जिले में बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस बार नदी तटबंधों और बांधों की मरम्मत को लेकर अपनी मुहिम शुरू कर दी है। बिहार सरकार ने राज्य के 35 जिलाें काे बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घाेषित कर बांध, तटबंध व डांडाें की मरम्मत का निर्देश दिया है।
इसी के तहत शनिवार काे अापदा प्रबंधन की टीम ने चांदन नदी के तटबंध का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम काे 40 किलाेमीटर की दूरी में कई जगह तटबंध क्षतिग्रस्त मिला। टीम तटबंध की फाेटाेग्राफी कर इसकी रिपाेर्ट डीएम काे साैंपेगी। अापदा प्रबंधन की टीम में एसडीअाे मनाेज कुमार, अापदा प्रबंधन विभाग के इंजीनियर राकेश कुमार पुष्कर व अन्य माैजूद थे।
इस दौरान आपदा प्रबंधन टीम को कई जगह बालू माफिया द्वारा तटबंध को क्षति पहुंचाने के सबूत भी मिले। बालू माफिया नदी तक ट्रैक्टर लाने ले जाने के लिए कई जगह तटबंध को क्षतिग्रस्त कर दिया है।
बालू माफिया ने कई जगह क्षतिग्रस्त किया तटबंध
5 साल पहले 30 करोड़ की लागत से हुआ था चांदन नदी के तटबंध का निर्माण
पिछले साल क्षतिग्रस्त हुए चांदन नदी के तटबंध के हिस्से का किया गया मरम्मति कार्य, लकड़ीकोला पंचायत के समीप चांदन नदी पर बना क्षतिग्रस्त तटबंध।
रजौन के पास तटबंध में पाई गई बड़ी दरार
निरीक्षण के दौरान टीम ने मतडीहा, लकड़ीकोला, बांका शहर के अासपास चांदन नदी के तटबंध और कंझिया तथा रजाैन क्षेत्र के तटवर्ती इलाके का जायजा लिया। रजाैन के पास तटबंध में बड़ी दरार पाई गई। टीम ने अपनी रिपाेर्ट में इसे अत्यंत अावश्यक मरम्मत कार्य की सूची में शामिल किया।
1995 में अाई बाढ़ ने जिले में मचाई थी तबाही
बांका में 1995 में बाढ़ ने जिले में तबाही मचाई थी। उस दौरान शहर के नीचले हिस्से करहरिया, विजयनगर, जगतपुर, भयहरण स्थान, अलीगंज, आनंद कॉलोनी मोहल्ले में 7 फीट तक पानी प्रवेश कर गया था। जिले में कर्इ लोगों की जान चली गई थी। दर्जनों घर बाढ़ में बह गए थे। हजारों एकड़ भूमि बालू से भर गया था।
पिछले साल भी टूटते-टूटते बचा था तटबंध
गत वर्ष भारी बारिश के बाद 2 अक्टूबर को चांदन नदी लबालब हाे गया था। पानी की तेज धारा से शहर के पास बने पुल के नजदीक तटबंध टूटने की कगार पर पहुंच गया था। प्रशासन ने अानन-फानन में दाे हजार बाेरे में बालू भरकर तटबंध की मरम्मत की थी। कहते हैं कि 20 मिनट की भी देरी हो जाती ताे, बांका शहर चांदन नदी के पानी में डूब जाता।
तटबंध पर कहीं नहीं है प्रोटेक्शन वॉल
40 किलोमीटर की दूरी में फैले चांदन नदी के तटबंध में कहीं प्रोटेक्शन वॉल या गार्ड वॉल नहीं है। इस वजह से हर बरसात में तटबंध क्षतिग्रस्त हो जाता है। ज्ञात हो कि 5 साल पूर्व ही चांदन नदी के तटबंध का करीब 30 करोड़ की लागत से जीर्णोद्धार कराया गया था।