गढ़वा जिला मुख्यालय सहित विभिन्न क्षेत्रों में रमजान- उल- मुबारक की पहली जुमा की नमाज अदा की गई। इस अवसर पर नमाजियों में बढ़ोतरी होने के कारण मस्जिद इंतजामिया कमेटियों के द्वारा वजू का पानी सहित ध्वनि का बेहतर इंतजाम किया गया था। शहर की जामा मस्जिद रांकी मोहल्ला में पेश इमाम हाफिज अब्दुस्समद ने नमाज- ए- जुमा अदा कराई। जबकि टंडवा मस्जिद में मौलाना सज्जाद आलम मिसबाही, इंदिरा गांधी रोड स्थित छोटी मस्जिद में मौलाना लियाकत हुसैन, उंचरी मस्जिद में मौलाना जफरुल्लाह, मदरसा तबलिगुल इस्लाम स्थित मस्जिद में मुफ्ती मजाहिद हुसैन व कल्याणपुर मस्जिद में मौलाना यूसुफ अंसारी ने जुमे की नमाज अदा कराई। नमाज - ए - जुमा को लेकर मुस्लिम मोहल्लों में शुक्रवार की सुबह से ही चहल पहल देखी गई।
खास कर बच्चें में विशेष उत्साह देखा गया। छोटे- छोटे बच्चों ने भी आज रोजा रखने के साथ ही नमाज- ए- जुमा अदा की। नमाज- ए- जुमा में उपस्थित नमाजियों को संबोधित करते हुए जामा मस्जिद के पेश इमाम हाफिज अब्दुस्समद ने कहा कि रोजा वह इबादत है, जिसका समरा खुदा खुद अता करता है। रोजा गरीबों की हालात समझने का तरीका है। रोजा तीन असरों में बंटा हुआ है। पहला रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा निजात । मुसलमानों को रोजा रखते हुए खुदा की इबादत में मशगूल रहना चाहिए। ताकि वे ज्यादा से ज्यादा सवाब बटोर सकें। टंडवा मस्जिद के पेश मौलाना सज्जाद मिसबाही ने कहा कि अल्लाह के रसूल सल्ले अलैह व सल्लम ने फरमाया है कि जन्नत के दरवाजों में से एक दरवाजा का नाम रेयान है। उससे सिर्फ रोजेदार ही जन्नत में जाएंगे। इसलिए मुसलमानों को रोजा रखना चाहिए। ताकि वे जन्नत के हकदार बन सकें। यह महीना लोगों के लिए काफी अजीम है। इस महीने में लोगों को ज्यादा से ज्यादा खुदा की इबादत करनी चाहिए। इस महीना में कुरआन- ए- पाक का नुजूल हुआ था। उंचरी मस्जिद के पेश इमाम मौलाना जफरुल्लाह ने कहा कि रमजान - उल - मुबारक का महीना सब्र का महीना है और सब्र का सवाब जन्नत है। इस महीने में मोमिनों के रिज्क को बढ़ा दिया जाता है।
जो मोमिन इस महीने में रोजेदार को इफ्तार कराता है। उसके गुनाहों की मगफिरत की जाती है। साथ ही रोजेदार के बराबर ही इफ्तार कराने वाले को सवाब मिलता है। कल्याणपुर मस्जिद के पेश इमाम मौलाना यूसुफ ने कहा कि अल्लाह सूरा अलबकरा में फरमाते हैं कि ऐ इमानवालों तुम पर रोजे फर्ज किए गए हैं। जिस प्रकार तुमसे पहले के लोगों पर किया गया था। ताकि तुम्हारे अंदर परहेजगारी उत्पन्न हो सके। मुसलमानों को रमजान के महीने में अधिक से अधिक खुदा की इबादत करनी चाहिए। साथ ही गरीबों व लाचार व्यक्तियों का ख्याल रखना चाहिए। नमाज- ए- जुमा में हिस्सा लेने के लिए अजान के पहले से ही नमाजी मस्जिदों में दाखिल होने लगे थे। नमाज - ए - जुमा अदा करने के बाद नमाजियों ने अल्लाह ताअला से दुआएं की। इस अवसर पर हर मस्जिदों के पास जकात व फितरा मांगने वालों की भीड़ लगी थी।
शहर के जामा मस्जिद रांकी मोहल्ला में नमाज-ए- जुमा के दौरान खुदा से दुआ करते अकीदतमंद ।
अल्लाह की रहमत और बरकत होती है बेशुमार
बंशीधर नगर में रमजान के पवित्र महीने के पहले जुमे पर शुक्रवार को मुसलमान धर्मावलंबियों ने मस्जिदों में रमजान की नमाज अदा की। इस दौरान प्रखंड क्षेत्र की विभिन्न मस्जिदों में नमाज के लिए रोजेदारों की भीड़ देखी गई। नमाज में बच्चे,युवा, बुजुर्गों की भारी तादात दिखाई दी । नगर उंटारी मस्जिद ,बरडीहा मस्जिद, नरही मस्जिद, कुशडंड मस्जिद, कोइन्दी मस्जिद में भी काफी संख्या में रोजेदारों ने जुमे की नमाज अदा की । सभी मस्जिदों में तकरीर का भी आयोजन किया गया। इसमें नगर उंटारी जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अमीरुदीन साहब ने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब ने फरमाया है कि रमजान के एक दिन पूर्व तुम्हारे ऊपर एक महीना आ रहा है। यह हजार महीनों से बेहतर है। इस महीने में अल्लाह की रहमत व बरकत बेशुमार होती है। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना बरकत का होती है। इस महीने में जन्नत का दरवाजा खोल दिया जाता है। और जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। बरडीहा मस्जिद इमाम हाफिज मनुवर आलम ने बताया कि मुसलमान के लिए सबसे पवित्र महीना माहे रमजान होता है। रमजान में ही कुरान अवतरित हुआ है। जो इस माह में रोजा रखकर रात में इबादत करता है उसके पिछले सारे गुनाह माफ हो जाते हैं। बताया कि सिर्फ खाने-पीने पर रोक लगाने से नहीं अपितु बुरे कार्यों पर रोक रखने का नाम है रोजा। मौके पर सदर कलाम खान सरपरस्त तस्लीम खान, नसरुल्लाह खान, तस्लीम खान महमूद आलम सीनियर, आफताब फुनू, शाहिद नवाज, अरमान खतरी, बरडीहा मस्जिद में मो आबिद हुसैन डॉ ताहिर हुसैन अमीर हसन अंसारी वकील अहमद अब्दुल हाफिज अंसारी सहित बड़ी संख्या में रोजेदार शामिल थे।