पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Bhagalpur
  • राजस्व की वसूली में अव्वल लेकिन उत्पादन में विफल हुआ मत्स्य विभाग

राजस्व की वसूली में अव्वल लेकिन उत्पादन में विफल हुआ मत्स्य विभाग

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
संसाधनों के बावजूद बांका जिला मछली उत्पाद में पिछड़ रहा है। जिस कारण यहां के मछली व्यवसायियों को डिमांड के अनुरूप बाहर से मछली का आयात करना पड़ रहा है। मत्स्य विभाग के पास जिले में मछली उत्पादन के लिए 845 तालाब हैं। इसके बावजूद मछली व्यवसायियों को जिले में 2085 मैट्रिक टन मछली का आयात मजबूरी बस करना पड़ रहा है। जिले में मछली का आयात आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों से किया जाता है। विभाग ने इस साल मछली उत्पादन का लक्ष्य 12 हजार 64 मीट्रिक टन रखा था। लेकिन विभाग की उदासीनता की वजह से लक्ष्य के अनुरूप लक्ष्य हासिल नहीं हो सका। वित्तीय वर्ष में 2016-17 के दौरान महज 9 हजार 997 मीट्रिक टन मछली का उत्पाद ही विभाग कर सकी।

विभाग ने की 14 लाख रुपए की राजस्व वसूली : मत्स्य विभाग ने मछली उत्पादन के लक्ष्य को तो हासिल नहीं किया। लेकिन विभाग राजस्व वसूली में जरूर अव्वल हो गया है। विभाग द्वारा बांका जिले के 845 तालाबों का पट्टा कर उससे राजस्व के वसूली के लिए 11 लाख 19 हजार राशि का लक्ष्य रखा गया था। जबकि विभाग द्वारा 14 लाख रुपए की राजस्व वसूली की गई। यानि राजस्व के वसूली के मामले में विभाग ने 2 लाख 81 हजार रुपये का बढ़त दर्ज किया। फिर भी उत्पादन के लक्ष्य से पिछड़ गया।

845

तालाब हाेने के बावजूद कई में उत्पादन नहीं हाेने के कारण लक्ष्य नहीं हाे पा रहा प्राप्त

2085

मैट्रिक टन मछली का आयात जिले में मजबूरी बस करना पड़ रहा है

बांका बाजार में बिकती स्थानीय मछली।

उत्पादन लक्ष्य से पिछड़ने का ये है कारण

बांका जिले में 845 की संख्या में तालाब मौजूद है। जिसमें बांका- 28, बाराहाट- 81, धोरैया- 142, रजौन- 131, अमरपुर- 122, शंभूगंज- 67, फुल्लीडुमर- 43, बेलहर- 30, चांदन- 59, कटोरिया- 36 व बाौंसी- 100 तालाब हैं।

जिले में आंध्र प्रदेश पश्चिम बंगाल से आती है मछली

तालाब जहां हाेता है मत्स्य पालन।

दबंगों ने कई तालाबों का कर लिया है अतिक्रमण

जिले में 845 तालाब में कई ऐसे तालाब हैं जिस पर दंबगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। वहीं, कई तालाब ऐसे हैं जो अपने अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ रहा है। विभाग द्वारा इन तालाबों का भी पट्टा कर राजस्व की वसूली कर ली गयी। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि अाखिर किस प्रकार इन तालाबाें से उत्पादन किया जाए। इन तालाबों से मछली का उत्पादन नहीं हो पा रहा है, जिस वजह से विभाग अपने लक्ष्य से पिछड़ जा रहा है। वहीं विभाग द्वारा ऐसे तालाबों को बचाने के लिए कोई प्रयास भी नहीं किए जा रहे हैं। ज्ञात हाे कि बांका जिले में 60 प्रतिशत के करीब तालाब अतिक्रमण का शिकार हैं।

बोरिंग करवाने तथा पंपिंग सेट के लिए भी मिलती है राशि

मत्स्य पालन को लेकर सरकार द्वारा सब्सिडी मुहैया कराई जाती है। जिससे मछली पालन से लोग जुड़ें। जिले में एससी-एसटी वर्ग को मछली उत्पाद पर 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाती है। वहीं सामान्य वर्ग को 50 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है। इसके अलावे सरकार द्वारा मत्स्य पालन के लिए 75 हजार की राशि दी जाती है। जिसमें बोरिंग करवाने तथा पंपिंग सेट लगाने के लिए राशि दी जाती है।

अतिक्रमणमुक्त हाेते ही शुरू कराया जाएगा उत्पादन

पिछले वित्तीय वर्ष में मछली उत्पादन के लक्ष्य काे मत्स्य विभाग प्राप्त नहीं कर पाया। लेकिन इस वित्तीय वर्ष में हासिल करने की पूरी काेशिश की जाएगी। पांच हेक्टर तालाब खोदने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें साढ़े चार हेक्टर की खुदाई की जा चुकी है। वहीं अतिक्रमित तालाबाें काे अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए राजस्व विभाग काे लिस्ट साैंपा गया है। अतिक्रमणमुक्त हाेते ही इन तालाबाें से भी उत्पादन शुरू करायी जाएगी। इससे स्वत: लक्ष्य हासिल हाे जाएगा। संजय कुमार किस्कु, जिला मत्स्य पदाधिकारी

खबरें और भी हैं...