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लांग टर्म निवेशकों के लिए इक्विटी फंड में जोखिम कम

3 वर्ष पहले
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पिछले लेख में हमने म्यूचुअल फंड की विभिन्न कैटेगरी और एसेट क्लास के बारे में जाना। इस लेख में हम इक्विटी फंड की चर्चा करेंगे और समझेंगे कि लांग टर्म में इनसे ज्यादा फायदा कैसे हासिल किया जा सकता है। इक्विटी फंड का प्रदर्शन स्टॉक पर निर्भर करता है, इसलिए इसमें जोखिम होता है और शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। अक्सर सलाह दी जाती है कि निवेशकों को इक्विटी फंड में वही पैसा लगाना चाहिए जिसकी उन्हें कम से कम पांच साल के लिए जरूरत न हो। वह भी उचित सलाह के बाद। शॉर्ट टर्म में बाजार में उतार-चढ़ाव का जो जोखिम होता है, वह लांग टर्म में लगभग खत्म हो जाता है। इसलिए निवेशक इससे अच्छे रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं।

लार्जकैप फंड में जोखिम दूसरों से कम : इक्विटी फंड तीन तरह के होते हैं- लार्जकैप, मिडकैप और मल्टीकैप फंड? लार्जकैप फंड वे कहलाते हैं जो 20,000 करोड़ रुपए से ज्यादा मार्केट कैप वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। ये कंपनियां बड़ी होती हैं, अपने सेगमेंट में इनकी मजबूत स्थिति होती है, मैनेजमेंट का बेहतर ट्रैक रिकॉर्ड होता है और कई बिजनेस चक्र को झेल चुकी होती हैं। रिसर्च एनालिस्ट इनपर पूरी रिसर्च करते हैं, इसलिए इनके बारे में सूचनाएं आसानी से उपलब्ध होती हैं। इक्विटी फंड में निवेश को जोखिम वाला माना जाता है, लेकिन लार्जकैप फंड में जोखिम दूसरों की तुलना में कम होता है।

मिडकैप और स्मॉलकैप में अस्थिरता ज्यादा : मिडकैप फंड उन्हें कहते हैं जिनमें पैसे का निवेश लार्जकैप से छोटी कंपनियों में होता है। इनके बारे में रिसर्च कम होती है, संभव है कि अपने बिजनेस सेगमेंट में इनकी स्थिति ज्यादा मजबूत न हो, कंपनी ज्यादा पुरानी न हो, मैनेजमेंट की क्वालिटी भी लार्जकैप की तुलना में कमतर हो। ऐसी कंपनियों के स्टॉक की कीमत में अस्थिरता ज्यादा होगी और इनमें जोखिम भी अधिक रहेगा। मिडकैप से छोटी होती हैं स्मॉलकैप कंपनियां। इनमें निवेश करने वाले फंड को स्मॉलकैप फंड कहते हैं। इनमें रिसर्च यदा-कदा ही होती है। इनके ट्रैक रिकॉर्ड और मैनेजमेंट क्वालिटी के बारे में भी ज्यादा जानकारी नहीं होती। आम तौर पर इनका बिजनेस लार्जकैप कंपनियों को सप्लाई पर निर्भर होता है। इसलिए लार्जकैप कंपनियों की तुलना में इनमें निवेश काफी ज्यादा जोखिम भरा होता है।

ज्यादा जोखिम नहीं ले सकते तो लार्जकैप बेहतर : इक्विटी फंड जैसे भी हों, उनमें निवेश करने पर कुछ न कुछ जोखिम होता ही है। इसलिए वित्तीय सलाहकार से मशविरा लेने के बाद ही इनमें पैसे लगाने चाहिए। लेकिन रिस्क और रिटर्न, दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू माने जाते हैं। जो चीज शॉर्ट टर्म में ज्यादा जोखिम वाली होती है, वह लांग टर्म में ज्यादा रिटर्न दे सकती है। कहने का मतलब यह कि बढ़िया मैनेजमेंट वाला स्मॉलकैप फंड लांग टर्म में लार्जकैप फंड से बेहतर रिटर्न दे सकता है। जो निवेशक ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते, उन्हें मिडकैप और स्मॉलकैप फंड से दूर रहना चाहिए। बाजार की समझ और ज्यादा जोखिम उठाने की क्षमता रखने वाले निवेशकों को ही स्मॉलकैप फंड में निवेश करना चाहिए। इसमें भी उनका नजरिया लांग टर्म का रहे। जो निवेशक कम जोखिम चाहते हैं, उन्हें लार्जकैप फंड में निवेश करना चाहिए।

- ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।

डूंगरपुर सर्राफा बाजार: डूंगरपुर स्थानीय सर्राफा बाजार में मंगलवार शाम 6:12 बजे सोने और चांदी के भाव इस प्रकार रहे। सोना स्टैंडर्ड 32300 (999 प्रति 10 ग्राम), सोना जेवराती 31650 (प्रति 10 ग्राम), चांदी चौरसा 40500(प्रति किलो), चांदी टंच 40100 (प्रति किलो), चांदी जेवर: 372 रुपए प्रति 10 ग्राम। स्त्रोत: एमके ज्वैलर्स, डूंगरपुर

म्यूचुअल फंड

वेदप्रकाश चतुर्वेदी, पूर्व एमडी, टाटा म्यूचुअल फंड

आयात बिल घटाने के लिए बायोफ्यूल नीति को कैबिनेट की मंजूरी

खराब अनाज, मक्का और शकरकंद से बने एथनॉल को पेट्रोल में मिला सकेंगे

खराब अनाज, मक्का और शकरकंद से बने एथनॉल को पेट्रोल में मिला सकेंगे

एजेंसी | नई दिल्ली

कैबिनेट ने बुधवार को नेशनल बायोफ्यूल पॉलिसी को मंजूरी दे दी। इसके मुताबिक खराब हो चुके गेहूं-चावल, सड़े आलू, मक्का और शकरकंद से बने एथनॉल को पेट्रोल में मिलाने की अनुमति होगी। इससे ईंधन के आयात के बिल में हर साल 4,000 करोड़ रु. तक कमी आएगी। अभी गन्ने से बने एथनॉल को ही पेट्रोल में मिलाने की अनुमति है। बायोफ्यूल को-ऑर्डिनेशन कमेटी की मंजूरी से सरप्लस खाद्यान्न के इस्तेमाल की भी अनुमति दी गई है।

बायोफ्यूल की तीन श्रेणी बनाई गई हैं। शीरे से बने एथनॉल और गैर-खाद्य तिलहन से बने बायो-डीजल को पहली पीढ़ी (1जी) में रखा गया है। नगरीय निकायों से निकलने वाले ठोस कचरे से बना एथनॉल दूसरी पीढ़ी (2जी) का होगा। बायो-सीएनजी तीसरी पीढ़ी (3जी) का बायोफ्यूल होगा। सरकार यूज्ड कुकिंग ऑयल और कम अवधि की फसलों से बायो-डीजल के लिए सप्लाई चेन मैकेनिज्म बनाने को बढ़ावा देगी।

5,000 करोड़ का वायबिलिटी गैप फंड: छह साल के लिए 5,000 करोड़ रु. का वायबिलिटी गैप फंड बनेगा। इससे कंपनियों के नुकसान की भरपाई होगी। कंपनियां 1जी के मुकाबले 2जी एथनॉल की कीमत ज्यादा रख सकेंगी। टैक्स इन्सेंटिव भी मिलेगा।

एजेंसी | नई दिल्ली

कैबिनेट ने बुधवार को नेशनल बायोफ्यूल पॉलिसी को मंजूरी दे दी। इसके मुताबिक खराब हो चुके गेहूं-चावल, सड़े आलू, मक्का और शकरकंद से बने एथनॉल को पेट्रोल में मिलाने की अनुमति होगी। इससे ईंधन के आयात के बिल में हर साल 4,000 करोड़ रु. तक कमी आएगी। अभी गन्ने से बने एथनॉल को ही पेट्रोल में मिलाने की अनुमति है। बायोफ्यूल को-ऑर्डिनेशन कमेटी की मंजूरी से सरप्लस खाद्यान्न के इस्तेमाल की भी अनुमति दी गई है।

बायोफ्यूल की तीन श्रेणी बनाई गई हैं। शीरे से बने एथनॉल और गैर-खाद्य तिलहन से बने बायो-डीजल को पहली पीढ़ी (1जी) में रखा गया है। नगरीय निकायों से निकलने वाले ठोस कचरे से बना एथनॉल दूसरी पीढ़ी (2जी) का होगा। बायो-सीएनजी तीसरी पीढ़ी (3जी) का बायोफ्यूल होगा। सरकार यूज्ड कुकिंग ऑयल और कम अवधि की फसलों से बायो-डीजल के लिए सप्लाई चेन मैकेनिज्म बनाने को बढ़ावा देगी।

5,000 करोड़ का वायबिलिटी गैप फंड: छह साल के लिए 5,000 करोड़ रु. का वायबिलिटी गैप फंड बनेगा। इससे कंपनियों के नुकसान की भरपाई होगी। कंपनियां 1जी के मुकाबले 2जी एथनॉल की कीमत ज्यादा रख सकेंगी। टैक्स इन्सेंटिव भी मिलेगा।

सरप्लस खाद्यान्न का भी एथनॉल बनाने में इस्तेमाल हो सकेगा

सरप्लस खाद्यान्न का भी एथनॉल बनाने में इस्तेमाल हो सकेगा

अनाज - बांसवाड़ा मंडी बाजार में मंगलवार को भाव इस प्रकार रहे। इसमें गेहूं 1600 रुपए (प्रति क्विंटल), गेहूं टुकड़ी 1650 रुपए (प्रति क्विंटल), मक्का सफेद 1200 रुपए (प्रति क्विंटल), मक्का पीली 1250 रुपए (प्रति क्विंटल), चना 3300 रुपए (प्रति क्विंटल), सोयाबीन 3500 रुपए प्रति क्विंटल रहे।

तेल- फॉरचून रिफाइंड सोयाबीन 1425, फॉरचून सनफ्लॉवर 1400, मूंगफली परिगोल्ड- 1550, परिगोल्ड सोयाबीन 1280, नवरंग सोयाबीन 1280, घी 5300-5500, मयूर 1500, मूंगफली पायल 1450, चेतक 1250, तिरुपति सोयाबीन 1320, डबल फिल्टर प्रिया 1520, रोनक रिफाइंड तेल 1220, क्लासिक सोयाबीन 1260, सरसों तेल 1250, देशी घी महान 5400, पंकज मूंगफली तेल 1500, धारा सोयाबीन 1350, विमल सोयाबीन 1300, अवि सोयाबीन 1340 रुपए। दाल - चना दाल 4600 रुपए (प्रति क्विंटल), मसूर दाल - 4600 रुपए (प्रति क्विंटल), मूंग मोगर 6800 रुपए (प्रति क्विंटल), उड़द मोगर 5000 रुपए (प्रति क्विंटल), तुअर दाल टोप टेन 6500 रुपए (प्रति क्विंटल), तुअर दाल मोती दाना 5200 रुपए (प्रति क्विंटल), फॉरचून बेसन 6200 रुपए (प्रति क्विंटल), लखडाजी बेसण 5200 रुपए (प्रति क्विंटल), बेसन पिनकी ब्रांड 5100 रुपए (प्रति क्विंटल), शक्कर 2840-2860 रुपए (प्रति क्विंटल), गुड 3000 रुपए (प्रति क्विंटल), पौहे 3400 रुपए (प्रति क्विंटल), बासमती कोहिनूर चावल 9000, तिबार 7500, दुबार 6500, चावल बूंदी 5500, चावल शरबती 3600, चावल सेला 2500, चावल सिल्की 2700, चावल परमल 2400, फॉरचून बासमती चावल 10500 रुपए प्रति क्विंटल रहे। किराणा- हल्दी निजाम 90, हल्दी सागली 150, धनिया चालू 70, धनिया बेस्ट 140, साबूदाना छोटा 45, साबुदाना बड़ा 52, साबूदाना वर लक्ष्मी 58, सींगदाना 60, मेथी 45, जीरा हल्का 170, जीरा बेस्ट 215, काली मिर्च 380 , काजू टुकड़ी 725, काजू साबूत 800, बादाम 650, खसखस 520, गोला साेना चांदी 200 रुपए।

दाहोद मंडी : दाहोद मण्डी बाजार में मंगलवार को भाव में गेहूं 1070-2000, मक्का सफेद 1275-1400, मक्का पीली 1190-1295 (प्रति क्विंटल), जौ 1350-1375(प्रति क्विंटल), चना 3450 (प्रति क्विंटल), मूंग 5100-5250(प्रति क्विंटल), उड़द 2800-3300 (प्रति क्विंटल), ज्वार 1150-1450 (प्रति क्विंटल), तुअर लाल 3350-3400(प्रति क्विंटल), तुअर सफेद 3600-3900 (प्रति क्विंटल), साल चालू 1480-1490(प्रति क्विंटल), साल जलजीरा 1750-1850(प्रति क्विंटल), सोयाबीन 3675-3700(प्रति क्विंटल), मूंगफली 3200-3500 (प्रति क्विंटल) शक्कर 2780-2800 रुपए प्रति क्विंटल रहे।

बांसवाड़ा सर्राफा बाजार : स्थानीय सर्राफा बाजार में बुधवार शाम 7:02 बजे सोने और चांदी के दामों में भाव क्रमश: इस प्रकार हैं। सोना स्टैंडर्ड (दस ग्राम) 32000 सोना जेवराती 31400(दस ग्राम) 29 चांदी टंच (प्रति किलो) 40000 चांदी चौरसा प्रति किलो 40100 कलदार 480 रुपए। स्त्रोत: पीएम ज्वैलर्स, बांसवाड़ा

सागवाड़ा : स्थानीय सर्राफा बाजार में बुधवार शाम 6:36 बजे सोने और चांदी के दामों में भाव क्रमश: इस प्रकार हैं। सोना स्टैंडर्ड (दस ग्राम) 32000 सोना जेवराती (दस ग्राम) रुपए।







31500 चांदी टंच (प्रति किलो) 39700 चांदी चौरसा (प्रति किलो) 40200 रुपए। स्त्रोत:खोडनिया ज्वैलर्स, सागवाड़ा (8875488880)

एथनॉल से आयात बिल में सालाना 4,000 करोड़ रु. की बचत

एक करोड़ लीटर बायो-एथनॉल पेट्रोल में मिलाने से तेल आयात बिल में 28 करोड़ रुपए विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इस वर्ष 150 करोड़ लीटर एथनॉल की सप्लाई होने की संभावना है। इसके मुताबिक आयात बिल में 4,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत होगी। इसके अलावा नगरीय निकायों में हर साल 6.2 करोड़ ठोस कचरा निकलता है। इससे ईंधन बनाने की टेक्नोलॉजी मौजूद है। एक टन कचरा ईंधन में 20% की बचत करवा सकता है। तेल कंपनियां 10 हजार करोड़ के निवेश से 12 बायो रिफाइनरी लगा रही हैं।

कैबिनेट के तीन अन्य महत्वपूर्ण फैसले

दाल निर्यात को मंजूरी, कुछ किस्मों के आयात पर ड्यूटी बढ़ाई

दाल निर्यात को मंजूरी, कुछ किस्मों के आयात पर ड्यूटी बढ़ाई

चने के निर्यात पर मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) के तहत 7% इन्सेंटिव को मंजूरी दी गई है। चने पर 60%, पीले मटर पर 50% आयात इम्पोर्ट ड्यूटी लगाई गई है। मसूर पर इसे 10% से बढ़ाकर 30% किया गया है। वर्ष 2016-17 में 66 लाख टन दालों का आयात हुआ था, जो 2017-18 में यह 56.5 लाख टन रह गया था।

चने के निर्यात पर मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) के तहत 7% इन्सेंटिव को मंजूरी दी गई है। चने पर 60%, पीले मटर पर 50% आयात इम्पोर्ट ड्यूटी लगाई गई है। मसूर पर इसे 10% से बढ़ाकर 30% किया गया है। वर्ष 2016-17 में 66 लाख टन दालों का आयात हुआ था, जो 2017-18 में यह 56.5 लाख टन रह गया था।

लघु सिंचाई बढ़ाने के लिए 5,000 करोड़ रुपए का फंड बनेगा : लघु सिंचाई में ज्यादा जमीन लाने के लिए नाबार्ड के अधीन 5,000 करोड़ का फंड बनेगा। इसमें 2,000 करोड़ इस साल के लिए और 3,000 करोड़ 2019-20 के लिए हैं। नाबार्ड कम ब्याज पर राज्यों को पैसे उपलब्ध कराएगा। योजना के तहत 3 फीसदी ब्याज पर कर्ज दिया जाएगा। अभी लघु सिंचाई के दायरे में सिर्फ एक करोड़ एकड़ भूमि है, जबकि क्षमता 7 करोड़ एकड़ की है।

लघु सिंचाई बढ़ाने के लिए 5,000 करोड़ रुपए का फंड बनेगा : लघु सिंचाई में ज्यादा जमीन लाने के लिए नाबार्ड के अधीन 5,000 करोड़ का फंड बनेगा। इसमें 2,000 करोड़ इस साल के लिए और 3,000 करोड़ 2019-20 के लिए हैं। नाबार्ड कम ब्याज पर राज्यों को पैसे उपलब्ध कराएगा। योजना के तहत 3 फीसदी ब्याज पर कर्ज दिया जाएगा। अभी लघु सिंचाई के दायरे में सिर्फ एक करोड़ एकड़ भूमि है, जबकि क्षमता 7 करोड़ एकड़ की है।

आपसी विवाद में कोर्ट नहीं जा सकेंगी सरकारी कंपनियां

आपसी विवाद में कोर्ट नहीं जा सकेंगी सरकारी कंपनियां

सरकारी विभागों और कंपनियों के बीच विवाद सुलझाने की नई व्यवस्था बनाई गई है। कंपनियां या विभाग एक दूसरे के खिलाफ कोर्ट नहीं जा सकेंगे। विवाद निपटाने के लिए दो स्तर की व्यवस्था होगी। पहले संबंधित मंत्रालयों के सचिवों की समिति इन पर गौर करेगी।

सरकारी विभागों और कंपनियों के बीच विवाद सुलझाने की नई व्यवस्था बनाई गई है। कंपनियां या विभाग एक दूसरे के खिलाफ कोर्ट नहीं जा सकेंगे। विवाद निपटाने के लिए दो स्तर की व्यवस्था होगी। पहले संबंधित मंत्रालयों के सचिवों की समिति इन पर गौर करेगी।

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