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भागवत की दो संतान वैराग्य और भक्ति है: नारायण दास

3 वर्ष पहले
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भागवत की दो संतान वैराग्य और भक्ति है। जहां भागवत की कथा होती है, वहां भक्ति का अपने- आप समागम होता है। अनुमंडल के काझी गांव में सोमवार से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा वाचन के पहले दिन वृंदावन के कथावाचक नारायण दासजी राधेय ने यह कहा।

उन्होंने अपने प्रवचनों में कहा कि सर्वधर्म समन्वय भागवत परिवार का उद्देश्य श्रद्धालुओं को भागवत के मर्म को समझाते हुए अध्यात्म, प्राणायाम, हवन आदि की ओर आशक्ति उत्पन्न करना है। बहु प्रतीक्षित कार्यक्रम के कारण काझी स्थित लक्ष्मी स्थान पर आबाल- वृद्ध स्त्री और पुरूष श्रद्धालुओं की भीड़ कथावाचन के पहले दिन ही लग गई। लोगों ने जहां नारायण दासजी राधेय महाराज के प्रवचनों का रसपान किया, वहीं उनके साथ आए अन्य साधु संतों के कर्णप्रिय भजनों का आनंद भी उठाया। सर्वधर्म समन्वय भागवत परिवार के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में राम किशोर सिंह, मुरली प्रसाद सिंह, रंजन सिंह, गणेश सिंह, कमल किशोर सिंह, कुंदन सिंह, महानंद सिंह, आशीष कुमार सिंह, नीरज कुमार, सर्वेश कुमार, अरविन्द महतो, चमन कुमार सिंह, गुड्डू सिंह, निर्मल झा, बंटी झा, अमित कुमार, ढालो ऋषि, मधुकांत ठाकुर, अमित मंडल, त्रिभुवन सिंह, मिलन सिंह आदि का सतत सहयोग मिल रहा है।

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