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अखंड सुहाग की कामना के साथ महिलाओं ने की वट सावित्री पूजा

3 वर्ष पहले
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जिले भर में सुहागिनों ने वट सावित्री व्रत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई। सोलह शृंगार कर महिलाओं ने वट वृक्ष के पास पूजा-अर्चना की और वट वृक्ष में धागा बांधकर परिक्रमा की। शहर में दर्जनों स्थानों पर सुहागिनों ने वट वृक्ष के नीचे अखंड सोहाग की कामना के साथ पूजा-अर्चना की। कोर्ट परिसर, बांका थाना, बाबूटोला, नयाटोला, आजाद चौक, विजयनगर, भयहरण स्थान, तारामंदिर, समाहरणालय परिसर सहित अन्य स्थलों पर वट वृक्ष के पास सुहागिनों भीड़ देखने को मिली। सभी वट वृक्ष के समीप महिलाओं को वट सावित्री पूजा करने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते देखा गया।

वट वृक्ष में रक्षा सूत्र बांधकर अपने पति की दीर्घायु उम्र के लिए पूजा करती महिलाएं।

सुहागिनों का खास पर्व है वट सावित्री पूजा

आचार्य शशिकांत मिश्र ने बताया कि भारतीय संस्कृति में वट सावित्री या वर पूजा आदर्श प|ी का प्रतीक माना जाता है। यह महिलाओं का खास पर्व है। इस व्रत को सबसे पहले सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण को यमराज से वापस मांगकर लाने के बाद मनाया था। तब से इस व्रत को सुहागिनें मना रही हैं। आचार्य शशिकांत मिश्र बताते हैं कि वट सावित्री पूजा ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस दिन व्रत रखकर वट वृक्ष के नीचे पूजा करने से पति की आयु लंबी होती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार वट या बरगद वृक्ष पर ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश तीनों का वास होता है। वट सावित्री पूजा में फल, कपड़े एवं बांस के बने सामान डलिया, पंखा आदि से पूजा-अर्चना की जाती है। जो वट वृक्ष की परिक्रमा कर श्रद्धा से पूजा-अर्चना करते हैं उनकी मनोकामना पूरी होती है।पूजा के बाद व्रती महिलाएं पंडित से कथा सुनने के बाद उन्हें दान देती है। उसके बाद दिन भर व्रत रखकर पति के दीर्घायु व परिवार की मंगल कामना के लिए ईश्वर से आशीर्वाद मांगती है।

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