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जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने तैयार किया रोडमेप

3 वर्ष पहले
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जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। खेतों में पैदावार बढ़ाने के लिए राज्य मुख्यालय को लक्ष्य देकर किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कार्य योजना बनाई जा रही है। कृषि विभाग ने भी प्रखंडों में इसका अनुपालन कराने के लिए काम करना शुरू कर दिया है। केंचुओं द्वारा कचरा एवं मिट्टी को खाकर उसके अपशिष्ट पदार्थ को खाद के रुप में पेड़-पौधों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रकृति ने मानव की बढ़ती हुई जरूरतों को ध्यान में रखकर की है। केंचुए द्वारा बनाई गई खाद से पेड़ पौधों को नैसर्गिक रूप में शक्ति मिलती है। अनुदानित दर पर वर्मी कंपोस्ट वितरण के लिए कृषि कार्यालय ने प्रखंडवार लक्ष्य भी निर्धारित किया है। जिसके तहत जिले के 185 पंचायत के 7944 किसानों को बीच 23 लाख 83 हजार 200 रुपये वितरण का लक्ष्य रखा गया है।

वर्मी कंपोस्ट भूमि के वायु परिसंचरण, जल धारण क्षमता को सुधारने के साथ ही पेड़-पौधों में जड़ बढ़ाव का भी कार्य करता है। वर्मी कंपोस्ट एंजाइम की क्रिया से अपघटित जैविक पदार्थ का भूरा-भूरा दानेदार पूंज है। चूंकि वर्मी कंपोस्ट केंचुए की श्लेष्मा से घनीभूत होता है। जो पौधों के विकास, प्रजनन एवं उपज को प्रभावित करने में सक्षम होते हैं।

शंभूगंज में वर्मी कंपोस्ट उत्पादन के लिए तैयार पिट।

वर्मी कंपोस्ट खाद उत्पादन करने की विधि

खाद बनाने के लिए 3 फीट लंबा 3 फीट चौड़ा तथा 2.5 फीट चौड़ा तथा 2.5 फीट ऊंचा पिट तैयार करते हैं। इसमें 2 फीट ऊंचाई तक 10 से 15 दिन पुराना गोबर भरते हैं तथा लगभग 150 केंचुए छोड़ देते हैं। गोबर के ऊपर 5 से 10 सेंटीमीटर पुआल व सूखी पत्तियां डाल देते हैं। इस इकाई में बराबर 20 से 25 दिन तक पानी का छिड़काव किया जाना है। इसमें 40 प्रतिशत नमी को बनाए रखने के लिए आवश्यकता होती है। 40 से 45 दिन बाद वर्मी कंपोस्ट बन जाए तो 2 से 3 दिन तक पानी का छिड़काव बंद कर दें। पिट को सीधे धूप व बरसात से बचाने के लिए छप्पर से ढक देना चाहिए।

वर्मी कंपोस्ट के लाभ

खेतों में लगातार रासायनिक खादों के प्रयोग से कम होती जा रही मृदा की उपजाऊ शक्ति को वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग कर बढ़ाया जा सकता है। वर्मी कंपोस्ट के प्रयोग से फल, सब्जियों व अनाज की गुणवत्ता में सुधार आता है। जिससे किसान की उपज का बेहतर मूल्य मिलता है। वर्मी कंपोस्ट मृदा में सूक्ष्म जीवाणुओं को सक्रिय कर पौधों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले पोषक तत्वों को उपलब्ध करवाता है। जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होती है।

कंपोस्ट उत्पादन से मिलेगा रोजगार

ग्रामीण क्षेत्रों में वर्मी कंपोस्ट के उत्पादन से रोजगार की संभावनाएं उपलब्ध हो सकेगी। वर्मी कंपाेस्ट से खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक प्रखंड के एक गांव में इसी से खेती करवाया जायेगा। इसके लिए गांवों का चयन किया जा रहा है। -सुदामा महतो, डीएओ, बांका

वर्मी कंपोस्ट वितरण के लिए किसानों का प्रखंडवार वित्तीय लक्ष्य

प्रखंड किसान राशि

अमरपुर 815 2445500

बांका 686 2058800

बाराहाट 642 192600

बेलहर 772 231600

बौंसी 686 205800

चांदन 731 219300

धोरैया 858 257400

कटोरिया 686 205800

फुल्लीडुमर 478 143400

रजौन 772 231600

शंभूगंज 818 245400

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