने कहा कि रामा टुडू मनरेगा मजदूर हैं और उनकी मौत कुएं में गिरने से हुई है। वह अर्धनिर्मित और पुराना कुआं ं है। इस कुआ को नवीनीकरण के तौर पर 2018 में रुपए की निकासी करने की सूचना है। पूर्व का अभिलेख और 2018 का भी अभिलेख खोसल राणा की जमीन पर बनी सिंचाई कूप निर्माण की फाइल मंगा रहे हैं। जांच करने के बाद इसमें दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।